उत्तर प्रदेश में विधान परिषद चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी ने इस बार समाजवादी पार्टी को चुनावी मैदान में कड़ी चुनौती देने क…

उत्तर प्रदेश में विधान परिषद चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी ने इस बार समाजवादी पार्टी को चुनावी मैदान में कड़ी चुनौती देने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। प्रदेश की 11 विधान परिषद सीटों पर हो रहे चुनाव में भाजपा का लक्ष्य अपनी पिछली जीत का आंकड़ा बढ़ाकर दो अंकों तक पहुंचाना है। इस रणनीति को सफल बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद चुनावी कमान संभाल ली है। वे लगातार पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में जनसभाएं और संवाद कार्यक्रम कर चुनावी माहौल को भाजपा के पक्ष में मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।विधान परिषद की जिन 11 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, उनमें से पिछले चुनाव में भाजपा ने छह सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस बार पार्टी न केवल अपनी मौजूदा सीटों को बरकरार रखना चाहती है, बल्कि समाजवादी पार्टी के प्रभाव वाली सीटों पर भी कब्जा जमाने की रणनीति पर काम कर रही है।

भाजपा का लक्ष्य इस चुनाव में कम से कम 10 सीटों पर जीत हासिल कर विधान परिषद में अपनी राजनीतिक ताकत को और मजबूत करना है।भाजपा प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार चुनावी कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। गोरखपुर में चुनावी माहौल बनाने के बाद उन्होंने बरेली में भाजपा प्रत्याशी हरी सिंह ढिल्लो के समर्थन में सभा की। अब बुधवार को मुख्यमंत्री वाराणसी में पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में जनसभा को संबोधित करेंगे। लगातार तीसरे दिन चुनावी मैदान में मुख्यमंत्री की सक्रियता को भाजपा की आक्रामक चुनावी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।वाराणसी की विधान परिषद सीटों पर इस बार मुकाबला बेहद अहम माना जा रहा है। भाजपा ने स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से केदारनाथ सिंह पर एक बार फिर भरोसा जताया है।

केदारनाथ सिंह को पिछले चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। वहीं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी ने प्रमोद मिश्रा को चुनावी मैदान में उतारा है।पिछले चुनाव में वाराणसी की इन सीटों पर समाजवादी पार्टी का दबदबा देखने को मिला था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र से जुड़ी सीट पर सपा की जीत भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक झटका मानी गई थी। ऐसे में इस बार पार्टी इन सीटों पर जीत हासिल कर सियासी समीकरण बदलने की कोशिश में जुटी है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लगातार चुनावी सभाएं भाजपा की व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं। पार्टी स्थानीय स्तर पर संगठन को सक्रिय करने के साथ ही मतदाताओं तक सीधा संदेश पहुंचाने की कोशिश कर रही है। माना जा रहा है कि वाराणसी के बाद मुख्यमंत्री अन्य सीटों पर भी भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में चुनावी कार्यक्रम कर सकते हैं।विधान परिषद का यह चुनाव भाजपा और सपा दोनों के लिए राजनीतिक प्रतिष्ठा का सवाल बनता जा रहा है। जहां भाजपा दो अंकों में जीत हासिल कर अपना दबदबा बढ़ाना चाहती है, वहीं समाजवादी पार्टी के सामने अपनी पिछली जीत वाली सीटों को बचाने की चुनौती है। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चुनावी सक्रियता भाजपा को कितना फायदा पहुंचाती है और सपा अपनी सीटों पर पकड़ बनाए रखने में कितनी सफल होती है।