सितंबर 2026: प्रमुख बांग्लादेशी हिंदू नेता चिन्मय कृष्ण दास की मां की अपने बेटे को देखने की अंतिम इच्छा पूरी किए बिना गुरुवार को मृत्यु हो गई, जो…

सितंबर 2026: प्रमुख बांग्लादेशी हिंदू नेता चिन्मय कृष्ण दास की मां की जेल में बंद अपने बेटे को देखने की अंतिम इच्छा पूरी किए बिना गुरुवार को मृत्यु हो गई।

इकहत्तर वर्षीय संध्या रानी धर का चटगांव जिले के हथज़ारी में श्री श्री पुंडरिका धाम आश्रम में निधन हो गया, जहां उनका बेटा कई वर्षों से रह रहा था।

कैंसर से पीड़ित होने के बाद संध्या रानी का अस्पताल में इलाज चल रहा था। हालाँकि, उन्होंने कथित तौर पर अस्पताल छोड़ने और आश्रम में अपने अंतिम दिन बिताने का फैसला किया। उनके परिवार ने चिन्मय कृष्ण दास के लिए अस्थायी पैरोल की भी मांग की थी ताकि वह अपनी बीमार मां से मिल सकें

परिवार का अनुरोध चटगांव के उपायुक्त और जेल प्रबंधन समिति के पदेन अध्यक्ष मोहम्मद जाहिदुल इस्लाम मिया को सौंपा गया था। हालाँकि, अधिकारियों ने कथित तौर पर परिवार को सूचित किया कि किसी बीमार रिश्तेदार से मिलने के लिए किसी कैदी को पैरोल देने का कोई प्रावधान नहीं है। चटगांव के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट सैयद महबुबुल हक ने कहा कि किसी रिश्तेदार की मृत्यु की स्थिति में पैरोल पर विचार किया जा सकता है, लेकिन केवल बीमार परिवार के सदस्य से मिलने के लिए नहीं।

अपनी मां की मृत्यु की पुष्टि करते हुए, चिन्मय के भाई अंजन कुमार धर ने कहा कि परिवार इस बात से टूट गया है कि चिन्मय अपनी मां से उनके जीवित रहते हुए नहीं मिल सके।

एक अन्य भाई, रंजन कुमार धर ने कहा कि परिवार अपनी मां के शव को हथज़ारी उपजिला स्वास्थ्य परिसर में ले जाएगा और उनकी मृत्यु और आवश्यक चिकित्सा दस्तावेजों के आधार पर चिन्मय के लिए पैरोल की मांग करेगा। उनका अंतिम संस्कार पुंडरीक धाम में किए जाने की उम्मीद है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, संध्या रानी अपने बेटे की लंबी कारावास, बार-बार जमानत से इनकार और उसके स्वास्थ्य से संबंधित रिपोर्टों से बहुत व्यथित थी। परिवार को उम्मीद थी कि चिन्मय की हालिया जमानत कार्यवाही से आखिरकार उनकी रिहाई हो सकती है। बांग्लादेश सैममिलिटो सनातनी जागरण जोत के प्रवक्ता चिन्मय कृष्ण दास दो मामलों में जमानत हासिल करने के बावजूद हिरासत में हैं। कथित तौर पर उनके खिलाफ लंबित दो अन्य मामलों के कारण उनकी रिहाई रोक दी गई है

उन्हें 25 नवंबर, 2024 को ढाका में गिरफ्तार किया गया था और अगले दिन चैटोग्राम अदालत द्वारा उनकी जमानत याचिका खारिज करने के बाद जेल भेज दिया गया था। 11 दिसंबर को कोर्ट ने फिर जमानत देने से इनकार कर दिया

हाल ही में, बांग्लादेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति केएम जाहिद सरवर और न्यायमूर्ति शेख अबू ताहेर की पीठ ने दो अलग-अलग जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के बाद उन्हें जमानत दे दी। हालाँकि, अन्य मामलों के कारण वह अभी भी सलाखों के पीछे हैं