Mountain Products: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में तैयार होने वाले पारंपरिक और स्थानीय उत्पाद अब राज्य की सीमाओं से बाहर पहचान बना रहे हैं. महिला स्वयं सहायता स…

Mountain Products: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में तैयार होने वाले पारंपरिक और स्थानीय उत्पाद अब राज्य की सीमाओं से बाहर पहचान बना रहे हैं. महिला स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के जरिए उन्हें एक मंच पर ला रही है. इसका उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को बेहतर पैकेजिंग, गुणवत्ता और ब्रांडिंग के साथ बड़े बाजार तक पहुंचाना है

‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ की शुरुआत उत्तराखंड ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 के दौरान की गई थी. इससे पहले राज्य के स्थानीय उत्पाद हिमाद्री, हिलास और ग्राम्य-श्री जैसे अलग-अलग नामों से बाजार में पहुंचते थे. अब इन्हें एक ही अंब्रेला ब्रांड के तहत बाजार में पेश किया जा रहा है. इस पहल के जरिए प्राकृतिक उत्पादों, हस्तशिल्प और पारंपरिक वस्तुओं को आधुनिक पैकेजिंग और गुणवत्ता मानकों के साथ ग्राहकों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है. इससे स्थानीय महिला समूहों और कारीगरों को अपने उत्पादों के लिए बड़ा बाजार मिलने की उम्मीद है

‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ में स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों की गुणवत्ता और प्रामाणिकता पर जोर दिया जाता है. सामग्री के चयन से लेकर उत्पादन और पैकेजिंग तक प्रक्रिया में पारदर्शिता रखने की बात कही गई है. पर्यावरण के अनुकूल और पारंपरिक तरीकों से उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है.इस मॉडल का एक अहम पहलू यह है कि स्थानीय उत्पादों की बिक्री से होने वाला आर्थिक लाभ ग्रामीण समुदायों और महिला स्वयं सहायता समूहों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है. इससे गांवों में रोजगार और आय के नए अवसर पैदा करने की कोशिश की जा रही है

उत्तराखंड सरकार ने ‘एक जिला-दो उत्पाद’ (ODTP) नीति के तहत सभी 13 जिलों के प्रमुख उत्पादों को बढ़ावा देने की योजना बनाई है. इसके तहत अलग-अलग जिलों के स्थानीय उत्पादों को बाजार और ब्रांडिंग से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है

अल्मोड़ा: बाल मिठाई और ताम्र शिल्पहरिद्वार: शहद और मूंज ग्रास उत्पादबागेश्वर: ट्वीड और कीवी उत्पादचमोली: हथकरघा और हर्बल मेडिसिनचम्पावत: लोहे के उत्पाद और हस्तनिर्मित बेकरी उत्पाददेहरादून: गुलाब जल और मशरूम उत्पादनैनीताल: फल प्रसंस्करण और लकड़ी की नक्काशीपौड़ी: मैंथा ऑयल और ऐपण हस्तशिल्पऊधम सिंह नगर: मूंज ग्रास और मक्के के उत्पादपिथौरागढ़: मुन्स्यारी राजमा और ऊनी कालीनरुद्रप्रयाग: चौलाई के उत्पाद और मंदिर अनुकृति हस्तशिल्पउत्तरकाशी: सेब के उत्पाद और लाल चावलटिहरी: पनीर और टिहरी नथ

उत्तराखंड के कई पारंपरिक हस्तशिल्प और उत्पादों को भौगोलिक संकेत यानी GI टैग भी मिला है. इससे इन उत्पादों की पहचान और प्रामाणिकता को स्थापित करने में मदद मिलती है. इनमें भोटिया डैन और थुलमा कंबल, उत्तराखंड ऐपण, उत्तराखंड लिखाई, ताम्र शिल्प, रिंगाल उत्पाद, रामन मुखौटे, बिछुआ फाइबर से बने उत्पाद, कुमाऊंनी रंगवाली पिछौड़ा और नैनीताल की मोमबत्तियां शामिल हैं

उत्तराखंड में पर्यटन को स्थानीय उत्पादों से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माणा गांव से अपील की थी कि लोग जब भी पर्यटन के लिए जाएं, तो अपने कुल यात्रा बजट का कम से कम 5 प्रतिशत स्थानीय उत्पादों की खरीद पर खर्च करें.इस सोच के पीछे स्थानीय कारीगरों, ग्रामीणों और छोटे कारोबारियों को सीधे पर्यटन अर्थव्यवस्था से जोड़ना है. स्थानीय उत्पादों की खरीद बढ़ने से पहाड़ के पारंपरिक हुनर को बाजार मिलने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के अवसर बढ़ाने में मदद मिल सकती है