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4 UP STF News: उत्तर प्रदेश STF (स्पेशल टास्क फोर्स) को बड़ी कामयाबी मिली है। STF ने भारत में अवैध रूप से रह रहे चीनी नागरिकों के गिरोह से जुड़े एक कथित सदस्य को दिल्ली के करोल बाग इलाके से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान गणपत लाल राजपुरोहित के रूप में हुई है, जो राजस्थान के बालोतरा का रहने वाला बताया गया है।
STF के अनुसार, आरोपी पर Shell कंपनियों के जरिए हवाला और अन्य माध्यमों से रकम विदेश भेजने में शामिल होने का आरोप है। कार्रवाई के दौरान आरोपी के पास से भारतीय और विदेशी मुद्रा के साथ कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं।
उत्तर प्रदेश STF ने कार्रवाई करते हुए गणपत लाल राजपुरोहित को दिल्ली के करोल बाग से गिरफ्तार किया। जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी कथित तौर पर ऐसे नेटवर्क से जुड़ा हुआ था, जिसका संबंध भारत में अवैध रूप से रह रहे चीनी नागरिकों से बताया जा रहा है।
STF अब आरोपी से पूछताछ कर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और विदेशों में रकम भेजने से संबंधित गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
STF की जांच में आरोपी पर Shell कंपनियों के माध्यम से हवाला और अन्य तरीकों से रकम विदेश भेजने में संलिप्त होने का आरोप सामने आया है। एजेंसी इस बात की जांच कर रही है कि इन कंपनियों के जरिए कितनी रकम का लेनदेन किया गया और इस नेटवर्क से कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।
आरोपी के पास से बरामद दस्तावेजों और अन्य सामान को जांच के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
STF के मुताबिक, गिरफ्तारी के दौरान गणपत लाल राजपुरोहित के पास से निम्न सामान बरामद किया गया:
बरामद दस्तावेजों और विदेशी मुद्रा के आधार पर STF मामले की आगे की जांच कर रही है।
गिरफ्तार आरोपी गणपत लाल राजपुरोहित राजस्थान के बालोतरा का रहने वाला बताया गया है। STF अब उसके संपर्कों, वित्तीय लेनदेन और कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाने में लगी है।
जांच के दौरान यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आरोपी की चीनी नागरिकों और संबंधित कंपनियों से किस तरह की भूमिका या कड़ी थी।
इस कार्रवाई के बाद STF की जांच का फोकस कथित वित्तीय नेटवर्क, Shell कंपनियों, हवाला लेनदेन और विदेशों में रकम भेजने के तरीकों पर है। बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक/वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
नोट: मामले में लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं। अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
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