देश के काज़ग़ी राजनीतिक दलों को मिलने वाले करोड़ों रुपये के चंदे पर बीबीसी की पड़ताल के बाद विपक्ष की कई पार्टियों और नेताओं ने प्रतिक्रिया दी थी. अब इनमें से…
बीबीसी ने तीन सप्ताह पहले 'काग़ज़ी पार्टियों' को सैकड़ों करोड़ रुपये चंदा मिलने को लेकर एक ख़ास पड़ताल प्रकाशित की थी. अब गुजरात के गांधीनगर में सीआईडी क्राइम ने ऐसी कम से कम तीन पार्टियों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की है
इस पड़ताल में हमने बताया था कि गुजरात की छह छोटी पार्टियों के पास साल 2023-24 में 1700 करोड़ रुपये का चंदा आया था, जो बीजेपी को छोड़कर सभी राष्ट्रीय पार्टियों को मिले कुल चंदे से भी ज़्यादा था
इन छह में से कम से कम तीन पार्टियों के ख़िलाफ़ आयकर विभाग के अधिकारियों की शिकायत के आधार पर एफ़आईआर दर्ज की गई है
इन राजनीतिक दलों के ख़िलाफ़ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 173 (संज्ञेय अपराध) के तहत मामला दर्ज किया गया है
ये एफ़आईआर भारतीय नेशनल जनता दल, ग़रीब कल्याण पार्टी और स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी के पदाधिकारियों के ख़िलाफ़ दर्ज हुई हैं. बीबीसी न्यूज़ हिंदी ने ये तीनों एफ़आईआर पढ़ी हैं
स्थानीय गुजराती अख़बारों के मुताबिक़, एक चौथी पार्टी, 'सत्यवादी रक्षक पार्टी' के ख़िलाफ़ भी एफ़आईआर हुई है. हालांकि, इसकी कॉपी हमारे पास नहीं है, इसलिए हम स्वतंत्र रूप से इस बात की पुष्टि नहीं कर सकते
गांधीनगर स्थित सीआईडी क्राइम के एक अधिकारी ने कहा, "इस मामले में दो पार्टी अहमदाबाद से हैं और एक गांधीनगर में है."
गिरफ़्तारी को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "अभी तक कोई गिरफ़्तारी नहीं हुई है. प्रक्रिया जारी है."
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जिन पार्टियों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज हुई हैं, उन पर धोखाधड़ी के आरोप हैं
भारतीय नेशनल जनता दल (बीएनजेडी)
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गांधीनगर से चलने वाले भारतीय नेशनल जनता दल (बीएनजेडी) नामक राजनीतिक दल से जुड़े 4 लोगों के ख़िलाफ़ सीआईडी क्राइम ने मामला दर्ज किया है
आरोप है कि इस दल ने 2019-20 से 2024-26 के बीच 1143 करोड़ रुपये से अधिक का चंदा प्राप्त किया और धोखाधड़ी की. इसकी वजह से सरकारी ख़ज़ाने को 343 करोड़ रुपये का नुक़सान हुआ है
पुलिस एफ़आईआर में दर्ज है कि "अभियुक्तों ने आपस में मिलीभगत करके फ़र्ज़ी दस्तावेज़ तैयार किए और उन्हें असली बताकर देश के चुनाव आयोग के सामने फ़र्ज़ी कन्ट्रीब्युशन रिपोर्ट (फॉर्म 24ए) पेश की, जिससे सरकारी ख़ज़ाने को 343 करोड़ रुपये का नुक़सान हुआ."
"शुरुआती जांच के दौरान यह पाया गया कि ये अभियुक्त आपराधिक साज़िश रचकर, बोगस डोनेशन और कर चोरी करने के इरादे से कमीशन एजेंटों के ज़रिए विभिन्न चंदा देने वालों से पार्टी के पांच अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफ़र कर रहे थे."
"अभियुक्त, चंदा देने वालों को फ़र्ज़ी दान पर्ची देते थे और जमा किए गए पैसे के लिए फ़र्ज़ी रसीदें बनाते थे, ताकि चंदा देने वाले आयकर अधिनियम की धारा 80जीजीबी और 80जीजीसी के तहत 100 प्रतिशत टैक्स कटौती का झूठा दावा कर सकें और लाभ उठा सकें."
