वरिष्ठ अधिवक्ता देवेंद्र कुमार राय और वरिष्ठ IAS अधिकारी मनोज कुमार सिंह समेत विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ विश्वविद्यालय से जुड़े

लखनऊ। ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय ने छात्रों की शिक्षा को किताबी ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय उसे व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की बैठक में पहली बार ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ के तौर पर छह अनुभवी विशेषज्ञों को विश्वविद्यालय से जोड़ने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।कुलपति प्रोफेसर अजय तनेजा की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिए गए इस फैसले के बाद अलग-अलग क्षेत्रों में लंबे समय से काम कर रहे विशेषज्ञ अब विद्यार्थियों के साथ अपने व्यावहारिक अनुभव साझा करेंगे।

छह विशेषज्ञों को मिली जिम्मेदारी

विश्वविद्यालय द्वारा गठित ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ पैनल में देवेंद्र कुमार राय, इरशाद अहमद, मनोज कुमार सिंह, अखिलेश शुक्ला, जी.के. गोस्वामी और मुकेश बहादुर सिंह को शामिल किया गया है।इन विशेषज्ञों के जुड़ने से विद्यार्थियों को अपने-अपने विषयों में वास्तविक कार्यक्षेत्र की चुनौतियों, प्रक्रियाओं और व्यावहारिक पहलुओं को समझने का अवसर मिलेगा।

वरिष्ठ अधिवक्ता देवेंद्र कुमार राय का अनुभव छात्रों के लिए अहम

पैनल में वरिष्ठ अधिवक्ता देवेंद्र कुमार राय की नियुक्ति को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्हें लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों में क्रिमिनल ट्रायल के अनुभवी अधिवक्ता के तौर पर जाना जाता है।देवेंद्र कुमार राय प्रतिष्ठित लॉ फर्म ‘कोलंबस लीगल’ के संस्थापक भी हैं। उनके अनुभव के जरिए विद्यार्थियों को न्यायिक प्रक्रिया, मुकदमों की तैयारी, साक्ष्यों की भूमिका, कानूनी रणनीति और अदालत में होने वाली वास्तविक कार्यवाही को समझने का अवसर मिल सकता है।

वरिष्ठ IAS और पूर्व IPS अधिकारी भी पैनल में

विश्वविद्यालय के ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ पैनल में वरिष्ठ IAS अधिकारी मनोज कुमार सिंह और पूर्व IPS अधिकारी जी.के. गोस्वामी को भी शामिल किया गया है।प्रशासन और पुलिस सेवा से जुड़े अनुभवी अधिकारियों के मार्गदर्शन से विद्यार्थियों को सरकारी व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यप्रणाली, सार्वजनिक सेवा और जमीनी स्तर पर आने वाली चुनौतियों की व्यावहारिक जानकारी मिल सकेगी।

किताबी ज्ञान के साथ मिलेगा फील्ड एक्सपीरियंस

विश्वविद्यालय का मानना है कि अनुभवी प्रोफेशनल्स को शिक्षण व्यवस्था से जोड़ने से विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम आधारित जानकारी ही नहीं मिलेगी, बल्कि उन्हें वास्तविक कार्यक्षेत्र की जरूरतों और चुनौतियों को भी समझने का अवसर मिलेगा।इस पहल के तहत विशेषज्ञ अपने क्षेत्र के अनुभव, केस स्टडी और व्यावहारिक ज्ञान विद्यार्थियों के साथ साझा कर सकते हैं, जिससे उनके कौशल और करियर की तैयारी को मजबूती मिलेगी।

करियर की तैयारी में मददगार होगी नई पहल

‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ की नियुक्ति का उद्देश्य छात्रों को उनके संभावित करियर क्षेत्र के लिए पहले से तैयार करना है। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से विद्यार्थियों को इंडस्ट्री और प्रोफेशनल वर्क कल्चर की बेहतर समझ मिलने की उम्मीद है।विश्वविद्यालय के अनुसार, यह पहल सैद्धांतिक शिक्षा और व्यावहारिक अनुभव के बीच की दूरी कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

छात्रों के भविष्य को नई दिशा देने की कोशिश

भाषा विश्वविद्यालय की यह पहल छात्रों को पारंपरिक कक्षा और किताबों से बाहर निकलकर अनुभवी प्रोफेशनल्स से सीधे सीखने का अवसर देगी। विश्वविद्यालय को उम्मीद है कि विशेषज्ञों का अनुभव विद्यार्थियों में व्यावहारिक समझ, आत्मविश्वास और पेशेवर दक्षता विकसित करने में मददगार साबित होगा।छह विशेषज्ञों की नियुक्ति के साथ विश्वविद्यालय ने शिक्षा को रोजगार और वास्तविक कार्यक्षेत्र की जरूरतों से जोड़ने की दिशा में नई शुरुआत की है।