मुख्यमंत्री ने राज्य सेवा के परिवीक्षाधीन अधिकारियों से बातचीत की, जवाबदेही और दिशा के साथ लोक सेवा की सलाह दी

राजस्थान के युवा ऊर्जावान और प्रतिभाशाली हैं; उनकी क्षमताओं को विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास चल रहे हैं
आम जनता का विश्वास अर्जित करना ही प्रशासनिक सफलता का सच्चा मानक है। -मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
विभिन्न राज्य सेवाओं के परिवीक्षाधीन अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के साथ अपने अनुभव साझा किये
आरएएस भर्ती परीक्षाओं के लगातार आयोजन के लिए मुख्यमंत्री का जताया आभार, एक ही साल में 2 बैच के प्रशिक्षण की सराहना
जयपुर, अक्टूबर 2026 : मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को ओटीएस में राज्य सेवा के परिवीक्षाधीन अधिकारियों से संवाद किया और उन्हें सुशासन एवं जनसेवा के मूल मंत्र दिये। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सेवा में सच्ची सफलता आम नागरिक के जीवन में आये सकारात्मक बदलाव से तय होती है. प्रशासन द्वारा लिये गये प्रत्येक निर्णय में आम जनता की आवश्यकताओं एवं समस्याओं को सदैव ध्यान में रखा जाना चाहिए
मुख्यमंत्री ने कहा कि अपनी स्थिति को केवल एक अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि जनसेवा की जिम्मेदारी के रूप में समझना चाहिए। उन्हें अपने संघर्षों और अतीत को याद रखना चाहिए, उनसे आम जनता के हित में काम करने की प्रेरणा लेनी चाहिए और अपने उद्देश्य की दिशा कभी नहीं बदलनी चाहिए, क्योंकि जीवन की असली परीक्षा जिम्मेदारी के पद पर बैठने के बाद ही शुरू होती है।
उन्होंने कहा कि युवाओं के सपनों और भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए आरएएस भर्ती परीक्षा हर साल आयोजित की जाएगी। उन्होंने परिवीक्षाधीन अधिकारियों से कहा कि वे हर व्यक्ति और पूरे राजस्थान को अपना परिवार समझें, पूरी सहानुभूति के साथ आम जनता से जुड़ें और उनकी समस्याओं का समाधान करें।
सार्वजनिक ट्रस्ट को प्रशासन की सबसे बड़ी पूंजी बनाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्यालय में आने वाला हर व्यक्ति कुछ न कुछ आशा लेकर आता है. ऐसे में अधिकारियों का व्यवहार, कार्यशैली और फैसले उस व्यक्ति का प्रशासन पर भरोसा मजबूत कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि चरित्र और जनता का विश्वास सार्वजनिक सेवा में एक अधिकारी की सबसे बड़ी पूंजी है। इसलिए ईमानदारी और निष्पक्षता को अपने काम का आधार बनाएं। उन्होंने अधिकारियों से अपील करते हुए कहा कि वे ऐसी कार्य संस्कृति विकसित करें जहां लोगों को अपने काम के लिए अनावश्यक चक्कर न लगाना पड़े और हर व्यक्ति की बात सम्मानपूर्वक सुनी जाए.
स्रोत: Maverick News30
