संभल हिंसा मामले के मुख्य आरोपी मुल्ला अफरोज को सुप्रीम कोर्ट से बहुत बड़ी कानूनी राहत मिली है. शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व आदेश को दरकिनार करते…

संभल हिंसा मामले के मुख्य आरोपी मुल्ला अफरोज को सुप्रीम कोर्ट से बहुत बड़ी कानूनी राहत मिली है. शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व आदेश को दरकिनार करते हुए अफरोज पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) को पूरी तरह से रद्द कर दिया है. इसके साथ ही अदालत ने गैर-कानूनी और मनमाने तरीके से हिरासत में रखने को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार पर दस लाख रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया है. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने अफरोज की याचिका स्वीकार करते हुए राज्य प्रशासन की कानूनी कार्रवाई की शैली पर सख्त सवाल उठाए

नवंबर 2024 में संभल स्थित शाही जामा मस्जिद के अदालती सर्वे के दौरान भड़की हिंसा में पुलिस ने मुल्ला अफरोज को मुख्य साजिशकर्ता बताया था. मूल मामलों में जमानत मिल जाने के बाद सरकार ने शांति व्यवस्था का हवाला देते हुए उन पर एनएसए तामील कर दोबारा हिरासत में ले लिया था. राज्य सरकार ने अपनी दलील में कहा था कि रिहाई के बाद सार्वजनिक सौहार्द बिगड़ने का भारी अंदेशा था, इसलिए निवारक नजरबंदी अपरिहार्य हो गई थी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य से दो-टूक सवाल किया कि पुलिस हिरासत में लिए गए जिस बयान की कानूनी तौर पर कोई साक्ष्य मान्यता नहीं होती, उसे किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता छीनने का आधार कैसे बनाया जा सकता है

इस फैसले के साथ सुप्रीम कोर्ट के इतिहास का एक बेहद दुर्लभ और मर्मस्पर्शी अध्याय भी जुड़ गया. पीठ ने इस फैसले को अपने युवा लॉ क्लर्क रित्विक देसवाल की स्मृति को समर्पित किया, जिनका कुछ ही दिन पहले असामयिक निधन हो गया था. जस्टिस दीपांकर दत्ता ने फैसला सुनाते हुए बेहद भावुक होकर कहा कि आज दिवंगत रित्विक का जन्मदिन भी है. उन्होंने कहा कि नश्वर मानव जीवन कितना क्षणभंगुर है, इसका अहसास हमें आम दिनों में मुश्किल से होता है. जस्टिस दत्ता ने उल्लेख किया कि फैसले की रूपरेखा और कानूनी शोध में रित्विक ने अथक सहयोग दिया था और उनके अंतिम कार्य की छाप इस दस्तावेज में स्पष्ट दिखती है. अदालत ने रित्विक की बौद्धिक ईमानदारी, कानून के प्रति उनकी गहरी निष्ठा और समर्पण को नमन करते हुए यह फैसला उनके नाम किया, जो न्यायिक परिपाटी में अपने शोध सहयोगियों के प्रति सम्मान की एक अनूठी मिसाल बन गया