दिल्ली हाईकोर्ट ने वर्चुअल सुनवाई के दौरान एक वकील के चलती कार से अदालत की कार्यवाही में शामिल होने पर कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने अधिवक्ता नचिकेता गोयल पर 1…
दिल्ली हाईकोर्ट ने वर्चुअल सुनवाई के दौरान एक वकील के चलती कार से अदालत की कार्यवाही में शामिल होने पर कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने अधिवक्ता नचिकेता गोयल पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. यह रकम दिल्ली हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी में जमा कराने का निर्देश दिया गया है. मामले की सुनवाई जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला ने की. अदालत ने कहा कि ऑनलाइन माध्यम से सुनवाई की सुविधा का मतलब यह नहीं है कि अदालत की कार्यवाही के दौरान जरूरी अनुशासन और गरिमा से समझौता किया जाए. कोर्ट के मुताबिक, वर्चुअल सुनवाई के दौरान भी वकीलों से ऐसी जगह से पेश होने की अपेक्षा की जाती है, जहां कार्यवाही बिना किसी व्यवधान के चल सके
दरअसल, सुनवाई के दौरान अधिवक्ता नचिकेता गोयल एक चलती हुई कार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत के सामने पेश हुए. कार के चलने के कारण सुनवाई के दौरान आसपास की आवाजें और दूसरे तरह के व्यवधान अदालत के सामने आए. हाईकोर्ट ने इसी स्थिति को गंभीरता से लेते हुए वकील के आचरण पर आपत्ति जताई. अदालत ने कहा कि एक दिन में बड़ी संख्या में मामलों की सुनवाई होती है. ऐसे में अगर किसी वकील की वर्चुअल उपस्थिति के दौरान लगातार शोर, आवाजाही या दूसरे व्यवधान बने रहें तो इससे न्यायिक कार्यवाही प्रभावित हो सकती है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन सुनवाई भी अदालत की ही कार्यवाही है और उसमें भी निर्धारित शिष्टाचार का पालन किया जाना जरूरी है
हाईकोर्ट ने इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूल्स, 2025 का भी उल्लेख किया. इन नियमों में वकीलों से यह अपेक्षा की गई है कि वे सामान्य तौर पर वाहनों के अंदर से अदालत की वर्चुअल कार्यवाही में शामिल होने से बचें. हालांकि, असाधारण परिस्थितियों में अदालत की अनुमति के बाद ऐसा किया जा सकता है. अदालत ने कहा कि यह व्यवस्था केवल एक तकनीकी औपचारिकता नहीं है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वकील जब ऑनलाइन माध्यम से अदालत के सामने उपस्थित हों तो उनका वातावरण न्यायिक कार्यवाही के अनुकूल हो. इस मामले में अदालत ने माना कि ऐसी कोई असाधारण परिस्थिति सामने नहीं आई, जिसके आधार पर वकील को चलती कार से सुनवाई में शामिल होने की अनुमति दी जा सकती थी
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हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्चुअल कोर्ट की सुविधा का इस्तेमाल करते समय वकीलों को यह ध्यान रखना होगा कि उनकी व्यक्तिगत सुविधा से अदालत की कार्यवाही प्रभावित न हो. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने वाले अधिवक्ता के लिए शांत और स्थिर स्थान उपलब्ध होना महत्वपूर्ण है, ताकि सुनवाई के दौरान न तो आवाज से परेशानी हो और न ही कैमरे के सामने लगातार गतिविधि दिखाई दे. यह आदेश South Indian Bank बनाम National Highways Authority of India (NHAI) से जुड़ी प्रवर्तन कार्यवाही की सुनवाई के दौरान आया. इसी मामले में अदालत के सामने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनी जा रही थीं, जब वकील की वर्चुअल उपस्थिति का मुद्दा सामने आया
कोर्ट ने अंततः अधिवक्ता नचिकेता गोयल को 1 लाख रुपये की लागत दिल्ली हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी (DHCLSC) में जमा कराने का आदेश दिया. इस तरह अदालत ने साफ संकेत दिया कि वर्चुअल सुनवाई के दौरान भी वकीलों को अदालत की गरिमा और निर्धारित नियमों का ध्यान रखना होगा. दिल्ली हाईकोर्ट के इस आदेश से यह भी स्पष्ट होता है कि अदालतें ऑनलाइन सुनवाई को आमने-सामने की कार्यवाही से अलग दर्जे की प्रक्रिया के तौर पर नहीं देख रही हैं. तकनीक के जरिए अदालत से जुड़ने की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन इस सुविधा के साथ न्यायिक अनुशासन और कार्यवाही की गंभीरता बनाए रखना भी जरूरी है






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