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2 Bharthana Assembly Election 2027: उत्तर प्रदेश की सियासत में इटावा की भरथना विधानसभा सीट का इतिहास काफी दिलचस्प रहा है। यह सीट सिर्फ चुनावी आंकड़ों के लिए नहीं, बल्कि बदलते राजनीतिक समीकरणों के लिए भी जानी जाती है। कभी कांग्रेस का प्रभाव रहा, फिर समाजवादी राजनीति ने यहां मजबूत पकड़ बनाई। 2007 में समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव खुद यहां से विधायक बने, लेकिन दो साल बाद हुए उपचुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने सपा को बड़ा झटका दिया। इसके बाद परिसीमन और आरक्षण ने सीट की चुनावी तस्वीर को काफी बदल दिया।
भरथना विधानसभा सीट 1957 में पहली बार अस्तित्व में आई थी। उस समय यह द्विसदस्यीय सीट थी और कांग्रेस के घासी राम और मेहरबान सिंह दोनों विधायक चुने गए थे। 1962 से यह एकल-सदस्यीय सीट बन गई। इसके बाद यहां अलग-अलग दौर में कांग्रेस, समाजवादी धारा, जनता पार्टी और अन्य दलों का प्रभाव देखने को मिला।1985 से 1996 के बीच महाराज सिंह यादव ने लगातार कई चुनाव जीते। इस दौर ने भरथना में समाजवादी राजनीति की जमीन को मजबूत किया। 1993 और 1996 में उन्होंने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर भी जीत दर्ज की।
2007 का विधानसभा चुनाव भरथना के इतिहास में खास रहा। समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह यादव खुद इस सीट से चुनाव मैदान में उतरे। उन्होंने 62,799 वोट हासिल किए और BSP के शिव प्रसाद यादव को 9,471 वोटों से हराया।हालांकि 2009 में लोकसभा चुनाव जीतने के बाद मुलायम सिंह यादव ने भरथना विधानसभा सीट छोड़ दी। इसके बाद उपचुनाव हुआ और यहीं सियासी तस्वीर बदल गई। BSP के शिव प्रसाद यादव ने SP के प्रदीप कुमार यादव को हराकर सीट पर कब्जा कर लिया। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार शिव प्रसाद यादव को 61,396 वोट मिले, जबकि SP उम्मीदवार को 45,620 वोट मिले।
2008 के परिसीमन के बाद भरथना की चुनावी संरचना में बड़ा बदलाव आया और 2012 से यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई। इस बदलाव के बाद पुराने दौर के चुनावी समीकरणों की सीधे तौर पर तुलना करना आसान नहीं है।2012 में SP की सुखदेवी वर्मा ने जीत दर्ज की। 2017 में BJP की सावित्री कठेरिया ने सपा को हराकर सीट पर कब्जा किया। 2022 में SP के राघवेंद्र कुमार सिंह ने फिर जीत दर्ज की।2022 में राघवेंद्र कुमार सिंह को 1,03,676 वोट मिले, जबकि BJP के सिद्धार्थ शंकर को 96,117 वोट मिले। जीत का अंतर 7,559 वोट रहा। BSP उम्मीदवार को 37,599 वोट मिले।अब नजर 2027 पर है। भरथना का इतिहास बताता है कि यहां राजनीतिक समीकरण स्थिर नहीं रहे हैं। 2027 में उम्मीदवार, स्थानीय मुद्दे, दलों का संगठन, सामाजिक समूहों के बीच वोट ट्रांसफर और त्रिकोणीय मुकाबले जैसे कारक चुनावी तस्वीर को प्रभावित कर सकते हैं।
रश्मि सिंह एक अनुभवी पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें हिंदी पत्रकारिता, न्यूज़ रिपोर्टिंग और डिजिटल मीडिया का व्यापक अनुभव है। उन्होंने मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है और अपने पत्रकारिता करियर में कई बड़े मीडिया संस्थानों और न्यूज़ चैनलों के साथ काम किया है।राजनीति, जनसरोकार, उत्तर प्रदेश की सियासत और समसामयिक मुद्दों पर उनकी विशेष पकड़ है। खबरों को सरल, तथ्यपरक और पाठकों के लिए रोचक अंदाज में प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है। डिजिटल पत्रकारिता के बदलते दौर में रश्मि सिंह का प्रयास है कि पाठकों तक तेज, विश्वसनीय और आसान भाषा में तथ्य आधारित खबरें पहुंचें।
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