केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन कर रही हाई लेवल कमेटी की ओर से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से धर्म के आधार पर अलग-अलग आंकड़े म…

केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन कर रही हाई लेवल कमेटी की ओर से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से धर्म के आधार पर अलग-अलग आंकड़े मांगे जाने को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है. कांग्रेस ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और समिति के कामकाज पर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि समिति का एजेंडा पहले से तय नजर आता है. उन्होंने इसे लेकर 'प्री-कॉन्सीव्ड बायस' यानी पहले से बनी धारणा होने की बात कही है

दरअसल, रिपोर्ट के मुताबिक गृह मंत्रालय के तहत काम कर रही हाई लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंजेज ने राज्यों से पिछले 15 वर्षों का धर्मवार और जिलावार डेटा मांगा है. इसमें जन्म पंजीकरण, स्कूलों में नामांकन, वाहनों के रजिस्ट्रेशन और संपत्ति से जुड़े लेनदेन जैसे आंकड़े शामिल हैं. इसके अलावा धार्मिक स्थलों से जुड़ी जानकारी और आधार, वोटर आईडी तथा राशन कार्ड के रजिस्ट्रेशन में अचानक हुई बढ़ोतरी से संबंधित आंकड़े भी मांगे गए हैं

रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पिछले 15 वर्षों में जनसंख्या और धार्मिक संरचना में हुए बदलावों की जानकारी मांगी है. इसमें खास तौर पर जिलों, औद्योगिक क्षेत्रों और सीमा से लगे जिलों में हुए बदलावों से जुड़ा डेटा शामिल है. समिति ने राज्यों से जन्म पंजीकरण का धर्मवार और जिलावार विवरण भी मांगा है. इसमें सामान्य जन्म पंजीकरण के साथ 21 दिनों की निर्धारित अवधि के बाद हुए विलंबित पंजीकरण और संदिग्ध फर्जी पंजीकरण से संबंधित जानकारी भी शामिल है. इसके अलावा, राज्यों से मंदिर, मस्जिद और चर्च जैसे धार्मिक ढांचों से संबंधित उपलब्ध सर्वे और आंकड़े भी मांगे गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक आधार, वोटर कार्ड और राशन कार्ड के रजिस्ट्रेशन में अचानक हुई बढ़ोतरी की जानकारी भी समिति के सवालों का हिस्सा है

समिति ने परिवहन विभाग से भी धर्म के आधार पर वाहनों के रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जानकारी मांगी है. सीमा से लगे जिलों में कमर्शियल वाहनों के लाइसेंस में अचानक हुई वृद्धि से संबंधित जानकारी भी मांगी गई है. इसके साथ ही आदिवासी क्षेत्रों में संपत्ति के हस्तांतरण, जमीन के अवैध हस्तांतरण और कब्जे से संबंधित आंकड़ों की जानकारी मांगी गई है. आदिवासी क्षेत्रों में पिछले 15 वर्षों के दौरान स्थापित सरकारी, सहायता प्राप्त, निजी और धार्मिक शिक्षण संस्थानों का विवरण भी मांगे जाने की बात सामने आई है

रिपोर्ट के मुताबिक समिति ने अनुसूचित जनजाति समुदायों में कथित धार्मिक धर्मांतरण से जुड़े खुफिया आकलन और आयोगों की रिपोर्ट भी मांगी है. इसके अलावा राज्यों से अवैध प्रवासियों की पहचान और स्थापित बस्तियों में उनकी मौजूदगी का पता लगाने के लिए स्थानीय प्रशासन की ओर से इस्तेमाल किए जाने वाले तकनीकी, खुफिया या सामुदायिक तंत्र की जानकारी मांगी गई है. समिति ने चालू डिटेंशन सेंटरों और अवैध प्रवासियों के निर्वासन या प्रत्यावर्तन से जुड़ी जानकारी भी मांगी है

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस रिपोर्ट को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा करते हुए समिति के उद्देश्य पर सवाल उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि समिति के सवालों से उसकी पहले से बनी धारणाएं स्पष्ट होती हैं और दावा किया कि उसकी रिपोर्ट पहले ही तैयार हो चुकी होगी. यह कांग्रेस नेता का राजनीतिक आरोप है; उपलब्ध रिपोर्टों में समिति की अंतिम रिपोर्ट जारी होने की जानकारी नहीं है

गृह मंत्रालय ने 26 मई 2026 को हाई लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंजेज का गठन किया था. समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नवलकर कर रहे हैं. समिति का उद्देश्य अवैध प्रवास और अन्य असामान्य कारणों से देश के विभिन्न हिस्सों में होने वाले जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन करना और उनसे निपटने के लिए नीतिगत, कानूनी तथा प्रशासनिक उपाय सुझाना बताया गया है