गाजीपुर: उत्तर प्रदेश की राजनीति में गाजीपुर की मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट लंबे समय से अपने बदलते राजनीतिक समीकरणों के लिए चर्चा में रही है। कभी कम्युनिस्ट पार्ट…
गाजीपुर: उत्तर प्रदेश की राजनीति में गाजीपुर की मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट लंबे समय से अपने बदलते राजनीतिक समीकरणों के लिए चर्चा में रही है। कभी कम्युनिस्ट पार्टी का प्रभाव, फिर कांग्रेस का दौर, इसके बाद अंसारी परिवार की मजबूत राजनीतिक मौजूदगी और फिर BJP की जीत—मोहम्मदाबाद का चुनावी इतिहास कई बड़े बदलावों का गवाह रहा है। अब 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सवाल है कि इस बार यहां किन मुद्दों और समीकरणों का असर दिखाई देगा?
मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास 1957 से शुरू होता है। उस समय सीट का स्वरूप अलग था और CPI के सरजू पांडे और रघुबीर ने जीत दर्ज की थी। 1962 में विजय शंकर सिंह ने कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की। इसके बाद 1967 और 1969 में भी कांग्रेस का प्रभाव दिखाई दिया।
1974 में राम जनम राय ने भारतीय क्रांति दल और 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज की। 1980 में कांग्रेस की फिर वापसी हुई। इसके बाद 1985 से 1993 तक अफजाल अंसारी CPI के टिकट पर इस सीट से विधायक रहे और 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर भी उन्होंने जीत दर्ज की।
मोहम्मदाबाद में 2002 का चुनाव एक बड़ा राजनीतिक मोड़ माना जाता है। BJP के कृष्णानंद राय ने जीत दर्ज कर पार्टी को पहली बार इस सीट पर सफलता दिलाई। 2005 में कृष्णानंद राय की हत्या के बाद 2006 के उपचुनाव में उनकी पत्नी अलका राय ने BJP के टिकट पर जीत दर्ज की।
इसके बाद 2007 में सिबगतुल्लाह अंसारी ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर अलका राय को हराया। 2012 में भी सिबगतुल्लाह अंसारी ने कौमी एकता दल के टिकट पर जीत दर्ज की। चुनावी रिकॉर्ड के मुताबिक, इसके बाद 2017 में BJP की अलका राय ने 32,727 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।
2022 के विधानसभा चुनाव में मुकाबला एक बार फिर बदला। सिबगतुल्लाह अंसारी के बेटे सुहैब उर्फ मन्नू अंसारी ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर 1,11,443 वोट हासिल किए और BJP की अलका राय को 18,759 वोटों से हराया। अलका राय को 92,684 वोट मिले। BSP के माधवेंद्र राय 32,440 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
यानी पिछले तीन विधानसभा चुनावों में 2017 में BJP, जबकि 2022 में SP को जीत मिली। यह सीट के बदलते चुनावी रुझान को समझने के लिए महत्वपूर्ण तथ्य है।
मोहम्मदाबाद में 2027 की चर्चा सिर्फ पिछले चुनावी परिणामों तक सीमित नहीं है। भूमिहार, दलित, यादव, कुशवाहा, मुस्लिम, ब्राह्मण और अन्य सामाजिक समूहों का चुनावी भूमिका को लेकर अक्सर राजनीतिक विश्लेषण किया जाता है। हालांकि इन समुदायों के सटीक प्रतिशत को आधिकारिक विधानसभा वोटर डेटा मानना उचित नहीं होगा।
उम्मीदवारों की सामाजिक स्वीकार्यता, स्थानीय मुद्दे, संगठन की सक्रियता और अलग-अलग समुदायों का मतदान व्यवहार चुनावी मुकाबले को प्रभावित करने वाले कारक हो सकते हैं।
2024 के लोकसभा चुनाव में गाजीपुर सीट से समाजवादी पार्टी के अफजाल अंसारी ने BJP के पारस नाथ राय को 1,24,861 वोटों से हराया था। अफजाल अंसारी को 5,39,912 और पारस नाथ राय को 4,15,051 वोट मिले।
हालांकि लोकसभा का परिणाम सीधे 2027 के विधानसभा चुनाव का परिणाम नहीं माना जा सकता। विधानसभा और लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार, मुद्दे, क्षेत्रीय समीकरण और मतदान व्यवहार अलग हो सकते हैं।
ऐसे में 2027 में मोहम्मदाबाद की नजरें उम्मीदवारों, स्थानीय मुद्दों, अंसारी परिवार के राजनीतिक प्रभाव, BJP के संगठन और विभिन्न सामाजिक समूहों के रुख पर रहेंगी। इस सीट का पिछला इतिहास बताता है कि यहां चुनावी तस्वीर समय के साथ कई बार बदली है।
रश्मि सिंह एक अनुभवी पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें हिंदी पत्रकारिता, न्यूज़ रिपोर्टिंग और डिजिटल मीडिया का व्यापक अनुभव है। उन्होंने मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है और अपने पत्रकारिता करियर में कई बड़े मीडिया संस्थानों और न्यूज़ चैनलों के साथ काम किया है।राजनीति, जनसरोकार, उत्तर प्रदेश की सियासत और समसामयिक मुद्दों पर उनकी विशेष पकड़ है। खबरों को सरल, तथ्यपरक और पाठकों के लिए रोचक अंदाज में प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है। डिजिटल पत्रकारिता के बदलते दौर में रश्मि सिंह का प्रयास है कि पाठकों तक तेज, विश्वसनीय और आसान भाषा में तथ्य आधारित खबरें पहुंचें।
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