सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ मनाया गया लक्ष्मण दीपोत्सव

सात विशिष्ट हस्तियों का सम्मान; नाट्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया
लखनऊ, नवंबर 2026: लक्ष्मणपुरी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी रामानुज लक्ष्मण दीपोत्सव की 61 साल पुरानी परंपरा के तहत शनिवार को लक्ष्मण उद्यान में एक सांस्कृतिक संध्या और सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
शिव सिंह सरोज मेमोरियल कमेटी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्य, लोक कला और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को एक साथ लाते हुए भगवान लक्ष्मण और भगवान हनुमान को श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर हरिशंकर मिश्र ने की. विशिष्ट अतिथि के रूप में विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान, भाषा संस्थान के निदेशक सर्वेश कुमार सिंह एवं उद्योग निदेशालय उत्तर प्रदेश के पूर्व सहायक निदेशक सूर्यभानु सिंह गौतम शामिल हुए.
कार्यक्रम का आयोजन संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश एवं लखनऊ विकास प्राधिकरण के सहयोग से शिव सिंह सरोज स्मारक समिति एवं कृष्ण प्रताप विद्याविन्दु लोकहित ट्रस्ट द्वारा किया गया। सात प्रतिष्ठित हस्तियों को मां उर्मीला लक्ष्मण पुरस्कार प्रदान किए गए
श्रीमती अर्चना सतीश एवं सतीश ग्रोवर को मिला माँ उर्मिला लक्ष्मण आदर्श युगल पुरस्कार; राजेश सिंह को लक्ष्मण विरासत संरक्षण पुरस्कार से सम्मानित किया गया; प्रोफेसर भारती सिंह को मिला मां उर्मिला साहित्य रत्न; डॉ करुणा पांडे को लोक कला रत्न प्रदान किया गया; डॉ. रश्मी शील को मिला अवधी रत्न; नीरा मिश्रा को लोक गायन पुरस्कार से सम्मानित किया गया; और डॉ. अनुराधा पांडे 'अन्वी' को काव्य रत्न पुरस्कार मिला
सांस्कृतिक संध्या में गणेश वंदना, शंख बजाना, रामायण पर आधारित भावपूर्ण नृत्य, लोक गीत और काव्यात्मक श्रद्धांजलि की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्वस्ति सिंह ने गणेश वंदना प्रस्तुत की, जबकि युवराज सिंह व ज्योति सिंह ने शंख पाठ किया. सुहानी सिंह, शमिला प्रजापति, आद्या श्रीवास्तव, आद्या, आस्था सिंह, आस्था यादव और नमस्वी ने भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुतियों में भाग लिया। डॉ. रचना श्रीवास्तव ने शिव सिंह सरोज द्वारा लिखित महाकाव्य लक्ष्मण महाकाव्य के एक अंश का पाठ किया
डॉ. विद्या बिंदु सिंह की रचनाओं पर आधारित नाटकीय प्रस्तुतियाँ - लछिमन देवरा विपतिया का नायक (सीता गाथा) और अन्य नहीं होने दूंगी - इस कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में से एक थीं। पहले नाटक का निर्देशन अनुपमा शरद ने किया था, जबकि दूसरे का निर्देशन डॉ. विद्या बिंदु सिंह, किरण यादव और आयुषी गुप्ता ने किया था।
नाटकों में चैतन्य श्रीवास्तव, मानस वाजपेई, जय कौन्तेय, अच्युत वाजपेई, सोनल शर्मा, हर्षिता आर्य, ऋषिता प्रजापति, सचिन मौर्य, नंदिनी रावत, माही मौर्य, जया रावत, आकाश, विवेक और रवि ने अभिनय किया।
लोक-गायन खंड का निर्देशन प्रोफेसर संगीता शुक्ला द्वारा किया गया, जिसमें डॉ. अपूर्वा अवस्थी, डॉ. अनुराधा पांडे, गीतिका, कल्पना उप्रेती, स्मिता तिवारी और पूनम त्रिपाठी की भागीदारी रही। ललित चंद्र भट्ट ने हारमोनियम पर गायकों के साथ संगत की, जबकि अनिल गोदिया ने ढोलक बजाया
स्रोत: Maverick News30