जब बीबीसी ने अपनी पड़ताल के सिलसिले में बीएनजेडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेंद्रकुमार (एसवी) गजेरा से बात की थी, तो उन्होंने हमसे कहा था कि वो कुछ ग़लत नहीं कर रहे हैं
उन्होंने कहा था, "पार्टी के अकाउंट से नकद नहीं निकाला जा सकता. पैसा कहां से आ रहा है, जा रहा है, ये सब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को मालूम ही होगा."
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स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी
स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी पर 2023 से 2025 के बीच 519 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और विश्वासघात का आरोप है
उन पर आरोप हैं कि फ़र्ज़ी दस्तावेज़ बनाकर और उन्हें असली बताकर भारतीय चुनाव आयोग को फ़ंड संबंधी झूठी रिपोर्ट सौंपी जिससे सरकारी ख़ज़ाने को 155 करोड़ रुपये का नुक़सान हुआ, जो उन्हें प्राप्त धनराशि का लगभग 30 प्रतिशत है
इस पार्टी के पदाधिकारियों और सहयोगियों के ख़िलाफ़ वित्तीय धोखाधड़ी और विश्वासघात को लेकर एफ़आईआर दर्ज की गई है
स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी का कार्यालय अहमदाबाद के नरोडा क्षेत्र में महावीर नगर कल्याण मिल के सामने, दुकान संख्या 2 में स्थित है
स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी के पदाधिकारियों में टैक्स कन्सल्टेंट मेहुलकुमार महेशकुमार खत्री, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र परसोत्तम तिवारी और चार्टर्ड अकाउंटेंट मयूर सिंह राठौड़ के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है
एफ़आईआर में दर्ज है कि टैक्स कन्सल्टेंट मेहुलकुमार महेशकुमार खत्री के मोबाइल और लैपटॉप से राजनीतिक चंदा दाताओं की एक सूची मिली, जिसमें वह चंदे की रकम लौटाते थे, इसमें स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी को झूठे डोनेशन मिलते थे
एफ़आईआर के मुताबिक़, "प्रारंभिक जांच के दौरान और अभियुक्त से लिए गए बयानों के आधार पर, एक बड़े और संगठित फ़र्ज़ी राजनीतिक चंदा घोटाले की जानकारी मिली."
"इसमें स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी के खाते में चेक या बैंकिंग के ज़रिए देश के विभिन्न बड़े करदाताओं से राजनीतिक चंदा प्राप्त किया जाता था. इस चंदे के आधार पर करदाताओं को आयकर अधिनियम की धारा 80जीजीबी के तहत टैक्स से छूट दी जाती थी. 8 से 9 प्रतिशत कमीशन काटने के बाद शेष राशि मूल दानदाताओं को नकद में लौटा दी जाती थी."
एफ़आईआर में दर्ज है कि पार्टी अध्यक्ष सुरेंद्र तिवारी ने स्वीकार किया है कि पार्टी का गठन केवल कमीशन कमाने और फ़र्ज़ी एंट्रियां बनाने के लिए किया गया था, ज़मीनी स्तर पर उनकी कोई राजनीतिक गतिविधि नहीं थी
सुरेंद्र तिवारी की पार्टी को 2023-24 में 219 करोड़ रुपये का चंदा आया था. सुरेंद्र तिवारी ने हमसे बातचीत में कहा था कि उन्हें पार्टी में आई धनराशि के बारे में जानकारी नहीं थी और उनके सीए मयूर सिंह ने उन्हें धोखे में रखा था
मयूर सिंह ने इन आरोपों को नकारा था और कहा था कि वो पार्टी नहीं चलाते, बल्कि सिर्फ़ चुनाव आयोग में अलग-अलग पार्टियों के लिए टैक्स फ़ाइलिंग का काम करते हैं, जिनमें न्यू इंडिया यूनाइटेड पार्टी का भी नाम शामिल था
उन्होंने कहा था, "सारे वही लोग हैं, समझो न, घर में ही हैं पार्टियां."
