उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले PDA को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है, आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने समाजवादी पार्टी और अखिल…

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले PDA को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है, आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले पर तंज कसा है, उन्होंने कहा कि सपा का PDA समय के साथ बदलता रहता है, जबकि उनका PDA नहीं बदल रहा है, चंद्रशेखर आजाद ने सपा के PDA पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इसे लेकर अलग-अलग परिभाषाएं सामने आती रही हैं, उन्होंने कहा कि सपा का PDA कभी कुछ और तो कभी कुछ बताया जाता है, अपने बयान में उन्होंने ‘पीढ़ी’, ‘पंडित’, ‘अगड़ी जाति’ और ‘पिछड़ी जाति’ जैसे संदर्भों का भी जिक्र किया, उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उनका कौन सा PDA है, यह सपा ही तय करेगी, लेकिन उनके मुताबिक उनका अपना PDA नहीं बदल रहा है।

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इससे पहले बसपा प्रमुख मायावती ने भी अखिलेश यादव के PDA अभियान पर सवाल उठाए थे, उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सपा के ‘PDA रथ’ के रंग और उसकी राजनीतिक रणनीति पर टिप्पणी की थी, मायावती ने सपा के PDA की परिभाषा को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि पार्टी अलग-अलग मौकों पर इसके अलग अर्थ बताती रही है, उनके बयान में सपा के राजनीतिक रुख और दलित-अंबेडकरवादी मुद्दों को लेकर भी आलोचना शामिल थी।

समाजवादी पार्टी ने हाल ही में रायबरेली से PDA रथ अभियान की शुरुआत की है। पार्टी की ओर से ‘जो पीड़ित, वही PDA’ संदेश को अभियान से जोड़ा गया है वहीं, चंद्रशेखर आजाद और मायावती की टिप्पणियों के बाद PDA को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है, अलग-अलग नेताओं की अपनी-अपनी व्याख्याओं के बीच यूपी में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक समीकरण और राजनीतिक संदेशों को लेकर बयानबाजी जारी है।

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