कुछ गाने वक्त के साथ पुराने नहीं होते, बल्कि हर गुजरते साल के साथ उनकी भावनाएं और गहरी हो जाती हैं। कभी किसी अधूरी मोहब्बत की याद, कभी किसी बिछड़े रिश्ते का दर…

कुछ गाने वक्त के साथ पुराने नहीं होते, बल्कि हर गुजरते साल के साथ उनकी भावनाएं और गहरी हो जाती हैं। कभी किसी अधूरी मोहब्बत की याद, कभी किसी बिछड़े रिश्ते का दर्द और कभी आंखों में ठहर गए आंसू—बॉलीवुड के कुछ गीत सीधे दिल से जुड़ जाते हैं। ऐसा ही एक गाना है ‘तुझे याद ना मेरी आई’, जिसे आज भी टूटे दिल वाले आशिकों का पसंदीदा गीत माना जाता है। इस गाने ने दोस्ती, प्यार और जुदाई के एहसास को जिस तरह पर्दे पर उतारा, उसने लाखों लोगों को भावुक कर दिया। दिलचस्प बात यह है कि जिस गाने ने ‘कुछ कुछ होता है’ में लोगों के दिलों को छुआ, उसकी शुरुआती कहानी शाहरुख खान की ही फिल्म ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ से जुड़ी है।

करण जौहर के निर्देशन में बनी ‘कुछ कुछ होता है’ 16 अक्टूबर 1998 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। यह करण जौहर की बतौर निर्देशक पहली फिल्म थी। फिल्म में शाहरुख खान ने राहुल, काजोल ने अंजलि और रानी मुखर्जी ने टीना का किरदार निभाया था। दोस्ती, एकतरफा प्यार और किस्मत के साथ दोबारा मिलने की कहानी ने दर्शकों को खूब प्रभावित किया।

करीब 10 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने दुनियाभर में लगभग 106 करोड़ रुपये का कारोबार किया और बड़ी व्यावसायिक सफलता हासिल की। यश जौहर की धर्मा प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी इस फिल्म की कहानी और संगीत आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय हैं।

इस गाने की सबसे दिलचस्प बात इसकी शुरुआती धुन है। बहुत कम लोग जानते हैं कि ‘तुझे याद ना मेरी आई’ का मूल रूप पंजाबी बोलों में तैयार किया गया था। संगीतकार जतिन-ललित की जोड़ी के ललित पंडित ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी बहन और गायिका सुलक्षणा पंडित यह गीत पंजाबी में गाया करती थीं।

इसके मूल बोल थे, ‘तैनू याद ना साडी आई, तैनू खत की लिखना…’। इस धुन में बिछड़ने की पीड़ा और किसी अपने की याद में तड़पने का एहसास पहले से मौजूद था। बताया जाता है कि जब गीतकार आनंद बख्शी ने इसका पंजाबी रूप सुना, तो वह भावुक होकर रो पड़े थे। इसी भावनात्मक ताकत ने आगे चलकर इस गाने को खास पहचान दिलाई।

इस गीत का शुरुआती रूप शाहरुख खान की सुपरहिट फिल्म ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ के लिए रिकॉर्ड किया गया था। ललित पंडित के एक इंटरव्यू के मुताबिक, उस समय फिल्म की कहानी में ऐसा उपयुक्त मौका नहीं बन पाया, जहां इस गाने को इस्तेमाल किया जा सके। लिहाजा, यह गीत DDLJ का हिस्सा नहीं बन सका।

बाद में करण जौहर अपनी पहली फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ बना रहे थे। कहानी के एक भावुक हिस्से के लिए उन्हें ऐसे गीत की जरूरत थी, जो बिछड़ने का दर्द बयां कर सके।

इसी दौरान पामेला चोपड़ा ने करण जौहर को जतिन-ललित की उस पंजाबी धुन को सुनने की सलाह दी। करण को धुन पसंद आई और इसे फिल्म की परिस्थिति के मुताबिक नए शब्दों के साथ तैयार किया गया। गीतकार आनंद बख्शी ने इसे हिंदी में ढाला और यह गाना फिल्म की भावनात्मक कहानी का अहम हिस्सा बन गया।

गाने की शुरुआत लोकगीत गायिका मनप्रीत अख्तर की दर्दभरी आवाज और शेर ‘हो मेरे रब्बा इश्क किसी को ऐसे ना तड़पाए…’ से होती है। आगे अलका याग्निक की आवाज इस गीत के दर्द को और गहरा कर देती है।

आज भी ‘तुझे याद ना मेरी आई’ सुनते ही 90 के दशक की मोहब्बत, दोस्ती और जुदाई की यादें ताजा हो जाती हैं। शायद यही वजह है कि 28 साल बाद भी यह गाना लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाए हुए है।