Mahalaxmi Vrat 2026: आज यानी 23 सितंबर 2026 को महालक्ष्मी व्रत का पांचवा दिन है. बता दें कि हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से महालक्ष्मी व्रत का प्…
Mahalaxmi Vrat 2026: आज यानी 23 सितंबर 2026 को महालक्ष्मी व्रत का पांचवा दिन है. बता दें कि हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से महालक्ष्मी व्रत का प्रांरभ होता है. इसके बाद 16 दिनों तक ये कठिन व्रत रखे जाते हैं. इस व्रत के दौरान अन्न का सेवन नहीं किया जाता है. इस वर्ष 19 सितंबर 2026 से महालक्ष्मी व्रत शुरू हुए थे. वहीं, इन व्रतों का समापन 3 अक्टूबर 2026 को होगा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत यदि पूर्ण श्रद्धा और नियम के साथ किया जाए तो साधक के जीवन में सुख-समृद्धि आती है और उन्हें मां लक्ष्मी की कृपा मिलती है. महालक्ष्मी व्रत में 16 अंक का विशेष महत्व बताया जाता है. इस दौरान पूजा से लेकर व्रत की अवधि तक कई चीजों में इसी संख्या का प्रयोग किया जाता है. ऐसे में चलिए जानते हैं कि आखिर क्या है 16 अंक से महालक्ष्मी का संबंध
सनातन धर्म में देवी लक्ष्मी को 16 कलाओं की देवी कहा जाता है. इस वजह से महालक्ष्मी व्रत के 16 दिन होते हैं. धार्मिक मान्यता है कि 16 कलाएं जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य लेकर आती है. ये 16 कलाएं अलग-अलग पक्षों का प्रतिनिधित्व करती हैं. इसलिए, महालक्ष्मी व्रत के दौरान लक्ष्मी पूजन में, उनकी रीति-रिवाजों में 16 की गिनती का खास महत्व होता है
इन व्रतों में लगातार 16 दिनों तक उपवास रखा जाता है. इस दौरान भक्त मां लक्ष्मी की नियमित पूजा-पाठ करते हैं और व्रत के नियमों का पालन करते हैं. इस दौरान पूर्ण निष्ठा से पूजा करने से साधक को मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और घर में सकारात्मकता आती है
महालक्ष्मी व्रत में माता लक्ष्मी के विभिन्न स्वरूपों की आराधना का भी खास महत्व होता है. इन्हें 16 रूपों को समृद्धि और जीवन की अलग-अलग आवश्यकताओं से जोड़कर देखा जाता है. मां लक्ष्मी के इन रूपों की पूजा करने का उद्देश्य सिर्फ धन प्राप्त करना नहीं होता बल्कि जीवन में सुख, शांति, सौभाग्य और वैभव की कामना करना भी माना जाता है
महालक्ष्मी व्रत में पूजा की 16 अंक की संख्या का भी खास रूप से प्रयोग हो रहा है. जैसे कि माता लक्ष्मी को इस दौरान होने वाली पूजा में 16 प्रकार के नैवेद्य, 16 श्रृंगार की सामग्री तथा 16-16 की संख्या में फूल और फल अर्पित किए जाते हैं. ऐसी मान्यता है कि इस पूजा के दौरान 16 गांठ वाला लाल धागा भी माता रानी को अर्पित किया जाता है. वहीं, इन व्रतों में 16 गांठों का डोरा स्त्री व पुरुष यानी व्रत पालन करने वाला भक्त भी कलाई पर बांधता है. जब व्रत का उद्यापन किया जाता है, तो उस दिन इस डोरे को विसर्जित कर देते हैं
महालक्ष्मी व्रत के दौरान पूजा में संख्या 16 का विशेष ध्यान रखा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि माता लक्ष्मी को 16 प्रकार की पूजन सामग्री अर्पित करने से साधक की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है. इस दौरान भक्त माता लक्ष्मी को फूल, फल, मिठाई, धूप-दीप और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं. कई स्थानों पर 16 दीपक जलाने और 16 बार माता लक्ष्मी के मंत्र का जाप करने की भी परंपरा बताई जाती है
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)






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