ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने ड्रग्स बनाने वाली कथित फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। छापेमारी के दौरान करीब 4…

ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने ड्रग्स बनाने वाली कथित फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। छापेमारी के दौरान करीब 45 करोड़ रुपये कीमत की तैयार ड्रग्स बरामद होने की जानकारी सामने आई है। कार्रवाई में 379.740 किलोग्राम एम्फेटामाइन युक्त पदार्थ और 10 किलोग्राम स्यूडोएफेड्रिन के साथ ड्रग्स तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल भी जब्त किए गए हैं। मामले में नाइजीरियाई नागरिक समेत तीन आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई है, जिनमें मिजोरम की एक महिला भी शामिल है।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा के एक गांव में किराये के मकान के भीतर ड्रग्स बनाने का काम चल रहा था। NCB की टीम ने छापेमारी कर वहां से बड़ी मात्रा में तैयार मादक पदार्थ और उसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद की।

कार्रवाई के दौरान 379.740 किलो एम्फेटामाइन युक्त पदार्थ मिला, जिसकी कीमत करीब 45 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसके अलावा 10 किलो स्यूडोएफेड्रिन भी बरामद किया गया। स्यूडोएफेड्रिन एक रासायनिक पदार्थ है, जिसका इस्तेमाल कुछ वैध दवाओं में भी होता है, लेकिन इसके दुरुपयोग और अवैध निर्माण से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियां विशेष निगरानी रखती हैं।

NCB ने फैक्ट्री से ड्रग्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल भी जब्त किए हैं। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुट सकती है कि इस कथित फैक्ट्री में मादक पदार्थ बनाने की प्रक्रिया कैसे चल रही थी और इसके पीछे कौन-कौन लोग जुड़े थे।

इस मामले में नाइजीरियाई नागरिक समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। गिरफ्तार आरोपियों में मिजोरम निवासी एक महिला भी शामिल है। महिला के पुराने आपराधिक मामले को लेकर भी जानकारी सामने आई है।

बताया जा रहा है कि महिला को इससे पहले गोवा में 313 ग्राम हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया गया था। वह उस मामले में जमानत पर बाहर थी। अब NCB की कार्रवाई के बाद उसके कथित नेटवर्क और मौजूदा मामले में भूमिका की जांच की जा रही है।

जांच एजेंसी आरोपियों के आपसी संपर्क, ड्रग्स की सप्लाई और कथित अवैध कारोबार से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही है। नाइजीरियाई नागरिक के भारत आने और उसके वीजा से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच किए जाने की जानकारी है।

जांच का एक अहम पहलू यह पता लगाना होगा कि बरामद पदार्थ कहां भेजा जाना था और क्या इस गतिविधि के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था। हालांकि, नेटवर्क के विस्तार और ड्रग्स की अंतिम सप्लाई के संबंध में अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

करीब 45 करोड़ रुपये की ड्रग्स की बरामदगी को इस कार्रवाई का महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है। फिलहाल जांच एजेंसी बरामद पदार्थों, जब्त केमिकल और गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। मामले में आगे की जांच के बाद ही कथित फैक्ट्री के संचालन, सप्लाई नेटवर्क और अन्य संभावित आरोपियों के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने आएगी।