Download APKAPK
होम समाचार देश राजनीति अपराध खेल धर्म मनोरंजन व्यापार टेक लाइफस्टाइल विदेश लखनऊ

आकाश आनंद को पार्टी से 'मुक्त' करने के पीछे क्या है वजह? मायावती के फैसलों पर विश्लेषकों ने उठाए सवाल -

🕐 14 Sep 2026, 04:01 pm• 4 min padho • Chugal Khor News
आकाश आनंद को पार्टी से 'मुक्त' करने के पीछे क्या है वजह? मायावती के फैसलों पर विश्लेषकों ने उठाए सवाल -

बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से ‘मुक्त’ कर दिया है। इस फैसले के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व और भविष्य की रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आकाश आनंद को पार्टी से बाहर करने के पीछे सिर्फ अशोक सिद्धार्थ का विवाद ही वजह नहीं है, बल्कि मायावती के फैसलों में भरोसे की कमी भी एक अहम कारण हो सकती है। बीएसपी के पूर्व वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन सिद्दीक़ी ने दावा किया कि उन्होंने 2015 में ही मायावती से अशोक सिद्धार्थ को लेकर चिंता जताई थी। उनके मुताबिक, अशोक सिद्धार्थ पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे थे और संगठन में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे। मायावती ने फरवरी 2025 में भी अशोक सिद्धार्थ के खिलाफ कार्रवाई की थी। उन पर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट बंटवारे को लेकर राज्य संगठन के साथ उचित तालमेल नहीं रखने और पार्टी के निर्देशों का उल्लंघन करने का आरोप लगा था। हालांकि, बाद में माफी के बाद उन्हें पार्टी में दोबारा शामिल कर लिया गया था।

मायावती की राजनीति को लंबे समय से कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि उनके हालिया फैसलों के पीछे भरोसे की कमी एक बड़ी वजह हो सकती है। वरिष्ठ पत्रकार विजय शंकर पंकज के मुताबिक, कांशीराम के दौर के कई प्रभावशाली नेताओं को मायावती ने धीरे-धीरे किनारे किया। उनका कहना है कि मायावती की कार्यशैली बेहद केंद्रीकृत रही है और वह महत्वपूर्ण फैसलों की बागडोर अपने हाथ में रखना चाहती हैं। वरिष्ठ पत्रकार आनंद राय भी मानते हैं कि बीएसपी में लंबे समय तक किसी एक नेता की मायावती के साथ नहीं चली। आरके चौधरी, बाबू सिंह कुशवाहा और नसीमुद्दीन सिद्दीक़ी जैसे नेताओं का उदाहरण देते हुए वह कहते हैं कि जो नेता मायावती के बेहद करीब रहा और जिसका प्रभाव बढ़ा, वह बाद में पार्टी से बाहर होता गया।

आकाश आनंद की बढ़ती लोकप्रियता भी बनी वजह?

वरिष्ठ पत्रकार सुनीता अरांव के मुताबिक, आकाश आनंद के मामले में भरोसे की कमी के साथ-साथ असुरक्षा का भाव भी एक संभावित कारण हो सकता है।उनका कहना है कि आकाश आनंद की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही थी और वह युवाओं के बीच अपनी राजनीतिक जगह बनाने की कोशिश कर रहे थे। ऐसे में उनकी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान का बढ़ना मायावती के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता था। हालांकि, वरिष्ठ पत्रकार विजय शंकर पंकज इस बात को केवल एक संभावना मानते हैं। उनके मुताबिक, इसका कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है कि आकाश की लोकप्रियता मायावती के फैसले की वजह बनी।

परिवारवाद को लेकर मायावती का रुख

मायावती ने अपने परिवार के सदस्यों को पार्टी की राजनीति से दूर रखने के पीछे परिवारवाद के आरोपों से बचने की बात कही है। उन्होंने अपने भाई आनंद कुमार और भतीजों को लेकर भी इसी तरह के फैसले लिए हैं। साल 2017 में मायावती ने अपने छोटे भाई आनंद कुमार को बीएसपी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया था। करीब एक साल बाद परिवारवाद के आरोपों से बचने के लिए उन्हें पद से हटा दिया गया। हालांकि, जून 2019 में आनंद कुमार को दोबारा पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया। इसी दौरान आकाश आनंद को भी पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई थी। अब आकाश आनंद को पार्टी से ‘मुक्त’ किए जाने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

क्या आकाश आनंद की बीएसपी में वापसी होगी?

नसीमुद्दीन सिद्दीक़ी का मानना है कि मायावती भले ही फिलहाल आकाश आनंद के लिए पार्टी के दरवाजे बंद होने की बात कह रही हों, लेकिन भविष्य में स्थिति बदल सकती है। उनका कहना है कि मायावती ने पहले भी कई नेताओं को पार्टी से बाहर करने के बाद वापस लिया है। वहीं, वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि आकाश आनंद के लिए किसी दूसरी पार्टी में जाना भी आसान नहीं होगा, क्योंकि कोई भी राजनीतिक दल मायावती को नाराज करने का जोखिम नहीं लेना चाहेगा।

विधानसभा चुनाव से पहले संगठन के सामने चुनौती

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बीएसपी के लिए संगठन को एकजुट करना सबसे बड़ी चुनौती है। अगर पार्टी नेतृत्व जल्द ही अंदरूनी विवादों से आगे बढ़कर चुनावी रणनीति और संगठन को मजबूत करने पर ध्यान नहीं देता है, तो इसका असर चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है।

दीपिका आनंद के राजनीतिक भविष्य पर भी नजर

आकाश आनंद और ईशान के राजनीतिक रास्ते को बंद करने के बाद मायावती ने अपनी भतीजी दीपिका आनंद के लिए भविष्य में पार्टी की जिम्मेदारी संभालने की संभावना का दरवाजा खुला रखा है। हालांकि, वरिष्ठ पत्रकार सुनीता अरांव के मुताबिक दीपिका के बारे में सार्वजनिक रूप से बहुत सीमित जानकारी उपलब्ध है। वह अब तक पार्टी के कार्यक्रमों में राजनीतिक रूप से सक्रिय नजर नहीं आई हैं। ऐसे में उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अभी कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। मायावती ने दीपिका को जरूरत पड़ने पर जिम्मेदारी देने की बात कही है, लेकिन उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया है। ऐसे में बीएसपी के अगले उत्तराधिकारी को लेकर सवाल अभी भी बना हुआ है। मायावती ने अपनी आत्मकथा में पहले ही स्पष्ट किया था कि जब वह अपने उत्तराधिकारी की घोषणा करेंगी तो वह उनके परिवार से नहीं होगा। उन्होंने कहा था कि उनका उत्तराधिकारी अनुसूचित जाति के सबसे पीड़ित समाज से और उनसे करीब 30-35 साल छोटा व्यक्ति होगा, ताकि वह लंबे समय तक बहुजन आंदोलन को आगे बढ़ा सके।

स्रोत: Filmitics

शेयर करें X / Twitter ← होम

और खबरें