दिल्ली हाईकोर्ट ने जेल में बंद शरजील इमाम की उस याचिका पर तिहाड़ जेल प्रशासन से जवाब मांगा है, जिसमें उन्होंने अपनी पीएचडी पूरी करने के लिए जरूरी शोध सामग्री त…
दिल्ली हाईकोर्ट ने जेल में बंद शरजील इमाम की उस याचिका पर तिहाड़ जेल प्रशासन से जवाब मांगा है, जिसमें उन्होंने अपनी पीएचडी पूरी करने के लिए जरूरी शोध सामग्री तक पहुंच दिए जाने की मांग की है. मामले की सुनवाई सोमवार को जस्टिस संजीव नरूला की अदालत में हुई. अदालत ने तिहाड़ प्रशासन से इस संबंध में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है. मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी
सुनवाई के दौरान शरजील इमाम की ओर से अदालत को बताया गया कि वह जनवरी 2020 से हिरासत में हैं. जब उन्हें गिरफ्तार किया गया था, उस समय वह अपनी पीएचडी के अंतिम वर्ष में थे. उनके वकील ने अदालत को बताया कि शोध कार्य से जुड़ा उनका सिनॉप्सिस विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से मंजूर हो चुका है
याचिका में कहा गया है कि जेल में रहते हुए अपनी पीएचडी का काम पूरा करने के लिए इमाम को उनके शोध से जुड़ी सामग्री देखने की अनुमति दी जाए. इसके लिए इंटरनेट या वाई-फाई से जुड़े कंप्यूटर के बजाय ऐसा कंप्यूटर इस्तेमाल करने का प्रस्ताव दिया गया है, जो इंटरनेट से कनेक्टेड न हो. शोध सामग्री पेन ड्राइव के जरिए उपलब्ध कराने की मांग की गई है
याचिका के मुताबिक, जेल प्रशासन की निगरानी में इमाम को कंप्यूटर पर यह सामग्री देखने और अपने शोध कार्य से संबंधित काम करने की अनुमति दी जा सकती है. इस व्यवस्था के जरिए जेल की सुरक्षा से जुड़े नियमों को ध्यान में रखते हुए उन्हें अपनी अकादमिक गतिविधि जारी रखने का अवसर देने की मांग की गई है
अदालत को बताया गया कि पेन ड्राइव में करीब 2,132 फाइलें मौजूद हैं. इनमें शोध से जुड़े लेख, किताबें और ऐतिहासिक दस्तावेजों के स्क्रीनशॉट शामिल हैं. इमाम की ओर से कहा गया कि यह सामग्री उनके शोध कार्य के लिए जरूरी है और इसके बिना पीएचडी पूरी करने में कठिनाई हो रही है
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश विशेष लोक अभियोजक ने इस मांग को लेकर किसी आपत्ति की बात नहीं कही. अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि ट्रायल कोर्ट के सामने भी पुलिस ने इस अनुरोध का विरोध नहीं किया था. उनके मुताबिक, इस मामले में आपत्ति जेल प्रशासन की ओर से की गई थी
इस पर हाईकोर्ट ने तिहाड़ जेल प्रशासन से पूरे मामले पर अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है. अदालत अब जेल प्रशासन की स्थिति रिपोर्ट के आधार पर मामले में आगे विचार करेगी. फिलहाल अदालत ने इमाम को शोध सामग्री उपलब्ध कराने को लेकर कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया है
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जेल में रहते हुए किसी बंदी को शैक्षणिक या शोध कार्य के लिए डिजिटल सामग्री उपलब्ध कराने का सवाल जेल की सुरक्षा और बंदी की अकादमिक जरूरतों, दोनों से जुड़ा है. याचिका में जिस व्यवस्था का प्रस्ताव रखा गया है, उसमें इंटरनेट और वाई-फाई की सुविधा के बिना कंप्यूटर के इस्तेमाल की बात कही गई है और सामग्री को जेल अधिकारियों की निगरानी में देखने का अनुरोध किया गया है
शरजील इमाम की ओर से अदालत में यह भी बताया गया कि उनका शोध कार्य पहले से निर्धारित अकादमिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहा था और गिरफ्तारी के समय वह पीएचडी के अंतिम चरण में थे. ऐसे में शोध सामग्री तक सीमित और निगरानी में पहुंच दिए जाने की मांग की गई है
अब इस मामले में तिहाड़ जेल प्रशासन की रिपोर्ट अहम होगी. रिपोर्ट में जेल प्रशासन को यह बताना होगा कि पेन ड्राइव में मौजूद सामग्री को बंदी तक किस तरह उपलब्ध कराया जा सकता है और इस संबंध में जेल के नियमों के तहत क्या स्थिति है. अदालत अगली सुनवाई में इन पहलुओं पर विचार करेगी.मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को निर्धारित की गई है. उस दिन तिहाड़ जेल प्रशासन की स्थिति रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट आगे की कार्यवाही पर फैसला करेगा





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