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रामनगरी में सजेगा लोक संस्कृति का महाकुंभ, देशभर के कलाकार बिखेरेंगे रंग -

🕐 04 Nov 2026, 03:20 pm• 3 min padho • Chugal Khor News
रामनगरी में सजेगा लोक संस्कृति का महाकुंभ, देशभर के कलाकार बिखेरेंगे रंग -

अयोध्या में आयोजित होने वाला दीपोत्सव-2026 इस बार सिर्फ दीपों की रोशनी और भव्य सजावट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रामनगरी में देश की समृद्ध लोक संस्कृति का भी अनूठा संगम देखने को मिलेगा। दीपोत्सव के दौरान उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ देश के कई राज्यों से आए लोक कलाकार अपनी पारंपरिक नृत्य, संगीत और कला विधाओं की प्रस्तुतियों से उत्सव में चार चांद लगाएंगे। मयूर से लेकर छऊ, घूमर से झिझिया और श्री खोल से बोनालू तक देश की विविध सांस्कृतिक परंपराएं अयोध्या के सांस्कृतिक मंचों पर जीवंत होंगी।

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि दीपोत्सव-2026 में देश की लोक कलाओं और पारंपरिक विधाओं को विशेष स्थान दिया गया है। इसका उद्देश्य भारतीय संस्कृति की विविधता को वैश्विक मंच तक पहुंचाने के साथ लोक कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर उपलब्ध कराना है।उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आने वाले कलाकार अपनी क्षेत्रीय लोक परंपराओं की प्रस्तुति देंगे। इनमें मथुरा का मयूर और बम रसिया नृत्य, प्रयागराज का ढेढ़िया, बांदा का पाई डंडा, सोनभद्र का मांदल-सिंघा और करमा नृत्य प्रमुख आकर्षण होंगे। वहीं अयोध्या के कलाकार बधावा, फरुवाही तथा डमरू-शंख नृत्य के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक विरासत की झलक पेश करेंगे। इसके अलावा गाजीपुर का धोबिया, गोरखपुर का वनटांगिया, पीलीभीत का थारू, झांसी का राई, सुलतानपुर का नटवरी और बहराइच का डोमकच नृत्य भी दर्शकों को आकर्षित करेगा।दीपोत्सव को राष्ट्रीय सांस्कृतिक स्वरूप देने के लिए दूसरे राज्यों की लोक कलाओं को भी इसमें शामिल किया गया है।

पश्चिम बंगाल के कलाकार श्री खोल, ओडिशा के कलाकार मास्क डांस, शाही जात्रा, रणप्पा चढैय्या और शंख वादन की प्रस्तुति देंगे। झारखंड का पुरुलिया छऊ, मध्य प्रदेश का गुदुम बाजा, कर्नाटक का ढोलु कुनीथा और गुजरात का तलवार रास भी उत्सव की सांस्कृतिक छटा बढ़ाएंगे।इसी क्रम में राजस्थान का घूमर और चरी, बिहार की झिझिया, चेन्नई की कावड़ी, कड़गम और मयूर नृत्य तथा आंध्र प्रदेश का बोनालू भी दीपोत्सव का हिस्सा होंगे। इन प्रस्तुतियों के जरिए अयोध्या पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को देश के अलग-अलग क्षेत्रों की पारंपरिक वेशभूषा, संगीत, नृत्य और लोक जीवन को करीब से देखने का अवसर मिलेगा।दीपोत्सव की भव्य शोभायात्रा में भी लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण रहेंगी। शोभायात्रा में प्रयागराज का ढेढ़िया, मथुरा का मयूर, बांदा का पाई डंडा, सोनभद्र का मांदल एवं सिंघा और अयोध्या का बधावा नृत्य शामिल होगा।

इसके साथ ही आजमगढ़ के कलाकार धोबिया नृत्य और प्रयागराज के कलाकार कबीरी गायन के जरिए लोक संस्कृति की छाप छोड़ेंगे। पारंपरिक वाद्ययंत्रों, रंग-बिरंगी वेशभूषा और लोक धुनों से सजी प्रस्तुतियां रामनगरी के उत्सवी माहौल को और खास बनाएंगी।इस आयोजन के माध्यम से प्रदेश सरकार का जोर पारंपरिक लोक कलाओं के संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी तक उनके हस्तांतरण पर भी है। मयूर, करमा, राई, धोबिया, थारू और छऊ जैसी लोक विधाएं अपने-अपने क्षेत्रों की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। दीपोत्सव जैसे बड़े आयोजन इन कलाओं को व्यापक मंच देने के साथ कलाकारों को अपनी प्रतिभा और परंपरा से देश-दुनिया को परिचित कराने का अवसर प्रदान करेंगे।

पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने बताया कि दीपोत्सव-2026 में दीपों की जगमगाहट के साथ लोकनृत्य, लोकसंगीत और पारंपरिक कलाओं की छटा भी रामनगरी को विशिष्ट पहचान देगी। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों और देश के अनेक राज्यों से आने वाले कलाकार अयोध्या को सांस्कृतिक संगम का स्वरूप देंगे। उन्होंने कहा कि लोक प्रस्तुतियों के जरिए दीपोत्सव भारतीय संस्कृति की विविधता, समृद्ध परंपराओं और राष्ट्रीय एकता का संदेश देश-दुनिया तक पहुंचाएगा। इस तरह दीपोत्सव-2026 में दीपों की रोशनी के साथ लोक संस्कृति के रंग भी रामनगरी की पहचान बनेंगे। अयोध्या में होने वाला यह आयोजन भारतीय लोक परंपराओं, कला और सांस्कृतिक विरासत को एक साझा मंच पर प्रस्तुत करेगा।

स्रोत: Filmitics

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