संकट में ग्रामीण परिवारों का सुरक्षा कवच बनी योगी सरकार की जोखिम निवारण निधि, 36,330 ग्राम संगठनों को मिले 415 करोड़ रुपये से अधिक धनराशि -

Yogi Government Strengthens Rural Financial Security, Releases Over ₹415 Crore to 36,330 Village Organizations.
लखनऊ, 1 नवंबर। ग्रामीण क्षेत्रों में किसी परिवार पर अचानक आर्थिक संकट आने की स्थिति में उसे राहत पहुंचाने के लिए योगी सरकार की ओर से महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित जोखिम निवारण निधि जरूरतमंद ग्रामीण परिवारों के लिए संकट के समय आर्थिक सहारा बन रही है।
सरकार के प्रयासों से अब तक प्रदेश के 36,330 ग्राम संगठनों को इस निधि के रूप में 415 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि उपलब्ध कराई जा चुकी है। इस व्यवस्था का उद्देश्य आकस्मिक परिस्थितियों में प्रभावित परिवारों को स्थानीय स्तर पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि जोखिम निवारण निधि ग्रामीण परिवारों को आपात परिस्थितियों में बड़ी सहूलियत प्रदान करती है। इसके माध्यम से स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों के साथ-साथ पंचायत स्तर पर रहने वाले गैर-समूह सदस्यों को भी जरूरत के समय आर्थिक मदद दी जा सकती है।
जोखिम निवारण निधि का इस्तेमाल खाद्य असुरक्षा, अचानक बीमारी, अस्पताल में भर्ती होने और अन्य स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए किया जाता है। इसके अलावा आगजनी, बाढ़, बिजली गिरने, सूखा और दुर्घटना जैसी परिस्थितियों में प्रभावित परिवारों को भी इस व्यवस्था के तहत सहायता मिल सकती है।
इस योजना में विशेष रूप से एकल महिलाओं, बुजुर्गों, दिव्यांगजनों, प्रवासी व्यक्तियों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को प्राथमिकता दी जाती है। ग्राम संगठनों के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों की पहचान कर उन्हें स्थानीय स्तर पर मदद उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत प्रत्येक ग्राम संगठन को एक बार डेढ़ लाख रुपये की जोखिम निवारण निधि उपलब्ध कराने का प्रावधान है। यह राशि कॉरपस फंड के रूप में ग्राम संगठन के पास रहती है, जिसका उपयोग जरूरत पड़ने पर पात्र परिवारों की सहायता के लिए किया जाता है।
निधि के तहत स्वयं सहायता समूह के किसी सदस्य को 5,000 रुपये तक की सहायता दी जा सकती है। इसके अलावा गैर-समूह सदस्यों को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने के उद्देश्य से भी इस निधि का इस्तेमाल किया जाता है।
विशेष परिस्थितियों में ग्राम संगठन के पदाधिकारियों की सहमति से सहायता राशि अनुदान के रूप में भी दी जा सकती है। इस व्यवस्था से ग्रामीण परिवारों को आपात जरूरतों के समय स्थानीय स्तर पर आर्थिक सहयोग मिलने का माध्यम तैयार हुआ है।
योगी सरकार की इस पहल में महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्राम संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण है। गांवों में गठित ये संगठन जरूरतमंद परिवारों की पहचान करने और संकट के समय उन्हें आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने में मदद कर रहे हैं।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक सहयोग की भावना मजबूत होने के साथ ही परिवारों को अचानक आने वाले आर्थिक संकट से उबरने में सहायता मिल रही है।
ग्रामीण परिवारों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों को संस्थागत ऋण से भी जोड़ा जा रहा है। मिशन की शुरुआत से अब तक पौने दस लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों को कुल 11,378 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत किया जा चुका है।
इससे ग्रामीण महिलाओं को आजीविका के साधन विकसित करने, स्वरोजगार अपनाने और अपनी आर्थिक गतिविधियों का विस्तार करने के अवसर मिल रहे हैं। जोखिम निवारण निधि और संस्थागत ऋण की व्यवस्था के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
स्रोत: Filmitics
