शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में 50 हजार की इनामी श्रद्धा दुबे नौ दिन बाद भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर, लेकिन न्यूज एजेंसी को दिए गए उसके बयान ने खड़े किए…
शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में 50 हजार की इनामी श्रद्धा दुबे नौ दिन बाद भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर, लेकिन न्यूज एजेंसी को दिए गए उसके बयान ने खड़े किए सवाल। बयान सामने आने के बाद पुलिस महकमे में कार्रवाई तेज; DCP सेंट्रल विक्रांत वीर मुख्यालय से अटैच किए गए
लखनऊ। शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब लखनऊ पुलिस की जांच के साथ-साथ उसकी कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर रहा है। मामले में फरार चल रही 50 हजार रुपये की इनामी श्रद्धा दुबे की तलाश में पुलिस टीमें जुटी हैं, वहीं न्यूज एजेंसी को दिए गए उसके बयान के सामने आने से पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं। सवाल यह है कि जिस आरोपी को पुलिस कई दिनों से तलाश रही है, वह मीडिया तक कैसे पहुंच गई?श्रद्धा दुबे का बयान सामने आने के बाद लखनऊ पुलिस महकमे में कार्रवाई का दौर तेज हो गया। पहले हजरतगंज इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को लाइन हाजिर किया गया और इसके बाद DCP सेंट्रल विक्रांत वीर को प्रतीक्षारत करते हुए पुलिस मुख्यालय से अटैच कर दिया गया। लगातार हुई इन कार्रवाइयों ने शिवा शर्मा मामले को और चर्चा में ला दिया है।
श्रद्धा का बयान सामने आते ही पुलिस महकमे में हलचल
शिवा शर्मा की मौत के मामले में श्रद्धा दुबे पहली बार सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखती नजर आई। मीडिया एजेंसी को दिए गए बयान में उसने अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया और दावा किया कि उसे गलत तरीके से फंसाया जा रहा है।श्रद्धा के इस बयान के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल उसकी लोकेशन और पुलिस की तलाश को लेकर उठा। यदि वह पुलिस की पकड़ से बाहर है, तो उसका मीडिया को बयान देना जांच एजेंसियों के लिए चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि बयान रिकॉर्ड किए जाने की परिस्थितियों और उसकी लोकेशन को लेकर स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
पहले हजरतगंज इंस्पेक्टर लाइन हाजिर, फिर DCP सेंट्रल पर कार्रवाई
श्रद्धा दुबे के बयान के बाद पुलिस विभाग में कार्रवाई की कड़ी सामने आई। पहले हजरतगंज कोतवाली के इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को लाइन हाजिर किया गया। इसके बाद DCP सेंट्रल लखनऊ विक्रांत वीर को प्रतीक्षारत करते हुए मुख्यालय से अटैच किए जाने की जानकारी सामने आई।इन कार्रवाइयों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि शिवा शर्मा मामले की जांच और आरोपी की तलाश में कहां चूक हुई। हालांकि अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के सटीक कारणों की आधिकारिक पुष्टि और विभागीय आदेश का पूरा विवरण सामने आना जरूरी है।
50 हजार का इनाम, गैर-जमानती वारंट और तलाश में जुटी टीमें
शिवा शर्मा की मौत के मामले में श्रद्धा दुबे पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किए जाने और गैर-जमानती वारंट की जानकारी सामने आई है। पुलिस उसकी तलाश में कई टीमें लगा चुकी है। STF की भूमिका भी बताई गई है, लेकिन अब तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।एक तरफ पुलिस आरोपी तक पहुंचने के लिए दबिश दे रही है। तो दूसरी तरफ उसका बयान सार्वजनिक होने से जांच की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। अब पुलिस के सामने चुनौती सिर्फ श्रद्धा को तलाशने की नहीं बल्कि मामले से जुड़े हर पहलू की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों को सामने लाने की भी है।
श्रद्धा दुबे का दावा—शिवा ने चौथी मंजिल से लगाई थी छलांग