सुरेंद्र तिवारी, मयूर सिंह और मेहुल कुमार समेत स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई हैं
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ग़रीब कल्याण पार्टी
अहमदाबाद के नाना चिलोडा इलाक़े में स्थित श्रीनाथ शॉपिंग सेंटर के ए- 203 में चल रही ग़रीब कल्याण पार्टी और उससे संबंधित 8 लोगों के ख़िलाफ़ सीआईडी क्राइम, अहमदाबाद ने मामला दर्ज किया है
एफ़आईआर के मुताबिक़, पार्टी पर आरोप है कि उसने 2022 से 2026 के बीच 206 करोड़ रुपये से अधिक की फ़ंडिंग प्राप्त की और धोखाधड़ी की. इसके नतीजे में सरकारी ख़ज़ाने को 62 करोड़ रुपये से अधिक का नुक़सान हुआ, जो कि प्राप्त धनराशि का लगभग 30 प्रतिशत है
इस पार्टी और इसके पदाधिकारियों एवं सहयोगियों के ख़िलाफ़ वित्तीय विश्वासघात और धोखाधड़ी की एफ़आईआर दर्ज की गई है
एफ़आईआर में दर्ज है कि आयकर विभाग को आंकड़ों के हवाले से सूचना मिली थी कि ग़रीब कल्याण पार्टी फ़र्ज़ी चंदा ले रही है, इसी आधार पर पार्टी कार्यालय और विभिन्न पदाधिकारियों के परिसरों में तलाशी अभियान चलाया गया
"शुरुआती जांच के दौरान और अभियुक्तों के बयानों के आधार पर, एक बड़े और संगठित फ़र्ज़ी राजनीतिक चंदा घोटाले की जानकारी मिली. इस घोटाले में पार्टी के खाते में चेक या बैंकिंग माध्यमों से देश के सबसे बड़े करदाताओं से अभियुक्त राजनीतिक चंदा हासिल कर रहे थे."
एफ़आईआर के मुताबिक़, "इन चंदों के आधार पर करदाता आयकर अधिनियम की धारा 80जीजीबी के तहत टैक्स से छूट हासिल कर रहे थे. इसके बाद धन को अलग-अलग चरणों में दो फ़र्ज़ी कंपनियों (मेसर्स कृष्णा एंटरप्राइजेज़ और मेसर्स जलाराम एंटरप्राइजेज़) के खातों में ट्रांसफ़र किया गया. अंत में, फ़ंड में से 5 से 7 प्रतिशत कमीशन काट लिया गया और शेष राशि मूल दानदाताओं को नकद वापसी के रूप में लौटा दी गई."
एफ़आईआर में कहा गया है कि पार्टी के अध्यक्ष नीरज क्षत्रिय और कोषाध्यक्ष धीरज क्षत्रिय ने स्वीकार किया है कि पार्टी का गठन केवल कमीशन कमाने और फ़र्ज़ी एंट्री बनाने के लिए किया गया था और ज़मीनी स्तर पर उनका कोई राजनीतिक संबंध नहीं है
"देश के विभिन्न करदाताओं से चेक या आरटीजीएस के माध्यम से चंदा प्राप्त किया गया. बदले में, उन्हें फ़र्ज़ी चंदा रसीदें दी गईं, ताकि करदाता आयकर अधिनियम की 80जीजीबी के तहत अपनी आय से 100 प्रतिशत कटौती का दावा करके टैक्स छूट हासिल कर सकें. जांच में पता चला कि ग़रीब कल्याण पार्टी ने कोई भी वैध वाउचर, बिल या खाते नहीं रखे थे."
ग़रीब कल्याण पार्टी को 2023-24 में 138 करोड़ रुपये का चंदा मिला था. जब बीबीसी की टीम इस पार्टी को ढूंढते-ढूंढते अहमदाबाद पहुंची तो उसका ऑफ़िस बंद था
हम पार्टी के अध्यक्ष नीरज कुमार क्षत्रिय के घर भी गए थे, लेकिन वो वहां भी नहीं मिले थे
अब नीरज कुमार, उनके भाई धीरज कुमार और छह अन्य लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है




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