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मुख्यमंत्री ने गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी भाषाओं के लिए वॉयस कलेक्शन पोर्टल लॉन्च किया

🕐 22 Oct 2026, 10:20 pm• 2 min padho • Chugal Khor News
मुख्यमंत्री ने गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी भाषाओं के लिए वॉयस कलेक्शन पोर्टल लॉन्च किया

अभियान की शुरुआत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कुमाऊंनी में वॉयस क्लिप के साथ

क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए आधुनिक तकनीक जरूरी: मुख्यमंत्री

देहरादून, अक्टूबर 2026 : उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को एआई स्ट्रैटेजिक इंजीनियरिंग (एआईएसई) फाउंडेशन द्वारा विकसित 'भाषा एआई' पहल के तहत गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी क्षेत्रीय भाषाओं के लिए एक आवाज संग्रह पोर्टल लॉन्च किया। लॉन्च मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय में हुआ, अभियान की शुरुआत कुमाऊंनी में धामी द्वारा रिकॉर्ड की गई वॉयस क्लिप से हुई

इस पहल का उद्देश्य उत्तराखंड की क्षेत्रीय भाषाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से जोड़ना है ताकि उन्हें संरक्षित और बढ़ावा दिया जा सके और डिजिटल प्लेटफार्मों पर उनके उपयोग का विस्तार किया जा सके।

एआईएसई फाउंडेशन की पहल की सराहना करते हुए धामी ने कहा कि स्थानीय भाषाएं और बोलियां लोगों की पहचान का अभिन्न अंग हैं। उन्होंने कहा कि इस पहचान को संरक्षित करने के लिए लोक कला, संस्कृति और परंपराओं के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाना चाहिए

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में इसका दायरा और बढ़ेगा। इसलिए क्षेत्रीय भाषाओं को तकनीकी प्रगति के अनुरूप विकसित होना चाहिए ताकि देश की समृद्ध भाषाई विरासत को वैश्विक मान्यता मिले

धामी ने कहा कि राज्य सरकार चाहती है कि उत्तराखंड के दूरदराज के गांवों और इलाकों में रहने वाले लोग अपनी भाषा में सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें और अपनी चिंताओं को सरकार तक आसानी से पहुंचा सकें।

उन्होंने कहा कि इसे संभव बनाने के लिए एआई सिस्टम को स्थानीय भाषाओं को सटीक रूप से समझने में सक्षम होना चाहिए। क्षेत्रीय शब्दों का एक व्यापक संग्रह विकसित किया जाना चाहिए, साथ ही उनके सही उच्चारण और विशिष्ट बोलने की शैली को रिकॉर्ड करने वाली रिकॉर्डिंग भी होनी चाहिए। इससे एआई सिस्टम स्थानीय भाषाओं को बेहतर ढंग से समझने और लोगों को उनकी मातृभाषा में सटीक जानकारी प्रदान करने में सक्षम होगा

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में एक ही शब्द का उच्चारण अलग-अलग तरीके से किया जा सकता है। पोर्टल के माध्यम से जानकारी अपलोड करने से एआई सिस्टम को क्षेत्रीय शब्दावली, उच्चारण में भिन्नता और विभिन्न बोलने की शैलियों को पहचानने में मदद मिलेगी

स्रोत: Maverick News30

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