Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस की विशेष जांच टीम ने अपनी गहन पड़ताल पूरी करते हुए अदालत में चार्जश…
Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस की विशेष जांच टीम ने अपनी गहन पड़ताल पूरी करते हुए अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है. पुलिस की इस विस्तृत जांच रिपोर्ट में घटना के उजागर होने से लेकर आरोपियों की गिरफ्तारी और चोरी के तौर-तरीकों से जुड़े कई अहम खुलासे हुए हैं. चार्जशीट में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों को क्लीन चिट देते हुए उन्हें मामले में सरकारी गवाह बनाया गया है
पुलिस चार्जशीट के अनुसार, मंदिर परिसर में चढ़ावे की चोरी का सिलसिला सबसे पहले जून के शुरुआती हफ्ते में पकड़ में आया था. गणना कक्ष में तैनात कर्मचारियों ने कुछ लोगों को नोटों की गड्डियां छिपाते हुए रंगे हाथों पकड़ा. इसके बाद गेट पर चेकिंग सख्त की गई तो आरोपियों ने पकड़े जाने के डर से लाखों रुपये शौचालय में छिपा दिए थे, जिसे बाद में बरामद कर लिया गया. इस घटनाक्रम की जानकारी ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को दिल्ली से लौटते समय दी गई थी और उन्हें इससे संबंधित सीसीटीवी फुटेज भी दिखाए गए थे. जांच एजेंसी ने चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को किसी भी आपराधिक साजिश से बाहर रखते हुए उन्हें इस केस में गवाह के रूप में शामिल किया है
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जांच टीम ने मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज का बारीक विश्लेषण किया, जिसमें आरोपियों की आपराधिक गतिविधियों का पूरा कच्चा चिट्ठा सामने आया है. फुटेज के आधार पर मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला दर्जनों बार सीधी चोरी करते और सहयोगियों की मदद करते कैमरे में कैद हुआ. वहीं अन्य आरोपियों जैसे करुणेश पांडे, अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा और मनीष यादव की भी चोरी और इसमें सहयोग देने की बारंबारता स्पष्ट रूप से साबित हुई है. आरोपियों ने बहुत कम समय की नौकरी के दौरान दर्जनों बार दान के पैसों पर हाथ साफ किया था
इस पूरे घटनाक्रम में एक रिटायर्ड बैंक कर्मचारी सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और संदिग्ध पाई गई है. बैंक से सेवानिवृत्त होने के बाद उसे दानपात्र के पैसों को सुरक्षित रूप से बैंक में जमा कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. चार्जशीट के मुताबिक, अधिक रकम ऐंठने के लालच में अन्य आरोपियों ने उसे अपने साथ मिला लिया था. सुभाष श्रीवास्तव के प्रभाव के कारण ही सुरक्षा गार्ड मुख्य आरोपियों की आवक-जावक के समय तलाशी नहीं लेते थे, जिससे चोरी की घटना को अंजाम देना बेहद आसान हो गया था
एसआईटी ने अपनी विस्तृत जांच में कुल एक सौ तैंतीस लोगों को गवाह बनाया है, जिनमें ट्रस्ट के पदाधिकारियों से लेकर पुलिस अधिकारी और मंदिर सुरक्षा में तैनात कर्मी शामिल हैं. पुलिस ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों के कब्जे से लगभग अस्सी लाख रुपये की नकद राशि बरामद की है. इसके अतिरिक्त सभी आरोपियों के बैंक खातों की जांच करने पर उनमें करीब एक करोड़ रुपये के लेन-देन और जमा राशि की पुष्टि हुई है. आठों मुख्य आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर पुलिस ने अपनी जांच की प्रक्रिया पूरी कर ली है






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