उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी के तीन बागी विधायकों के भाजपा में शामिल होने के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। अमेठी के गौरीगंज में बुधवार को आय…

उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी के तीन बागी विधायकों के भाजपा में शामिल होने के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। अमेठी के गौरीगंज में बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में सपा से निष्कासित तीन विधायकों अभय सिंह, राकेश प्रताप सिंह और विनोद चतुर्वेदी ने भाजपा का दामन थाम लिया। इस दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी भी मौजूद रहीं। भाजपा में शामिल होने के बाद तीनों नेताओं ने मंच से समाजवादी पार्टी पर जमकर निशाना साधा। वहीं, अब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इन नेताओं पर पलटवार किया है। अखिलेश ने सोशल मीडिया पर बिना किसी का नाम लिए तीखा तंज कसते हुए दल बदलने वाले नेताओं की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर सवाल खड़े किए हैं।

अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट करते हुए लिखा है कि “अपने क़बीले से जो दगा करता है बंदा चलता उसके मान पर अपमान का रंदा कार्यकर्ता बनकर उठाना पड़ता है झंडा दूसरे इस्तेमाल कर लेते हैं उसका कंधा सिर झुकाकर करना पड़ता काला धंधा चुराना पड़ता उसको दान-चढ़ावा-चंदा अब तक जो कमाया वो नाम होता गंदा”अखिलेश यादव यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे लिखा कि वर्षों की प्रतीक्षा के बाद भी सदस्यता की पर्ची से अधिक कुछ नहीं मिला। जिस दल में गए हैं, उसके पुराने दावेदार कह रहे हैं कि ऐसे लोग तो आते-जाते रहते हैं। जिस दल से चुनाव जीते, जब उसी के नहीं हुए तो जिस पार्टी की सदस्यता लेने में वर्षों लग गए, वहां प्रत्याशी नहीं बल्कि प्रतीक्षार्थी बनकर ही कई साल गुजारने पड़ेंगे।

दरअसल, पूरा मामला वर्ष 2024 में हुए राज्यसभा चुनाव से जुड़ा है। उस दौरान समाजवादी पार्टी के कई विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर क्रॉस वोटिंग की थी। इसे सपा नेतृत्व के खिलाफ बड़ी बगावत माना गया था। बाद में पार्टी ने बागी विधायकों के खिलाफ निष्कासन की कार्रवाई की थी। इन्हीं नेताओं में अभय सिंह, राकेश प्रताप सिंह और विनोद चतुर्वेदी के नाम भी शामिल थे। अब तीनों नेताओं के भाजपा में शामिल होने से उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। एक तरफ भाजपा इसे अपने कुनबे का विस्तार मान रही है, तो दूसरी तरफ अखिलेश यादव ने अपने तीखे शब्दों से दल बदलने वाले नेताओं के राजनीतिक भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं।फिलहाल, अखिलेश यादव की इस पोस्ट के बाद सियासी गलियारों में चर्चा तेज है कि भाजपा में शामिल हुए इन तीनों नेताओं को आने वाले चुनावों में टिकट मिलेगा या फिर उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ेगा।