मसूरी समाचार: मसूरी में सफाई कर्मचारियों की समस्याओं और अधिकारों को लेकर राज्य सफाई कर्मचारी आयोग सख्त हो गया है। आयोग के उपाध्यक्ष संतोष गौरव ने नगर पालिका अध…
मसूरी समाचार: मसूरी में सफाई कर्मचारियों की समस्याओं और अधिकारों को लेकर राज्य सफाई कर्मचारी आयोग सख्त हो गया है। आयोग के उपाध्यक्ष संतोष गौरव ने नगर पालिका अधिकारियों को 15 दिन के भीतर कार्रवाई कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। वहीं, समीक्षा बैठक में 21 विभागों के अधिकारियों की अनुपस्थिति पर नाराजगी जताते हुए कारण बताओ नोटिस जारी करने को कहा गया है।
मसूरी नगर पालिका के टाउन हॉल सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में सफाई कर्मचारियों की समस्याओं, वेतन, भविष्य निधि (PF), श्रम कानूनों के अनुपालन और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई।
राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष संतोष गौरव ने समीक्षा बैठक में अधिकांश विभागीय अधिकारियों के अनुपस्थित रहने पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने अधिशासी अधिकारी और नायब तहसीलदार को अनुपस्थित अधिकारियों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि अधिकारियों के जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाते हैं, तो जिलाधिकारी से संबंधित अधिकारियों का वेतन रोकने की संस्तुति की जाएगी। आयोग ने साफ किया कि सफाई कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर विभागीय लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में मसूरी नगर पालिका में ठेका प्रथा के तहत सफाई कार्य करा रही कंपनी के कर्मचारियों के भविष्य निधि (PF) और अन्य देय सुविधाओं की जांच कराने के निर्देश दिए गए।
आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि कर्मचारियों को मिलने वाले पीएफ, वेतन और अन्य लाभों से जुड़ी शिकायतों का गंभीरता से परीक्षण किया जाना चाहिए। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि किसी भी सफाई कर्मचारी के अधिकारों का हनन न हो और उन्हें नियमानुसार सभी सुविधाएं मिलें।
राज्य सफाई कर्मचारी आयोग ने मसूरी नगर पालिका में कार्यरत पर्यावरण मित्रों की शैक्षिक योग्यता की समीक्षा करने के निर्देश भी दिए हैं। संतोष गौरव ने कहा कि इंटरमीडिएट या उससे अधिक शिक्षित कर्मचारियों की योग्यता के अनुरूप उन्हें लिपिक पदों पर तैनात करने की संभावनाओं पर विचार किया जाना चाहिए।
इस संबंध में नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को 15 दिन के भीतर आवश्यक कार्रवाई कर आयोग को रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि नगर निकायों में सफाई कर्मचारियों के वेतन निर्धारण और श्रम कानूनों के अनुपालन की स्थिति की समीक्षा जरूरी है। कर्मचारियों को उचित पारिश्रमिक और नियमानुसार सुविधाएं मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारी शहर को स्वच्छ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनके काम, सम्मान, आर्थिक सुरक्षा और अधिकारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कर्मचारियों से जुड़ी वेतन और सुविधाओं की समस्याओं को शासन के समक्ष भी उठाया जाएगा।
सफाई कर्मचारियों और उनके परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए वाल्मीकि बस्ती में संबंधित विभागों के माध्यम से शिविर आयोजित करने की आवश्यकता जताई गई।
इन शिविरों के माध्यम से लोगों को जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देने और पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर दिया गया। साथ ही सफाई कर्मचारियों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को देखते हुए स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात भी कही गई।
संतोष गौरव ने कहा कि सफाई कर्मचारी शहर की स्वच्छता व्यवस्था की रीढ़ हैं। जब अधिकांश लोग सुबह अपने घरों में होते हैं, तब पर्यावरण मित्र सड़कों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई में जुटे रहते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मंशा के अनुरूप सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ सफाई कर्मचारियों के कल्याण, सम्मान और अधिकारों पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
आयोग ने स्पष्ट किया कि सफाई कर्मचारियों की समस्याओं को संबंधित विभागों और शासन तक पहुंचाकर उनके समाधान का प्रयास किया जाएगा। अब नगर पालिका की ओर से 15 दिन के भीतर की जाने वाली कार्रवाई और आयोग को सौंपी जाने वाली रिपोर्ट पर नजर रहेगी।






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