विजयादशमी के पावन पर्व पर आज गोरक्षनगरी गोरखपुर में आस्था, परंपरा और सामाजिक समरसता का भव्य संगम देखने को मिलेगा। गोरक्षपीठ की प्राचीन परंपरा का निर्वहन करते ह…
विजयादशमी के पावन पर्व पर आज गोरक्षनगरी गोरखपुर में आस्था, परंपरा और सामाजिक समरसता का भव्य संगम देखने को मिलेगा। गोरक्षपीठ की प्राचीन परंपरा का निर्वहन करते हुए गोरक्षपीठाधीश्वर एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज महायोगी गुरु गोरखनाथ का विधि-विधान से विशेष पूजन करेंगे। इसके बाद शाम चार बजे गोरखनाथ मंदिर से निकलने वाली पारंपरिक विजयादशमी शोभायात्रा की अगुवाई करेंगे।
तुरही, नगाड़ों, बैंड-बाजों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज के बीच निकलने वाली यह शोभायात्रा सनातन संस्कृति की गौरवशाली परंपरा के साथ सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश देगी।विजयादशमी के अवसर पर गोरखनाथ मंदिर में धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष आयोजन निर्धारित है। गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ सुबह शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ का विशिष्ट पूजन करेंगे। इसके साथ ही मंदिर परिसर में स्थापित सभी देवी-देवताओं के विग्रहों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी। नाथपंथ की धार्मिक परंपराओं के अनुसार होने वाले इन अनुष्ठानों का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। विजयादशमी का पर्व गोरक्षपीठ के लिए केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि लोक कल्याण, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता का प्रतीक भी माना जाता है।
गोरखनाथ मंदिर में मध्याह्न काल में पारंपरिक तिलकोत्सव कार्यक्रम आयोजित होगा। इस दौरान गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ विशेष परिधान में श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देंगे। गोरक्षपीठ की परंपरा में विजयादशमी के दिन आयोजित होने वाले इस तिलकोत्सव का विशेष महत्व है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने की संभावना है। गोरक्षपीठाधीश्वर से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विभिन्न वर्गों के श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल होते हैं।विजयादशमी का मुख्य आकर्षण शाम चार बजे गोरखनाथ मंदिर से निकलने वाली पारंपरिक विजय शोभायात्रा होगी।
गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ नाथपंथ की परंपरा के अनुरूप विशेष परिधान धारण कर गुरु गोरखनाथ का आशीर्वाद लेने के बाद शोभायात्रा का नेतृत्व करेंगे। शोभायात्रा में पारंपरिक वाद्ययंत्रों, तुरही, नगाड़ों और बैंड-बाजों की धुन गूंजेगी। गोरखनाथ मंदिर से निकलकर यह यात्रा मानसरोवर मंदिर पहुंचेगी, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भगवान शिव की विधिवत पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद शोभायात्रा मानसरोवर रामलीला मैदान की ओर प्रस्थान करेगी।गोरखनाथ मंदिर की विजयादशमी शोभायात्रा की सबसे खास विशेषता इसमें दिखाई देने वाला सामाजिक सौहार्द है। इस आयोजन में विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोगों की सहभागिता गोरखपुर की साझा सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। परंपरा के अनुसार, गोरखनाथ मंदिर के मुख्य द्वार से कुछ दूरी पर अल्पसंख्यक समुदाय के लोग फूल-मालाओं के साथ शोभायात्रा का स्वागत करते हैं। इस वर्ष भी समुदाय के लोगों द्वारा स्वागत किए जाने का कार्यक्रम है। गोरक्षपीठ की विजयादशमी शोभायात्रा वर्षों से सामाजिक एकता, आपसी भाईचारे और सद्भाव का संदेश देती रही है। यही विशेषता इसे अन्य धार्मिक शोभायात्राओं से अलग पहचान दिलाती है।शोभायात्रा मानसरोवर रामलीला मैदान पहुंचेगी, जहां गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ भगवान श्रीराम का विधि-विधान से राजतिलक करेंगे। इस दौरान प्रभु श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमानजी की पूजा-अर्चना के साथ आरती उतारी जाएगी। रामलीला मैदान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ श्रद्धालुओं और उपस्थित जनसमूह को संबोधित भी करेंगे। यह आयोजन विजयादशमी के पर्व पर धर्म की अधर्म पर विजय और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों का संदेश देगा।विजयादशमी के अवसर पर देर शाम गोरखनाथ मंदिर परिसर में पारंपरिक भोज का भी आयोजन किया जाएगा। इस भोज की विशेषता सामाजिक समानता और समरसता की भावना है। इसमें जाति, वर्ग और आर्थिक स्थिति के भेदभाव से ऊपर उठकर समाज के सभी वर्गों के लोग एक साथ शामिल होते हैं।
गोरक्षपीठ की यह परंपरा समाज में एकता, समानता और भाईचारे के संदेश को मजबूत करती है।गोरक्षपीठ की विजयादशमी केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है। यह आयोजन नाथपंथ की प्राचीन परंपराओं, सनातन संस्कृति और लोक कल्याण की भावना को एक सूत्र में पिरोता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में निकलने वाली विजय शोभायात्रा में जहां धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक गौरव के दर्शन होते हैं, वहीं विभिन्न समुदायों की सहभागिता सामाजिक सद्भाव की मिसाल पेश करती है। आज गोरखपुर में आयोजित होने वाले इन कार्यक्रमों के माध्यम से एक बार फिर गोरक्षपीठ की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी।






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