मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अभी भी महाराष्ट्र के सामने सबसे बड़ी चुनौती भयंकर सूखे की स्थिति है। राज्य का 75% हिस्सा सूखे की चपेट में है और लगभग 80%…

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अभी भी महाराष्ट्र के सामने सबसे बड़ी चुनौती भयंकर सूखे की स्थिति है। राज्य का 75% हिस्सा सूखे की चपेट में है और लगभग 80% फसल बर्बाद हो चुकी है

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CM Devendra Fadnavis: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रिपबल्कि मीडिया नेटवर्क के कार्यक्रम में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने समिट के थीम Turning Challenge Into Opportunity (चुनौतियों को अवसर में बदलना) पर अपनी राय रखी। उन्होंने बताया कि कैसे सरकार महाराष्ट्र को हमेशा के लिए सूखा-मुक्त राज्य बनाने की योजना बना रही है

CM देवेंद्र फडणवीस ने रिपब्लिक के मंच पर कहा, 'अभी मेरे राज्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती भयंकर सूखे की स्थिति है। राज्य का 75% हिस्सा सूखे की चपेट में है और लगभग 80% फसल बर्बाद हो चुकी है। आगे का समय बहुत मुश्किल होने वाला है क्योंकि कई इलाकों में पीने के पानी की भी समस्या होगी। मुझे लगता है कि अभी यही सबसे बड़ी चुनौती है। लेकिन मैं आपको बता दूं कि चूंकि हमारी थीम 'चुनौती को अवसर में बदलना' है, इसलिए हमने महाराष्ट्र को हमेशा के लिए सूखा-मुक्त राज्य बनाने की योजना बनाई है। इसके लिए हम नदियों को जोड़ने की कुछ परियोजनाएं शुरू कर रहे हैं, जिनसे पूरा महाराष्ट्र सूखा-मुक्त हो जाएगा।'

विदर्भ सूखा मुक्त बनाने के लिए काम होगा शुरू- CM

उन्होंने कहा, 'हम वैनगंगा नदी को नलगंगा नदी से जोड़ रहे हैं। इस तरह हम असल में 500 किलोमीटर लंबी एक नई नदी बनाएंगे, जिससे पूरा विदर्भ क्षेत्र सूखा-मुक्त हो जाएगा। उम्मीद है कि हम इस साल काम शुरू कर देंगे, हालांकि इसमें 7 साल लगेंगे।'

सभी राज्य आपस में पानी के लिए लड़ रहे- सीएम

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, 'हम 20-25 साल पहले सुनते थे कि इसके बाद जो युद्ध होंगे वह पानी के लिए होंगे। तब ऐसा लगता था कि यह कैसी बात है। लेकिन वर्तमान में देखिए कि सभी राज्य एक-दूसरे से पानी के लिए लड़ रहे हैं। आज के समय में राज्यों के बीच सबसे बड़ा विवाद पानी को लेकर है।' उनका कहना है कि हम पानी पैदा तो नहीं कर सकते, लेकिन हम संसाधन का अच्छे से इस्तेमाल कर सकते हैं

40% किसान बारिश पर निर्भर- सीएम फडणवीस

इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि किसानों की मदद के लिए जो स्कीम चलानी पड़ेगी उसके लिए 30 हजार करोड़ खर्च करना होगा। आज भी 40% किसान बारिश पर निर्भर हैं। इस योजना के तहत खेती-किसानी पूरी तरह बदल जाएगी