Donald Trump Renames AI: अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर बड़ा बदलाव किया है. दरअसल, मंगलवार को ट्रंप ने एक नए कार्यक…
Donald Trump Renames AI: अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर बड़ा बदलाव किया है. दरअसल, मंगलवार को ट्रंप ने एक नए कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए. जिसके तहत संघीय सरकार के आधिकारिक कामकाज में 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' और 'एआई' (AI) शब्दों की जगह अब 'सुपर इंटेलिजेंस' यानी 'एसआई' जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाएगा
इस समझौते के तहत, वे 'फ्रंटियर कंप्यूटिंग मॉडल' की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए "चार स्तरों वाले कंट्रोल और ऑडिट" का एक व्यापक ढांचा लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, साथ ही भविष्य में इसे कानून का रूप देने की संभावना भी खुली रखी गई है. "फ्रंटियर जिम्मेदारियों पर संयुक्त प्रतिबद्धता" नाम का यह दस्तावेज व्हाइट हाउस में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक के बाद जारी किया गया
America leads the future of Super Intelligence. 🇺🇸 pic.twitter.com/gHuBoMn7Wj
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश का शीर्षक 'सुपर इंटेलिजेंस के युग की शुरुआत' (Inaugurating the Era of Super Intelligence) है. जिसके तहत अमेरिकी केंद्र सरकार के विभागों और एजेंसियों को आधिकारिक पत्राचार, सार्वजनिक संचार, वेबसाइट, रिपोर्ट और प्रशासनिक नीति दस्तावेजों में एआई की जगह अब 'सुपर इंटेलिजेंस' और 'SI' शब्दों का प्रयोग करना होगा
इसके साथ ही इस आदेश में कहा गया है कि यह बदलाव कानून की अनुमति की अधिकतम सीमा तक लागू किया जाएगा. इस संबंध में सरकार आधिकारिक स्थानों पर 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' और 'AI' शब्द का इस्तेमाल करने की मान्यता नहीं देगी. हालांकि, यह बदलाव पहले से मौजूद रिकॉर्ड पर लागू नहीं होगा. यानी पुराने नियम, सरकारी कॉन्ट्रैक्ट, ग्रांट और ऐतिहासिक अभिलेख पुराने ही रहेंगी और वे इस नए आदेश के चलते बदले नहीं जाएंगे
दरअसल, अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि आज के अत्याधुनिक AI सिस्टम की क्षमताएं सिर्फ इंसानी बुद्धिमत्ता के कुछ हिस्सों की नकल करने या उन्हें स्वचालित करने तक सीमित नहीं है. आदेश में कहा गया है कि ये सिस्टम तेजी से इंसानी रचनात्मकता और क्षमता को बढ़ा रहे हैं. साथ ही विज्ञान, चिकित्सा और मानव प्रयास के लगभग हर क्षेत्र में ऐसे कामों को संभव बना रहे हैं, जिन्हें पहले करना लगभग असंभव माना जाता था
बता दें कि ट्रंप ने भले ही एआई का नाम बदल कर 'सुपर इंटेलिजेंस' कर दिया हो लेकिन अमेरिका के यूएस कोड के टाइटल 15 में दी गई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मौजूदा वैधानिक परिभाषा ही लागू रहेगी. यही नहीं राष्ट्रपति के विज्ञान और तकनीक मामलों के सहायक को 60 दिनों के भीतर कांग्रेस के सामने प्रस्तावित कानून पेश करने की भी समयसीमा दी गई है. इस प्रस्ताव में 'सुपर इंटेलिजेंस' की नई संघीय वैधानिक परिभाषा तय करने और मौजूदा अमेरिकी कानूनों में उससे जुड़े बदलाव के बारे में सुझाने रखने की बात कही गई है
बता दें कि मंगलवार को ट्रंप की व्हाइट हाउस में टेक्नोलॉजी फील्ड के दिग्गजों साथ हुई हाई लेवल लंच मीटिंग के बाद यह एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पेश किया गया. व्हाइट हाउस में हुई इस बैठक में स्पेसएक्स और टेस्ला के प्रमुख एलन मस्क, मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग, गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई और NVIDIA के CEO जेनसन हुआंग समेत कई प्रमुख टेक कंपनियों के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस तकनीकी बदलाव को अमेरिका के लिए अभूतपूर्व अवसर बताया है. उन्होंने कहा कि यह देश के लिए बहुत बड़ा बदलाव है जो इंटरनेट से भी बड़ा हो सकता है
वहीं बैठक के बाद टेक्नोलॉजी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने व्हाइट हाउस अकोर्ड के बारे में मीडिया से बातचीत की. जिसका फोकस सुपर इंटेलिजेंस को सुरक्षित तरीके से विकसित करने पर था. इस दौरान मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि लोगों को इस तकनीक पर भरोसा होना जरूरी है. जबकि एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोडेई ने टेक इंडस्ट्री और प्रशासन के बीच मिलकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया




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