Rajya Sabha Elections: विधानसभा चुनाव से पहले यूपी में राज्यसभा चुनाव को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं. यूपी में 10 सीटों के लिए चुनाव होने हैं. इसके लिए सपा न…

Rajya Sabha Elections: विधानसभा चुनाव से पहले यूपी में राज्यसभा चुनाव को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं. यूपी में 10 सीटों के लिए चुनाव होने हैं. इसके लिए सपा ने 2 उम्मीदवार तय कर लिए हैं. राज्यसभा के लिए सपा हाईकमान ने प्रो. रामगोपाल यादव और आलोक रंजन पर भरोसा जताया है. पार्टी ने दोनों के नाम पर मुहर लगा दी है. बस आधिकारिक एलान करना बाकी रह गया है

दरअसल, सोमवार को लखनऊ में सपा की बैठक हुई. इसके बाद समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने दो उम्मीदवारों के नाम तय कर दिए हैं. सोमवार को पार्टी विधायकों के साथ हुई बैठक में प्रोफेसर रामगोपाल यादव और पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन की उम्मीदवारी पर मुहर लगी. वहीं, तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने को लेकर भी चर्चा हुई, लेकिन इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है. रामगोपाल यादव सपा के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं और वर्तमान में भी राज्यसभा सदस्य हैं. पार्टी ने एक बार फिर उन्हें उच्च सदन भेजने का फैसला किया है

दूसरे उम्मीदवार के तौर पर आलोक रंजन का नाम तय किया गया है. पूर्व आईएएस अधिकारी रंजन उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव रह चुके हैं. उन्हें सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के करीबी और रणनीतिकार के तौर पर भी जाना जाता है. 2024 के राज्यसभा चुनाव में भी सपा ने उन्हें उम्मीदवार बनाया था

बैठक में तीसरे उम्मीदवार को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ. इस दौरान सलीम शेरवानी के नाम की चर्चा सामने आई। हालांकि, पार्टी ने अभी उनके नाम पर अंतिम मुहर नहीं लगाई है. तीसरे उम्मीदवार के सवाल पर अखिलेश यादव ने विधायकों की संख्या और समर्थन की स्थिति देखने के बाद फैसला लेने की बात कही. ऐसे में अब पार्टी की अगली रणनीति तीसरे उम्मीदवार के नाम और चुनावी समीकरण पर निर्भर करेगी

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर 2026 को मतदान प्रस्तावित है. नामांकन की प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू होगी और उम्मीदवार 6 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे. सपा की ओर से दो नाम तय होने के बाद अब पार्टी के तीसरे उम्मीदवार को लेकर तस्वीर साफ होने का इंतजार है

यूपी की 10 राज्यसभा सीटों पर चुनाव का गणित इस बार दिलचस्प है. मौजूदा संख्या बल के आधार पर बीजेपी कई सीटों पर मजबूत स्थिति में है, जबकि सपा के लिए दो सीटों पर जीत की संभावना बनी हुई है. ऐसे में अतिरिक्त सीट हासिल करने की सपा की कोशिश से चुनावी मुकाबला और महत्वपूर्ण हो गया है. सपा की बैठक में पार्टी के सभी विधायकों से चर्चा किए जाने की बात कही गई है. उम्मीदवारों के चयन के साथ अब निगाहें इस बात पर हैं कि राज्यसभा चुनाव में दलों की रणनीति और संख्या बल का अंतिम समीकरण क्या रहता है

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव का असली खेल अतिरिक्त वोटों का है. विधानसभा में इस समय 397 सदस्य हैं, ऐसे में एक उम्मीदवार को जीत के लिए करीब 37 प्रथम वरीयता वाले वोटों की जरूरत होगी.समाजवादी पार्टी के पास 101 विधायक हैं. अगर कांग्रेस के दो विधायक भी सपा के साथ आते हैं, तो विपक्षी खेमे की संख्या 103 तक पहुंच सकती है. इस स्थिति में सपा अपने दो उम्मीदवारों को आसानी से राज्यसभा भेज सकती है और करीब 29 वोट अतिरिक्त बचेंगे

यही अतिरिक्त वोट सपा की तीसरी सीट की उम्मीद का आधार हैं. हालांकि, केवल अपने मौजूदा संख्या बल के दम पर तीसरे उम्मीदवार की जीत संभव नहीं होगी. इसके लिए सपा को दूसरे दलों या अन्य विधायकों का समर्थन हासिल करना पड़ेगा. ऐसे में तीसरी सीट के लिए होने वाला मुकाबला चुनाव के सबसे दिलचस्प पहलुओं में से एक हो सकता है