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जिस निष्पक्षता से मिली नौकरी, उसी ईमानदारी से पीड़ितों को न्याय दिलाएं वैज्ञानिक अधिकारी: सीएम योगी -

🕐 05 Nov 2026, 07:00 pm• 4 min padho • Chugal Khor News
जिस निष्पक्षता से मिली नौकरी, उसी ईमानदारी से पीड़ितों को न्याय दिलाएं वैज्ञानिक अधिकारी: सीएम योगी -

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से चयनित 28 वैज्ञानिक अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस दौरान उन्होंने नवनियुक्त अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारियों का एहसास कराते हुए कहा कि जिस निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ उन्हें नौकरी मिली है, उसी ईमानदारी से पीड़ितों को न्याय दिलाने में अपनी भूमिका निभाएं। फॉरेंसिक साक्ष्यों की शुद्धता, विश्वसनीयता और समयबद्ध जांच ही न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने का आधार है। अपराधी को सजा दिलाना और निर्दोष के सम्मान एवं अधिकारों की रक्षा करना ही सुशासन का वास्तविक लक्ष्य है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन वैज्ञानिक अधिकारियों का चयन पूरी तरह योग्यता और मेरिट के आधार पर हुआ है। न किसी सिफारिश की जरूरत पड़ी और न ही किसी तरह का लेनदेन हुआ।

अभ्यर्थियों ने बताया कि साक्षात्कार के दिन ही शाम तक परिणाम घोषित कर दिया गया। यह भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और शासन की शुचिता का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि नियुक्ति पत्र केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं होता, बल्कि इससे पूरे परिवार की खुशियां जुड़ी होती हैं। अब अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे भी अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्पक्षता और ईमानदारी से करें।सीएम योगी ने कहा कि न्याय व्यवस्था में सत्य की विजय के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्यों का होना बेहद जरूरी है। कई बार अपराध से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य उपलब्ध होने के बावजूद विवेचना में कमियों के कारण अपराधी कानून के शिकंजे से बच निकलते हैं। फॉरेंसिक जांच केवल साक्ष्य जुटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी प्रमाणिकता बनाए रखना और उन्हें न्यायालय में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने योग्य बनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।मुख्यमंत्री ने भारतीय न्याय दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि महर्षि गौतम ने हजारों वर्ष पहले प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द प्रमाण के चार प्रकार बताए थे। आज की आधुनिक फॉरेंसिक जांच व्यवस्था में भी इनका महत्व बना हुआ है। वैज्ञानिक अधिकारियों की भूमिका न्याय प्रक्रिया में बेहद महत्वपूर्ण है। उनके द्वारा तैयार किए गए सटीक और विश्वसनीय साक्ष्य अपराधियों को सजा दिलाने में निर्णायक साबित हो सकते हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि जुलाई 2024 में देश में लागू किए गए तीन नए आपराधिक कानूनों के तहत सात वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक साक्ष्य संकलन अनिवार्य किया गया है। इसके लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना जरूरी था। प्रदेश सरकार ने 500 फॉरेंसिक एविडेंस कलेक्ट करने वाले पुलिस अधिकारियों के प्रशिक्षण के लक्ष्य के मुकाबले 600 से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षित किया है। ये अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचकर वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।उन्होंने कहा कि रक्त के नमूने, उंगलियों के निशान, बाल और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य अपराध की गुत्थी सुलझाने में अहम भूमिका निभाते हैं। सहारनपुर में एक बालिका के जले हुए अवशेषों से प्राप्त वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर वास्तविक अपराधी तक पहुंचने का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि फॉरेंसिक विशेषज्ञ न्याय व्यवस्था के महत्वपूर्ण सारथी हैं। उनकी दक्षता से अपराधियों को सजा दिलाने के साथ न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी भी रोकी जा सकती है।

सीएम योगी ने बताया कि प्रदेश में वैज्ञानिक जांच की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रत्येक जिले में दो-दो फॉरेंसिक मोबाइल वैन उपलब्ध कराई गई हैं। इसके साथ ही विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि घटनास्थल पर समय से पहुंचकर वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य एकत्र किए जा सकें।उन्होंने उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले जिस जमीन पर भू-माफिया का कब्जा था, उसे मुक्त कराकर वहां इस महत्वपूर्ण संस्थान की स्थापना की गई। संस्थान में फॉरेंसिक साइंस के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और ड्रोन टेक्नोलॉजी जैसी आधुनिक विधाओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यहां डिग्री और डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी संचालित हैं।

मुख्यमंत्री ने क्वांटम फॉरेंसिक जैसे नए क्षेत्रों में विशेषज्ञता विकसित करने पर भी जोर दिया।मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश पुलिस में 2.30 लाख से अधिक कार्मिकों की नियुक्ति पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से की गई है। कभी प्रदेश में अराजकता, उपद्रव और कर्फ्यू की स्थिति आम बात थी, लेकिन सरकार ने पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक सुधार किए हैं। आज कानून-व्यवस्था के मामले में उत्तर प्रदेश की चर्चा देशभर में होती है। उन्होंने कहा कि इच्छाशक्ति, सक्षम मानव संसाधन और समर्पण के साथ किए गए प्रयासों से प्रदेश ने अपनी पहचान बदली है। योगी आदित्यनाथ ने बताया कि प्रदेश सरकार पिछले साढ़े नौ वर्षों में 9.5 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी उपलब्ध करा चुकी है। अगले छह महीनों में एक लाख और नियुक्ति पत्र वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि यह छठा नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम है और अगले दिन उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए भी बड़ा नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।कार्यक्रम के दौरान वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण और अपर पुलिस महानिदेशक तकनीकी सेवाएं भगवान स्वरूप सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने सभी नवनियुक्त वैज्ञानिक अधिकारियों को बधाई देते हुए पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने का आह्वान किया।कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से चयनित 28 वैज्ञानिक अधिकारियों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इनमें डॉ. गरिमा सिंह, डॉ. कुमुदिनी बाला गौतम, पवन कुमार प्रजापति, डॉ. कपिल वर्मा, डॉ. प्रवीण कुमार तिवारी, रवि गुप्ता, शशांक शेखर तिवारी और डॉ. अतुल कुमार सहित अन्य चयनित अभ्यर्थी शामिल रहे।

स्रोत: Filmitics

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