गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक खंड चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी के भीतर सियासी हलचल तेज होती नजर आ रही है। चुनावी सरगर्मियों के बीच चार बार के विधान परिषद सदस्य (M…

गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक खंड चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी के भीतर सियासी हलचल तेज होती नजर आ रही है। चुनावी सरगर्मियों के बीच चार बार के विधान परिषद सदस्य (MLC) देवेंद्र प्रताप सिंह का एक भावुक पत्र सामने आने से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। संजय त्रिपाठी और विश्वजीत त्रिपाठी को लेकर पहले से जारी राजनीतिक चर्चाओं के बीच अब देवेंद्र प्रताप सिंह के तेवरों ने चुनावी समीकरणों को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर प्रसारित पत्र में उन्होंने 23 अक्टूबर को ‘अन्याय और अपमान के खिलाफ सशक्त जनादेश’ देने की अपील की है।

उनके इस संदेश को लेकर भाजपा के भीतर असंतोष और बगावत की अटकलें तेज हो गई हैं।सोशल मीडिया पर सामने आए पत्र में देवेंद्र प्रताप सिंह ने शिक्षकों और नौजवानों के लिए किए गए अपने संघर्षों का जिक्र करते हुए भावुक संदेश दिया है। उन्होंने लिखा है, “शिक्षकों और नौजवानों के लिए मेरा जीवन समर्पित है। सदन से सड़क तक आपके लिए लड़ा हूं। मेरे दरवाजे से मीडिया रिपोर्ट कोई खाली हाथ नहीं गया, लेकिन न्याय के लिए हमारे संघर्ष को अपमानित किया गया।” उन्होंने शिक्षक साथियों से अपील की कि जिनके मन में न्याय की ललक है और जो उनके प्रति स्नेह रखते हैं, वे 23 अक्टूबर को अन्याय और अपमान के खिलाफ सशक्त जनादेश दें। उनके इस संदेश के बाद राजनीतिक हलकों में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर वह किस अन्याय और अपमान की ओर इशारा कर रहे हैं और उनका निशाना किसकी तरफ है

।इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि देवेंद्र प्रताप सिंह को स्वयं भाजपा का अधिकृत प्रत्याशी बताया जा रहा है। ऐसे में उनके पत्र में इस्तेमाल किए गए ‘अन्याय’ और ‘अपमान’ जैसे शब्दों ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर देवेंद्र प्रताप सिंह किससे नाराज हैं? क्या उनकी नाराजगी पार्टी के भीतर किसी निर्णय या राजनीतिक घटनाक्रम से जुड़ी है, या फिर इसके पीछे कोई दूसरी वजह है? हालांकि, अपने पत्र में उन्होंने किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल का नाम लेकर आरोप नहीं लगाया है। ऐसे में उनकी नाराजगी को सीधे भाजपा नेतृत्व से जोड़कर देखना फिलहाल जल्दबाजी होगी।देवेंद्र प्रताप सिंह के पत्र ने गोरखपुर की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या उनके इस रुख का फायदा समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी बताए जा रहे संजय त्रिपाठी को मिल सकता है? भाजपा प्रत्याशी से मुलाकात न करने और मीडिया से दूरी बनाए रखने संबंधी चर्चाओं ने इन अटकलों को और बढ़ा दिया है। हालांकि, इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि देवेंद्र प्रताप सिंह ने अपने पत्र में किसी अन्य प्रत्याशी को समर्थन देने की स्पष्ट घोषणा नहीं की है। ऐसे में उनके संदेश को सपा प्रत्याशी के समर्थन के तौर पर देखना फिलहाल राजनीतिक कयास ही माना जा रहा है।गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक खंड चुनाव में संजय त्रिपाठी और विश्वजीत त्रिपाठी को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच देवेंद्र प्रताप सिंह का पत्र सामने आना राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चार बार विधान परिषद का प्रतिनिधित्व कर चुके देवेंद्र प्रताप सिंह का शिक्षक समुदाय से पुराना जुड़ाव रहा है। ऐसे में उनका सार्वजनिक संदेश चुनावी माहौल में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, इस पत्र के आधार पर किसी औपचारिक बगावत या राजनीतिक पाला बदलने का निष्कर्ष निकालना अभी संभव नहीं है।देवेंद्र प्रताप सिंह की अपील के बाद अब राजनीतिक हलकों की निगाहें 23 अक्टूबर पर टिक गई हैं। उनके संदेश का चुनावी माहौल पर क्या असर पड़ेगा और क्या वह अपनी नाराजगी को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट बयान देंगे, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल गोरखपुर की सियासत में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर चार बार के एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह किस अपमान का बदला जनादेश से लेने की बात कर रहे हैं? क्या यह संदेश केवल व्यक्तिगत पीड़ा और नाराजगी की अभिव्यक्ति है या इसके पीछे किसी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के संकेत छिपे हैं?