Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन सोमवार 28 सितंबर की सुबह खराब रहा. कच्चे तेल की लगातार ऊंची कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने निवे…
Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन सोमवार 28 सितंबर की सुबह खराब रहा. कच्चे तेल की लगातार ऊंची कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण, दोनों बेंचमार्क इंडेक्स 1% से ज्यादा गिर गए. जहां सेंसेक्स 1,000 अंक से ज्यादा टूटा, वहीं NIFTY50 भी 22,850 के स्तर से नीचे आ गया
दोपहर करीब 13:14 बजे, NIFTY50 316 अंक या 1.37% की गिरावट के साथ 22,824.35 पर कारोबार कर रहा था. वहीं, BSE Sensex 1,008 अंक (1.36%) गिरकर 72,887.40 पर आ गया. इस बिकवाली से BSE-लिस्टेड कंपनियों के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन से लगभग ₹6 लाख करोड़ कम हो गए, जिससे यह आंकड़ा घटकर करीब ₹476 लाख करोड़ रह गया. आज सेंसेक्स में शामिल सभी 30 शेयर गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे. सबसे ज्यादा गिरावट बजाज फाइनेंसस, कोटक महिंद्रा बैंक और HDFC बैंक में देखी गई. यह कमजोरी केवल लार्ज कैप शेयरों तक ही सीमित नहीं थी. निफ्टी स्मॉलकैप 100 और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स भी 1% से ज्यादा गिरे
भारतीय बाजार पर कई एशियाई बाजारों की कमजोरी का भी असर पड़ा, जहां तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण शेयरों पर दबाव बना रहा. दक्षिण कोरिया का कोस्पी 2% से ज्यादा गिरा, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट 1.7% से ज्यादा टूटा. हालांकि, जापान का निक्केई मामूली बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव तब बढ़ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया जिसमें 7 दिन की युद्धविराम और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की बात कही गई थी. शनिवार 26 सिंतबर को पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, "मैं इस डील को नहीं मानता. वे चाहते हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) तुरंत खोल दिया जाए क्योंकि वे बुरी तरह नाकाम हो रहे हैं." वहीं, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा कि उनका देश अपनी बात पर अडिग रहेगा और अमेरिका या इजराइल के सामने नहीं झुकेगा
मिडिल ईस्ट में हाल की घटनाओं के कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में फिर से तेजी आई है. शिपमेंट में और रुकावट की आशंकाओं के चलते तेल की कीमतें 2% बढ़कर $107 प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं हैं. जेपी मॉर्गन ने कहा है कि वह अब तेल की कीमतों की चाल का साफ अनुमान नहीं लगा सकता. फरवरी में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद यह पहली बार है जब ब्रोकरेज के पास बाजार के लिए कोई पक्का आधार नहीं है
US बॉन्ड यील्ड कई सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जिससे शेयर बाजार पर और दबाव बढ़ गया. बेंचमार्क US 10-ईयर ट्रेजरी नोट की यील्ड 5.2% के ऊपर चली गई, जो 2004 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है. 30-ईयर बॉन्ड यील्ड भी 5.5% के पार निकल गई, जबकि 2-ईयर ट्रेजरी नोट्स की यील्ड 4.9% के ऊपर पहुंच गई, जो आमतौर पर फेड रेट हाइक की उम्मीदों के साथ चलती है.बॉन्ड यील्ड बढ़ने से डेट मार्केट निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक हो जाता है, जिससे इक्विटी जैसे रिस्क भरे एसेट्स पर दबाव बढ़ता है
शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया 14 पैसे कमजोर होकर डॉलर के मुकाबले 95.89 पर आ गया. विदेशी मुद्रा कारोबारियों को अब डर है कि रुपया 96 के अहम साइकोलॉजिकल लेवल को तोड़ सकता है. तेल की ऊंची कीमतों, US ट्रेजरी यील्ड में उछाल और मजबूत डॉलर के कारण मुद्रा पर दबाव बना हुआ है. कच्चे तेल और सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के साथ-साथ डॉलर की मजबूती ने भी रुपये की रिकवरी को सीमित कर दिया है. LKP सिक्योरिटीज के VP रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी) जतिन त्रिवेदी के अनुसार, ग्लोबल कमोडिटी और डॉलर में उतार-चढ़ाव के बीच रुपये के एक दायरे में खासकर 95.50 और 96.50 के बीच कारोबार करने की संभावना है
NSE के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने शुक्रवार 25 सितंबर को भी भारतीय शेयरों की बिकवाली जारी रखी और कुल ₹3,694 करोड़ के शेयर बेचे. जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार ने बताया कि जुलाई और अगस्त में पॉजिटिव इनफ्लो के बाद FPI फ्लो का नेगेटिव दायरे में जाना इस महीने की शुरुआत में ही साफ हो गया था. बिकवाली का यह ट्रेंड जारी है और इस महीने अब तक एक्सचेंजों के जरिए कुल इक्विटी आउटफ्लो ₹25,682 करोड़ तक पहुंच गया है
Desclaimer: यह जानकारी अलग-अलग एनालिस्ट और ब्रोकरेज फर्मों की राय पर आधारित है. इसे निवेश की सलाह न माना जाए. शेयर बाजार में निवेश जोखिम भरा होता है, इसलिए निवेश करने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें





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