उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बेटियों को शिक्षा के साथ आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। अब कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में…

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बेटियों को शिक्षा के साथ आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। अब कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राएं किताबी ज्ञान के साथ आधुनिक तकनीक और रोजगारपरक हुनर भी सीखेंगी। इसके लिए प्रदेश सरकार ने ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ के तहत शैक्षिक सत्र 2026-27 में विशेष कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी की है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के माध्यम से प्रदेश के 71 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की 2,672 छात्राओं को प्रशिक्षित किया जाएगा।

प्रशिक्षण की कक्षाएं 2 नवंबर 2026 से शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इस पहल का उद्देश्य खासतौर पर ग्रामीण और वंचित वर्ग की बेटियों को भविष्य में रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता के बेहतर अवसरों के लिए तैयार करना है।योगी सरकार की इस योजना में छात्राओं को बदलते समय और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके तहत हेल्थकेयर, आईटी-आईटीईएस, परिधान निर्माण, मीडिया एवं एंटरटेनमेंट और ग्रीन जॉब्स जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), कंप्यूटर तकनीक और सॉफ्ट स्किल्स पर भी विशेष जोर रहेगा।

छात्राओं को तकनीकी दक्षता के साथ संवाद कौशल, व्यक्तित्व विकास और व्यावहारिक कार्यों की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण की अधिकतम अवधि 300 घंटे निर्धारित की गई है। साथ ही मिशन पोर्टल पर उपलब्ध एआई कोर्स अथवा ‘युवा एआई फॉर ऑल’ का अध्ययन भी अनिवार्य किया गया है। सरकार का प्रयास है कि बेटियां स्कूली शिक्षा पूरी करने के साथ भविष्य की प्रतिस्पर्धी दुनिया के लिए भी तैयार हो सकें।प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बेटियों को शिक्षित करने के साथ आर्थिक रूप से सशक्त बनाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक कौशल भी जरूरी है। इसी सोच के साथ सरकार छात्राओं को कम उम्र से ही आधुनिक तकनीक और रोजगार से जुड़े क्षेत्रों का प्रशिक्षण उपलब्ध करा रही है।

मिशन शक्ति और कौशल विकास मिशन के समन्वय से संचालित यह पहल बालिकाओं का आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर देगी।प्रशिक्षण कार्यक्रम को समय पर शुरू कराने के लिए उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के निदेशक पुलकित खरे ने संबंधित अधिकारियों और प्रशिक्षण प्रदाताओं को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। सभी प्रशिक्षण केंद्रों की स्वीकृति, छात्राओं का पंजीकरण और बैच गठन की प्रक्रिया जल्द पूरी करने को कहा गया है, ताकि प्रत्येक स्थिति में 2 नवंबर तक कक्षाएं शुरू हो सकें। मिशन पोर्टल पर केंद्र और बैच की स्वीकृति से संबंधित आवेदन प्राप्त होने के दो कार्यदिवस के भीतर निर्णय लेना अनिवार्य होगा। वहीं, प्रशिक्षण शुरू होने के सात कार्यदिवस के अंदर छात्राओं को पाठ्य-पुस्तकें और आवश्यक शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशिक्षण एनसीवीटी और एनएसक्यूएफ मानकों के अनुरूप संबंधित सेक्टर स्किल काउंसिल के पाठ्यक्रम के आधार पर संचालित होगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद छात्राओं का मूल्यांकन भी कराया जाएगा।सरकार ने प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत बनाया है। जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयों को प्रत्येक 15 दिन में प्रशिक्षण केंद्रों का स्थलीय निरीक्षण करने और उपकरणों सहित अन्य व्यवस्थाओं की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशिक्षण शुरू करने में देरी या गुणवत्ता से समझौता करने वाली संस्थाओं के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।