भारत के केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा और उपभोक्ता कल्याण मंत्री…
भारत के केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा और उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री, श्री प्रल्हाद जोशी ने संयुक्त रूप से आज यहां तीन दिवसीय एग्रीवोल्टिक्स विश्व सम्मेलन 2026 का उद्घाटन किया।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसान खेती के साथ-साथ सौर ऊर्जा अपनाकर अन्नदाता और ऊर्जादाता दोनों बन सकते हैं। श्री चौहान ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कृषि और सौर ऊर्जा का एकीकरण वैश्विक कल्याण को बढ़ावा दे सकता है और किसानों की आर्थिक समृद्धि को बढ़ा सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कृषि नीतियों को भारत के छोटे और सीमांत किसानों की व्यावहारिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया जाना चाहिए, जो कृषक समुदाय का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हैं।
श्री चौहान ने बताया कि एग्रीवोल्टिक्स कृषि भूमि के ऊपर स्थापित पैनलों के माध्यम से सौर ऊर्जा उत्पादन को सक्षम बनाता है और साथ ही फसलों को बढ़ने की अनुमति देता है। उन्होंने कहा कि बिजली आधुनिक जीवन और कृषि के लिए अपरिहार्य हो गई है, जिससे खेती के साथ ऊर्जा उत्पादन का एकीकरण किसानों के कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बन गया है।
भारत की कृषि प्रगति पर प्रकाश डालते हुए, मंत्री ने याद दिलाया कि देश पहले अपनी खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए खाद्यान्न आयात पर निर्भर था। उन्होंने कहा कि भारत के खाद्यान्न भंडार में अब गेहूं और चावल की अच्छी आपूर्ति हो गई है, जो किसानों के योगदान को दर्शाता है। उन्होंने आगे कहा कि कृषि क्षेत्र ने 4.5 प्रतिशत की वृद्धि दर बरकरार रखी है और कृषि निर्यात रिकॉर्ड 52.55 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कृषि क्षेत्र के सामने आने वाली संरचनात्मक चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि देश में औसत भूमि जोत केवल 0.96 हेक्टेयर है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एग्रीवोल्टिक्स मॉडल को किसानों को खेती को सौर ऊर्जा उत्पादन से बदलने के बजाय खेती जारी रखने की अनुमति देनी चाहिए
उन्होंने व्यावहारिक सिस्टम डिज़ाइन का आह्वान किया जो पैनल की ऊंचाई, समर्थन संरचनाओं के बीच की दूरी और कृषि मशीनरी की आवाजाही के लिए जिम्मेदार हो, जिससे किसानों को जुताई करने और अपनी आवश्यकताओं के अनुसार फसलों और फसल के पैटर्न को बदलने में सक्षम बनाया जा सके।
श्री चौहान ने मिट्टी के कटाव को रोकने और पानी का इष्टतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी वर्षा जल निकासी और संचयन व्यवस्था की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। उन्होंने गांवों में रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की सक्रिय भागीदारी और उपकरण संचालन, मरम्मत और रखरखाव में ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए प्रशिक्षण की वकालत की।
केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने संबोधन देते हुए आर्थिक विकास के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा क्षमता के विस्तार में भारत की प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित बिजली क्षमता 308.03 गीगावॉट तक पहुंच गई है, जो देश की लगभग 560 गीगावॉट की कुल स्थापित बिजली क्षमता का 55 प्रतिशत से अधिक है।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री ने माननीय प्रधान मंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व के तहत भारत के व्यापक आर्थिक और तकनीकी परिवर्तन पर प्रकाश डाला






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