क्या UGC, आरक्षण और SC-ST Act बीजेपी के लिए नई मुसीबत बन गया है? क्योंकि जिस सामान्य वर्ग को बीजेपी अपना मजबूत आधार मानती रही है, उसी वर्ग के विरोध की आवाज अब…

क्या UGC, आरक्षण और SC-ST Act बीजेपी के लिए नई मुसीबत बन गया है? क्योंकि जिस सामान्य वर्ग को बीजेपी अपना मजबूत आधार मानती रही है, उसी वर्ग के विरोध की आवाज अब सड़कों से लेकर सत्ता के गलियारों तक सुनाई दे रही है! कहीं सामान्य वर्ग के नेताओं की शवयात्रा निकाली जा रही है… कहीं सैकड़ों ट्रैक्टरों से हाईवे घेरा जा रहा है… कहीं हाथों में मशाल लेकर प्रदर्शन हो रहा है… तो कहीं अपने बच्चों के भविष्य को लेकर लोग सरकार के खिलाफ हुंकार भर रहे हैं।

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कहा जा रहा है UGC, आरक्षण और SC-ST Act को लेकर उत्तर प्रदेश से लेकर मध्य प्रदेश तक विरोध लगातार तेज हो रहा है। मध्य प्रदेश में तो प्रदर्शनकारियों ने ब्राह्मण और ठाकुर नेताओं की शवयात्रा निकालकर नदी में पिंडदान तक किया। प्रदर्शन का यह तरीका अब सियासी बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है। राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहा है—अगर यह गुस्सा सिर्फ प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा और वोट की चोट में बदल गया, तो 2027 में बीजेपी के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है? खासकर उत्तर प्रदेश में, जहां ब्राह्मण और ठाकुर समाज का 150 विधानसभा सीटों दब दबा राजनीतिक प्रभाव माना जाता है। यही वजह है कि UGC को लेकर बढ़ते विरोध के बीच बीजेपी के भीतर भी इस मुद्दे को लेकर मंथन की चर्चा अब तेज हो गई है। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा की सामान्य वर्ग के नेताओं से बातचीत और समाधान के लिए समय मांगने की खबरों ने इस चर्चा को और हवा दी है।उधर आंदोलन से जुड़े नेता महिपाल सिंह मकराना ने SC-ST Act की तर्ज पर सामान्य वर्ग के लिए भी जनरल एक्ट बनाने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि अगर हमारे समाज, देवी-देवताओं या समुदाय के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी होती है, तो उसके खिलाफ भी कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। मकराना ने कहा कि सरकार उन लोगो के खिलाफ करवाई क्यों नहीं करती जो ब्राह्मणों और ठाकुरों को गाली देते है खुलेआम नारा लगती है तिलक तराजू और तलवार इनको मारो जुटे चार ,,इन नारो से क्या हमारा अपमान नहीं होता ,,इसके आलावा मकराना ने तो यहां तक दावा किया है कि UGC और सामान्य वर्ग के मुद्दे पर आंदोलन इतना बड़ा है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनकी सीट से चुनाव हराने की ताकत रखता है। हालांकि यह उनका राजनीतिक दावा है, लेकिन इससे एक बात साफ है—मुद्दा अब सिर्फ UGC तक सीमित नहीं रह गया है। आरक्षण, SC-ST Act और सामान्य वर्ग की नाराजगी एक बड़े राजनीतिक विमर्श में बदलती जा रही है। आंदोलनकारी संगठनों का आरोप है कि बीजेपी ने जिन सामाजिक वर्गों के समर्थन से लगातार चुनावी मजबूती हासिल की, वही वर्ग अब अपनी मांगों और शिकायतों को लेकर पार्टी नेतृत्व से सवाल पूछ रहा है। आगरा में 200 से ज्यादा ट्रैक्टरों के जरिए विरोध प्रदर्शन की खबर हो या अलग-अलग जिलों में सड़क पर उतरते प्रदर्शनकारी—तस्वीरें यही बता रही हैं कि मुद्दा जमीन पर पहुंच चुका है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या बीजेपी इस नाराजगी को समय रहते संभाल पाएगी? क्या UGC, आरक्षण और SC-ST Act पर सरकार कोई बड़ा कदम उठाएगी? या फिर सामान्य वर्ग का यह गुस्सा 2027 की सियासत में एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन जाएगा? क्योंकि फिलहाल लड़ाई सिर्फ कानून की नहीं…लड़ाई उस भरोसे की भी है, जिस पर बीजेपी और उसके समर्थक सामाजिक वर्गों के बीच लंबे समय से सियासी रिश्ता टिका हुआ है।