Uttarakhand Electricity:उत्तराखंड में बिजली की बढ़ती जरूरत और पीक डिमांड के समय आपूर्ति को बेहतर बनाए रखने की दिशा में बड़ी तैयारी शुरू हो गई है. उत्तराखंड पाव…
Uttarakhand Electricity:उत्तराखंड में बिजली की बढ़ती जरूरत और पीक डिमांड के समय आपूर्ति को बेहतर बनाए रखने की दिशा में बड़ी तैयारी शुरू हो गई है. उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) राज्य के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद सबस्टेशनों के आसपास बड़े बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम लगाने जा रहा है. इसके बाद जरूरत के हिसाब से बिजली को स्टोर करके बाद में इस्तेमाल किया जा सकेगा. आसान भाषा में कहें तो राज्य में कई जगहों पर बिजली के ‘पावर बैंक’ तैयार किए जाएंगे
इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जब ग्रिड में बिजली की उपलब्धता ज्यादा होगी या मांग कम होगी, तब अतिरिक्त बिजली से इन बैटरियों को चार्ज किया जा सकेगा. वहीं, जब शाम के समय या किसी अन्य वक्त बिजली की मांग अचानक बढ़ेगी, तब स्टोर की गई बिजली को वापस ग्रिड में भेजकर आपूर्ति को बनाए रखने में मदद मिलेगी. इससे पीक डिमांड के दौरान ग्रिड पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है
यूपीसीएल ने राज्य के अलग-अलग सबस्टेशनों पर कुल 100 मेगावाट क्षमता और 250 मेगावाट-घंटे स्टोरेज क्षमता वाले स्टैंडअलोन बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम लगाने की प्रक्रिया शुरू की है. इस पूरी परियोजना को तीन क्लस्टरों में बांटा गया है. तीनों क्लस्टरों की अनुमानित लागत करीब 502 करोड़ रुपये है
परियोजना के तहत क्लस्टर-ए में 36 मेगावाट/90 मेगावाट-घंटे, क्लस्टर-बी में 23 मेगावाट/57.5 मेगावाट-घंटे और क्लस्टर-सी में 41 मेगावाट/102.5 मेगावाट-घंटे क्षमता का स्टोरेज सिस्टम लगाया जाएगा. 100 मेगावाट की क्षमता पर यह बैटरी सिस्टम करीब 2.5 घंटे तक बिजली उपलब्ध कराने में सक्षम होगा
उत्तराखंड में बिजली की मांग पूरे दिन एक जैसी नहीं रहती. अलग-अलग समय पर खपत बढ़ती और घटती रहती है. खासतौर पर शाम के समय बिजली की मांग बढ़ने पर ग्रिड पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है. ऐसी स्थिति में अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था के लिए दूसरे स्रोतों से बिजली खरीदनी पड़ती है
बैटरी स्टोरेज सिस्टम इस चुनौती से निपटने में मददगार हो सकता है. कम मांग के समय स्टोर की गई बिजली को जरूरत बढ़ने पर इस्तेमाल किया जा सकेगा. इससे यूपीसीएल को बिजली की उपलब्धता और मांग के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलेगी
बिजली स्टोरेज की यह व्यवस्था राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में विकसित की जाएगी. क्लस्टर-ए में रुद्रपुर, काशीपुर, हल्द्वानी और पिथौरागढ़ को शामिल किया गया है. क्लस्टर-बी में देहरादून के ग्रामीण और शहरी क्षेत्र होंगे, जबकि क्लस्टर-सी में उत्तरकाशी, हरिद्वार, रुड़की और टिहरी शामिल हैं. इस तरह परियोजना को राज्य के मैदानी और पहाड़ी दोनों क्षेत्रों में फैलाया जाएगा. इससे अलग-अलग इलाकों की बिजली जरूरत के अनुसार स्टोरेज का इस्तेमाल किया जा सकेगा. इससे पीक डिमांड के समय उपभोक्ताओं को लगातार बिजली उपलब्ध कराने की क्षमता मजबूत हो सकती है
यूपीसीएल इन बैटरी सिस्टम को अपने खर्च पर सीधे स्थापित नहीं करेगा. परियोजना को पीपीपी यानी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर लागू किया जाएगा. इसके तहत यूपीसीएल अपने 33/11 केवी सबस्टेशनों के आसपास उपलब्ध जमीन को संबंधित कंपनी को इस्तेमाल के लिए देगा. बैटरी और स्टोरेज सिस्टम लगाने की जिम्मेदारी निजी कंपनी की होगी
इस मॉडल से राज्य में बड़े पैमाने पर बिजली स्टोरेज क्षमता विकसित करने का रास्ता तैयार होगा. आने वाले समय में जब बिजली की मांग तेजी से बढ़ेगी, तब ऐसी स्टोरेज व्यवस्था ग्रिड को अतिरिक्त सहारा दे सकती है. साथ ही, उपलब्ध बिजली का बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने में भी मदद मिल सकती है





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