बड़वानी। दशहरा पर्व को लेकर बड़वानी में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। दशहरा मैदान में इस बार 60 फीट ऊंचे रावण और 45-45 फीट ऊंचे कुंभकरण व मेघनाद के पुतलों का दह…

बड़वानी। दशहरा पर्व को लेकर बड़वानी में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। दशहरा मैदान में इस बार 60 फीट ऊंचे रावण और 45-45 फीट ऊंचे कुंभकरण व मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाएगा। पर्व के दौरान भगवान श्रीराम की शोभायात्रा, इलेक्ट्रॉनिक आतिशबाजी और रावण दहन मुख्य आकर्षण रहेंगे। इस बार आयोजन के साथ शहरवासियों को स्वच्छता और प्लास्टिक मुक्त बड़वानी का संदेश भी दिया जाएगा

मंगलवार शाम मां कालिका माता मंदिर से भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और हनुमान की शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा दशहरा मैदान पहुंचेगी, जहां विधि-विधान से रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन होगा। नगर पालिका की ओर से इलेक्ट्रॉनिक आतिशबाजी की भी व्यवस्था की गई है

आयोजन की तैयारियों का जायजा लेने नगर पालिका अध्यक्ष अश्विनी निक्कू चौहान और सीएमओ सोनाली शर्मा ने कर्मचारियों के साथ दशहरा मैदान का निरीक्षण किया। संभावित भीड़ को देखते हुए मैदान में बैरिकेडिंग कराई गई है, ताकि लोगों की आवाजाही व्यवस्थित रहे और किसी तरह की अव्यवस्था न हो

नगर पालिका अध्यक्ष अश्विनी निक्कू चौहान ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी दशहरा उत्साह के साथ मनाया जाएगा। आयोजन में बड़वानी के साथ आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है। उन्होंने नागरिकों से आपसी भाईचारे के साथ शांतिपूर्वक त्योहार मनाने की अपील की

नगर पालिका अध्यक्ष ने शहरवासियों से स्वच्छता बनाए रखने और प्लास्टिक का इस्तेमाल छोड़ने का आग्रह किया। उन्होंने बाजार जाते समय जूट या कपड़े का थैला उपयोग करने की सलाह दी। साथ ही घरों और दुकानों से निकलने वाले गीले व सूखे कचरे को अलग-अलग डस्टबिन में रखने और नगर पालिका के कचरा वाहन को देने की अपील की

दशहरा मैदान में पुतलों को अंतिम रूप देने के लिए 15 कारीगरों की टीम जुटी रही। कलाकार हसीर मंसूरी और आशीष सवनेर के अनुसार, पुतलों के चेहरे, बाल और अन्य बारीकियों को आकर्षक बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इनके निर्माण में लोहे का कम इस्तेमाल करते हुए बांस और लकड़ी का अधिक उपयोग किया गया है। बड़वानी में दशहरा आयोजन को लेकर तैयारियां पूरी हैं। धार्मिक उत्सव के साथ सुरक्षा, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने पर भी जोर दिया जा रहा है