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3 महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बापू को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके स्वदेशी, स्वावलंबन, स्वच्छता और ग्राम स्वराज के विचारों को आज भी प्रासंगिक बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बापू का चरखा केवल सूत कातने का साधन नहीं, बल्कि भारत के स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का प्रतीक था। उत्तर प्रदेश की ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ योजना इसी स्वदेशी भावना को आगे बढ़ाते हुए स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने का काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी ने स्वच्छता, स्वदेशी और स्वावलंबन के जरिए समाज को आत्मनिर्भर बनाने का संदेश दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वच्छ भारत से आत्मनिर्भर भारत तक इन विचारों को नए स्वरूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत देश में 12 करोड़ से अधिक परिवारों के घरों में शौचालय बनाए गए, जिससे स्वच्छता के साथ नारी गरिमा और जनजागरूकता को भी मजबूती मिली।सीएम योगी ने कहा कि गांधी जी के ग्राम स्वराज के सपने को साकार करने के लिए गांवों को स्वावलंबन का आधार बनाया जा रहा है। प्रदेश के गांवों में ग्राम सचिवालयों के माध्यम से लोगों को स्थानीय स्तर पर विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और रोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि गांवों का सशक्तीकरण ही आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव बन सकता है।मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में गांधी जी के दक्षिण अफ्रीका प्रवास और रंगभेद के खिलाफ उनके संघर्ष का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत लौटने के बाद गांधी जी ने स्वतंत्रता आंदोलन को व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप दिया। उनके नेतृत्व में आंदोलन गांव-गांव तक पहुंचा और समाज के हर वर्ग ने स्वतंत्रता की लड़ाई में भागीदारी की।इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को भी उनकी 122वीं जयंती पर नमन किया। उन्होंने कहा कि गांधी जी ने देश को स्वदेशी और स्वावलंबन का मंत्र दिया, जबकि शास्त्री जी का ‘जय जवान-जय किसान’ का उद्घोष राष्ट्रीय सुरक्षा और खाद्यान्न आत्मनिर्भरता का आधार बना। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक ओर जवानों ने सीमाओं की रक्षा की, तो दूसरी ओर किसानों ने देश को खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।मुख्यमंत्री ने कहा कि जो समाज अपने पूर्वजों और महापुरुषों के आदर्शों के प्रति कृतज्ञ रहता है और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाता है, उसका भविष्य उज्ज्वल होता है। आज का भारत स्वच्छता, स्वदेशी, स्वावलंबन और ग्राम विकास के जरिए बापू के सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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