सुल्तानपुर सदर विधानसभा सीट… सीट नंबर 189, 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह सीट इसलिए चर्चा में है क्योंकि पिछले तीन चुनावों में यहां दो अलग-अलग राजनीतिक तस्व…
सुल्तानपुर सदर विधानसभा सीट… सीट नंबर 189, 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह सीट इसलिए चर्चा में है क्योंकि पिछले तीन चुनावों में यहां दो अलग-अलग राजनीतिक तस्वीरें देखने को मिली हैं। 2012 में समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की, जबकि 2017 और 2022 में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों ने लगातार जीत हासिल की। अब 2027 में मुकाबले का गणित किन मुद्दों, उम्मीदवारों और वोटों के बंटवारे से प्रभावित होगा, इस पर नजर है।सुल्तानपुर सदर सीट 2008 के परिसीमन के बाद मौजूदा स्वरूप में आई और इसका विधानसभा क्रमांक 189 है। 2012 में सपा के अरुण कुमार ने 71,939 वोट हासिल कर बसपा के राज प्रसाद को 20,907 वोटों से हराया था। उस चुनाव में भाजपा के अर्जुन सिंह को 24,389 वोट मिले थे।
2017 के विधानसभा चुनाव में सियासी समीकरण बदल गया। भाजपा के सीताराम वर्मा को 68,950 वोट मिले और उन्होंने बसपा के राज प्रसाद उपाध्याय को 18,773 वोटों से हराया। सपा के उम्मीदवार अरुण वर्मा इस चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे।इसके बाद 2022 में भाजपा ने एक बार फिर यह सीट अपने पास रखी। भाजपा के राज प्रसाद उपाध्याय को 85,249 वोट मिले, जबकि सपा के अरुण वर्मा को 69,495 वोट मिले। दोनों के बीच जीत का अंतर 15,754 वोट रहा। बसपा के ओम प्रकाश सिंह को 39,920 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे।यानी 2017 और 2022 में भाजपा की जीत के बावजूद दोनों चुनावों में मुकाबले का स्वरूप अलग रहा। 2022 में सपा दूसरे स्थान पर रही और बसपा को भी करीब 20 प्रतिशत वोट मिले।
अब नजर 2024 लोकसभा चुनाव के विधानसभा-वार आंकड़ों पर डालें तो तस्वीर कुछ अलग दिखाई देती है। सुल्तानपुर लोकसभा सीट के सदर विधानसभा क्षेत्र में सपा के रामभुआल निषाद को 75,984 वोट मिले, जबकि भाजपा की मेनका गांधी को 74,838 वोट मिले। यानी दोनों के बीच अंतर सिर्फ 1,146 वोट का रहा। बसपा के उदराज वर्मा को 39,108 वोट मिले।यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इसी सीट पर सपा को 15,754 वोटों से पीछे छोड़ा था। लोकसभा और विधानसभा चुनावों में एक ही क्षेत्र का वोटिंग पैटर्न अलग हो सकता है और सदर में पिछले दो चुनावों के आंकड़े इसका उदाहरण देते हैं।
2027 की लड़ाई को समझने के लिए उम्मीदवार, स्थानीय मुद्दे, संगठन, सामाजिक समीकरण और वोटों का बंटवारा महत्वपूर्ण फैक्टर हो सकते हैं। सुल्तानपुर सदर में अलग-अलग सामाजिक समूहों का चुनावी प्रभाव भी राजनीतिक दलों की रणनीति का हिस्सा रहेगा।सबसे बड़ा सवाल यह है कि भाजपा 2017 और 2022 में मिले अपने समर्थन को किस तरह बनाए रखती है। दूसरी ओर, सपा 2024 के लोकसभा चुनाव में सदर विधानसभा क्षेत्र में मिली मामूली बढ़त को विधानसभा चुनाव में किस तरह के वोट गठजोड़ में बदलने की कोशिश करती है, यह भी देखने वाला पहलू होगा।बसपा का वोट शेयर भी इस सीट के समीकरण में एक अलग फैक्टर है। 2022 में उसे करीब 39,920 वोट मिले थे और 2024 लोकसभा चुनाव में भी उसके उम्मीदवार को 39,108 वोट मिले।
सुल्तानपुर सदर की चुनावी कहानी में एक तरफ 2017 और 2022 की भाजपा जीत है, तो दूसरी तरफ 2024 लोकसभा चुनाव में सदर क्षेत्र से सपा की 1,146 वोटों की बढ़त। इसलिए 2027 के चुनाव में पिछले नतीजे अकेले पूरी तस्वीर नहीं बताते।अंततः मुकाबले पर उम्मीदवारों की घोषणा, स्थानीय मुद्दे, दलों की रणनीति और अलग-अलग सामाजिक समूहों का मतदान पैटर्न असर डाल सकता है। 2027 में इन फैक्टर का असर किस रूप में दिखाई देता है, यह चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ ज्यादा स्पष्ट होगा।
रश्मि सिंह एक अनुभवी पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें हिंदी पत्रकारिता, न्यूज़ रिपोर्टिंग और डिजिटल मीडिया का व्यापक अनुभव है। उन्होंने मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है और अपने पत्रकारिता करियर में कई बड़े मीडिया संस्थानों और न्यूज़ चैनलों के साथ काम किया है।राजनीति, जनसरोकार, उत्तर प्रदेश की सियासत और समसामयिक मुद्दों पर उनकी विशेष पकड़ है। खबरों को सरल, तथ्यपरक और पाठकों के लिए रोचक अंदाज में प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है। डिजिटल पत्रकारिता के बदलते दौर में रश्मि सिंह का प्रयास है कि पाठकों तक तेज, विश्वसनीय और आसान भाषा में तथ्य आधारित खबरें पहुंचें।
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