₹53,428 करोड़ का सामाजिक सहायता कार्यक्रम स्वीकृत; पूरे भारत में 3.20 करोड़ लाभार्थियों को लाभ

नई दिल्ली, अक्टूबर 2026: केंद्र सरकार ने विकलांग व्यक्तियों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को और अधिक सुलभ बनाने के लिए विकलांगता पेंशन के लिए पात्रता मानदंड में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। पेंशन के लिए अर्हता प्राप्त करने के लिए आवश्यक न्यूनतम विकलांगता सीमा 80 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत कर दी गई है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) को 2026-27 से 2030-31 तक पांच साल तक जारी रखने की भी मंजूरी दे दी है। कार्यक्रम के लिए ₹53,428 करोड़ का आवंटन किया गया है, जिससे 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 3.20 करोड़ लोगों को लाभ होने की उम्मीद है।

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम का नाम बदलकर प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना रखा जाएगा। कार्यक्रम के तहत कई पेंशन और सामाजिक सहायता योजनाओं का भी नाम बदला जाएगा

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांगता पेंशन योजना का नाम बदलकर क्रमश: प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना, प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना और प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना कर दिया जाएगा।

इसी तरह, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना कर दिया जाएगा

विकलांगता पेंशन पात्रता को और अधिक समावेशी बनाया गया

प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना के तहत, जन्म से 79 वर्ष की आयु के पात्र लाभार्थियों को प्रति माह ₹375 की वित्तीय सहायता मिलेगी, जबकि 80 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों को प्रति माह ₹625 मिलेगी।

पात्रता के लिए न्यूनतम विकलांगता की आवश्यकता 80 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत कर दी गई है। पेंशन प्राप्त करने के लिए न्यूनतम आयु मानदंड भी जन्म से शुरू होगा, जिससे बच्चों सहित विकलांग व्यक्तियों को सामाजिक सुरक्षा ढांचे के तहत कवर किया जा सकेगा।