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5 जिस आवाज में पर्दे पर गुस्से की गरज थी, जिस अंदाज और अभिनय ने दशकों तक करोड़ों दर्शकों के दिलों पर राज किया, वह आवाज अब हमेशा के लिए खामोश हो गई। दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। गुरुवार, 8 अक्टूबर की सुबह गोवा स्थित उनके आवास पर तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। अस्पताल के मुताबिक, उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया था।नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आते ही फिल्म जगत से लेकर राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र तक शोक की लहर दौड़ गई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी दिग्गज अभिनेता के निधन पर गहरा दुख जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी और इसे भारतीय सिनेमा के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर नाना पाटेकर को याद करते हुए कहा कि प्रख्यात अभिनेता, रंगमंच के सशक्त कलाकार और संवेदनशील समाजसेवी का निधन कला जगत की अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर ने अपने विलक्षण अभिनय से भारतीय सिनेमा को समृद्ध किया और सामाजिक सरोकारों के जरिए समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को भी व्यक्त किया।मुख्यमंत्री ने दिवंगत अभिनेता की आत्मा की शांति के लिए प्रभु श्रीराम से प्रार्थना की। साथ ही उन्होंने शोकाकुल परिजनों और नाना पाटेकर के प्रशंसकों को इस कठिन समय में दुख सहने की शक्ति देने की कामना की।

नाना पाटेकर का उत्तर प्रदेश से भी एक खास जुड़ाव रहा। हाल ही में वह लखनऊ में उत्तर प्रदेश पुलिस के थीम सॉन्ग ‘खाकी का सितारा’ की लॉन्चिंग से जुड़े कार्यक्रम में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने प्रदेश की कानून-व्यवस्था की सराहना की थी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की तारीफ की थी।नाना पाटेकर ने कहा था कि इतनी बड़ी आबादी वाले राज्य में कानून-व्यवस्था संभालना आसान काम नहीं है। इसके लिए मजबूत नेतृत्व, स्पष्ट नीति और दृढ़ इच्छाशक्ति की जरूरत होती है। उनके इस बयान की उस समय काफी चर्चा हुई थी।

नाना पाटेकर सिर्फ अपनी दमदार अदाकारी के लिए ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों के लिए भी जाने जाते थे। उनकी पहचान एक ऐसे कलाकार के तौर पर रही, जिसने पर्दे पर अलग-अलग तरह के किरदारों को जीवंत किया और वास्तविक जीवन में भी सामाजिक मुद्दों से जुड़कर काम किया।हिंदी और मराठी सिनेमा में उन्होंने कई यादगार भूमिकाएं निभाईं। ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अब तक छप्पन’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘खामोशी’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय ने अलग छाप छोड़ी। उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों सहित कई सम्मान मिले और वर्ष 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया था।

नाना पाटेकर को गुरुवार तड़के गोवा स्थित उनके आवास पर बेहोशी की हालत में पाया गया था। अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।चूंकि उन्हें अस्पताल में ‘बrought dead’ स्थिति में लाया गया था और वह वहां पंजीकृत मरीज नहीं थे, इसलिए अस्पताल ने मामले को मेडिको-लीगल केस के तौर पर दर्ज किया और पुलिस को सूचना दी। इसके बाद उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए गोवा मेडिकल कॉलेज भेजा गया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मृत्यु से जुड़ी आधिकारिक चिकित्सकीय जानकारी स्पष्ट होगी।नाना पाटेकर के निधन से भारतीय सिनेमा ने एक ऐसा कलाकार खो दिया है, जिसकी आवाज, संवाद अदायगी और अभिनय की तीव्रता आने वाली पीढ़ियों तक याद की जाएगी।

रश्मि सिंह एक अनुभवी पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें हिंदी पत्रकारिता, न्यूज़ रिपोर्टिंग और डिजिटल मीडिया का व्यापक अनुभव है। उन्होंने मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है और अपने पत्रकारिता करियर में कई बड़े मीडिया संस्थानों और न्यूज़ चैनलों के साथ काम किया है।राजनीति, जनसरोकार, उत्तर प्रदेश की सियासत और समसामयिक मुद्दों पर उनकी विशेष पकड़ है। खबरों को सरल, तथ्यपरक और पाठकों के लिए रोचक अंदाज में प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है। डिजिटल पत्रकारिता के बदलते दौर में रश्मि सिंह का प्रयास है कि पाठकों तक तेज, विश्वसनीय और आसान भाषा में तथ्य आधारित खबरें पहुंचें।

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