प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में माफिया के खिलाफ कार्रवाई और विकास के मुद्दे पर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। प्रयागराज का कसारी-मसारी इलाका, जिसका नाम लंबे समय त…

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में माफिया के खिलाफ कार्रवाई और विकास के मुद्दे पर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। प्रयागराज का कसारी-मसारी इलाका, जिसका नाम लंबे समय तक माफिया अतीक अहमद के प्रभाव और खौफ से जोड़कर चर्चा में रहा, अब नई पहचान के साथ विकसित करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐलान किया है कि कसारी-मसारी को अब ‘कृष्णपुरी’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इसी इलाके में माफिया से मुक्त कराई गई जमीन पर 602 आवासों के निर्माण के लिए भूमि पूजन किया गया है। सरकार इसे गरीबों को घर उपलब्ध कराने और इलाके की छवि बदलने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है।

प्रयागराज का कसारी-मसारी इलाका अतीक अहमद और उसके परिवार से जुड़े घटनाक्रमों के कारण लंबे समय तक सुर्खियों में रहा। अतीक अहमद का नाम उत्तर प्रदेश के चर्चित माफिया चेहरों में शामिल रहा। उसके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज थे और उस पर अवैध वसूली समेत कई गंभीर आरोप लगे थे।

बताया जाता है कि इलाके में एक जमीन पर अतीक अहमद का अस्तबल था, जहां उसके घोड़े रखे जाते थे। अप्रैल 2023 में अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की प्रयागराज में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दोनों को कसारी-मसारी के कब्रिस्तान में दफनाया गया था। इन घटनाओं के चलते भी यह इलाका लगातार चर्चा में बना रहा।

बीजेपी के मुख्य वक्ता राकेश प्रताप सिंह ने दावा किया कि अतीक के प्रभाव का ऐसा माहौल था कि उसके आवास पर पहुंचने के दौरान आसपास की दुकानों के शटर बंद हो जाते थे। हालांकि, यह दावा बीजेपी नेता की ओर से किया गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कसारी-मसारी की पहचान बदलने और इसे कृष्णपुरी के रूप में विकसित करने की घोषणा की। यहां 602 आवासों के निर्माण के लिए भूमि पूजन किया गया है। सरकार का कहना है कि माफिया से मुक्त कराई गई जमीन का इस्तेमाल गरीब परिवारों को आवास उपलब्ध कराने के लिए किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, “कसारी-मसारी अब नहीं होगा, अब ये कृष्णपुरी के रूप में हम इसे विकसित करेंगे! कोई रियायत नहीं होगी, माफियामुक्त यूपी बनेगा, उसके परिणाम दिखाई दे रहे हैं।”

सरकार इस पहल को माफिया के प्रभाव से मुक्त कराई गई जमीन पर जनकल्याणकारी परियोजना शुरू करने और विकास को प्राथमिकता देने के रूप में पेश कर रही है।

बीजेपी का कहना है कि कसारी-मसारी में आवासों का निर्माण और कृष्णपुरी के रूप में विकास उस बदलाव का प्रतीक है, जिसमें कथित माफिया प्रभाव वाली जमीन का उपयोग आम लोगों के हित में किया जा रहा है। पार्टी इसे माफियामुक्त उत्तर प्रदेश के अभियान से जोड़ रही है।

दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी ने इस घोषणा पर सवाल उठाए हैं। सपा प्रवक्ता फखरुल हसन ने आरोप लगाया कि बीजेपी अपने विरोधियों को माफिया बताती है, जबकि अपने समर्थकों को बाहुबली कहती है। पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनाव में जनता की ओर से जवाब दिए जाने का दावा भी किया है।

इस तरह 602 आवासों के निर्माण की परियोजना के साथ कसारी-मसारी की नई पहचान को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। अब यह देखना अहम होगा कि कृष्णपुरी के रूप में प्रस्तावित विकास जमीन पर किस तरह आगे बढ़ता है और इसका स्थानीय लोगों को कितना लाभ मिलता है।