मीडिया एजेंसी को दिए गए बयान में श्रद्धा दुबे ने दावा किया कि शिवा शर्मा की मौत हत्या नहीं, बल्कि आत्महत्या थी। उसके मुताबिक उसने शिवा को अपनी बिल्डिंग की चौथी मंजिल से छलांग लगाते हुए अपनी आंखों से देखा था। श्रद्धा ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि शिवा की मां ने उसके खिलाफ गलत आरोप लगाए हैं। क्योंकि वह उसे पसंद नहीं करती थीं। उसने अपनी बिल्डिंग के CCTV कैमरों की जांच कराने की मांग भी की और सवाल उठाया कि जब नेपाल बॉर्डर के कैमरों की जांच की जा सकती है। तो उसकी बिल्डिंग के CCTV फुटेज की जांच में देरी क्यों हो रही है। हालांकि श्रद्धा के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। शिवा की मौत की वास्तविक परिस्थितियों का निर्धारण पुलिस जांच, CCTV फुटेज, फॉरेंसिक साक्ष्यों और अन्य तथ्यों के आधार पर ही हो सकेगा।
आर्थिक तंगी और लाखों के कर्ज का भी किया दावा
श्रद्धा ने अपने बयान में दावा किया कि वह शिवा को करीब चार महीने से जानती थी। उसके अनुसार शुरुआती ढाई महीने तक दोनों दोस्त थे। उसने यह भी कहा कि शिवा आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा था और उस पर करीब 16 से 17 लाख रुपये का कर्ज था।श्रद्धा के मुताबिक शिवा ने उससे भी आर्थिक मदद मांगी थी। उसने आरोप लगाया कि करीब एक महीने पहले शिवा उसके घर से पांच से छह लाख रुपये की ज्वेलरी ले गया था और एक वीडियो में उसे लौटाने की बात कही थी। ये सभी बातें श्रद्धा की ओर से किए गए दावे हैं।
ड्राइवर से मारपीट और बहन को मामले में घसीटने का आरोप
श्रद्धा ने दावा किया कि स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और सदमे के कारण वह वहां से चली गई थी। उसके मुताबिक उसके ड्राइवर के साथ मारपीट होने और खुद पर हत्या का आरोप लगाए जाने के बाद वह घबरा गई थी।उसने अपनी बहन को भी मामले में बेवजह घसीटे जाने का आरोप लगाया और कहा कि उसकी बहन का शिवा से कोई संबंध नहीं था। श्रद्धा ने यह भी कहा कि किसी के साथ उसकी तस्वीर होने का अर्थ यह नहीं है कि वह किसी अपराध में शामिल है। उसने पुलिस और न्यायपालिका से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए CCTV फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच कराने की अपील की।
पुलिस की जांच पर उठे सवाल, लेकिन जवाब साक्ष्यों से ही मिलेगा
श्रद्धा के बयान के बाद इस मामले में कई सवाल चर्चा में हैं। अगर आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। तो वह मीडिया तक कैसे पहुंची? क्या पुलिस को उसकी लोकेशन के बारे में कोई जानकारी थी? क्या बिल्डिंग के CCTV फुटेज और कॉल डिटेल की जांच पूरी हो चुकी है?इन सवालों के जवाब पुलिस की आधिकारिक जानकारी और जांच के निष्कर्षों से ही स्पष्ट हो सकेंगे। फिलहाल केवल बयान सामने आने से न तो श्रद्धा के दावों को सही माना जा सकता है और न ही उन पर लगे आरोपों को अंतिम रूप से साबित माना जा सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सहारनपुर की ACJM-II अदालत से जुड़े एक अलग मामले की जानकारी भी सामने आई है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक केस संख्या 83/2024 में श्रद्धा दुबे को 16 अक्टूबर को नोटिस जारी किया गया और 30 अक्टूबर 2026 को अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए हैं।बताया गया है कि यह मामला थाना साइबर क्राइम में दर्ज केस से संबंधित है। जिसमें BNS की धारा 318(4), 317(4) और IT एक्ट की धारा 66D का उल्लेख है। जब्त सुपरब कार नंबर DL6CM3920 को छुड़ाने के लिए डॉ. प्रभात वर्मा की ओर से अर्जी दिए जाने की जानकारी भी दी गई है।
अब पुलिस के सामने दोहरी चुनौती
शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब पुलिस के सामने दोहरी चुनौती बन गया है। एक ओर श्रद्धा दुबे की तलाश और मौत की परिस्थितियों की जांच है। तो दूसरी ओर आरोपी के बयान के सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल हैं।हजरतगंज इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को लाइन हाजिर किए जाने और DCP सेंट्रल विक्रांत वीर को प्रतीक्षारत कर मुख्यालय से अटैच किए जाने की जानकारी ने मामले को और गंभीर बना दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि पुलिस श्रद्धा तक कब पहुंचती है और जांच में कौन-से तथ्य सामने आते हैं। वही सबसे अहम सवाल यही है—श्रद्धा दुबे का पता लगाने और शिवा शर्मा की मौत की गुत्थी सुलझाने में पुलिस को सफलता कब मिलेगी? इसका जवाब बयानबाजी से नहीं बल्कि निष्पक्ष जांच ठोस साक्ष्यों और आधिकारिक कार्रवाई से ही सामने आएगा।






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