अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़ा एक ऐसा खुलासा सामने आया है, जिसने कूटनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है. दरअसल, हाल ही में चीन में अमेरिका के राजदूत ड…
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़ा एक ऐसा खुलासा सामने आया है, जिसने कूटनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है. दरअसल, हाल ही में चीन में अमेरिका के राजदूत डेविड परड्यू ने बताया है कि ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से यह तक पूछ लिया कि क्या वे अमेरिकी हथियार खरीदने में दिलचस्पी रखते हैं
बता दें परड्यू ने रविवार को अमेरिकी चैनल फॉक्स न्यूज संडे पर एंकर शैनन ब्रीम से बातचीत में यह जानकारी दी है. यह इंटरव्यू शी जिनपिंग की वॉशिंगटन की राजकीय यात्रा के कुछ ही दिन बाद हुआ है इसलिए इस बयान को और भी ज्यादा अहम माना जा रहा है
एक रिपोर्ट के अनुसार परड्यू के मुताबिक ट्रंप ने ताइवान को प्रस्तावित हथियार बिक्री को सही ठहराते हुए शी से कहा कि अमेरिका पूरी दुनिया में कई देशों को हथियार बेचता है और ताइवान की बिक्री भी उन्हीं में से एक है. इसी बातचीत में ट्रंप ने शी से यह भी पूछ लिया कि क्या वे खुद अमेरिका से हथियार खरीदना चाहेंगे? बता दें अपने इंटरव्यू में परड्यू ने यह साफ नहीं किया कि यह प्रस्ताव किस मौके पर दिया गया था
US Ambassador to China David Perdue says in their recent meeting Trump asked President Xi if China wanted to buy weapons systems from the US. pic.twitter.com/vdiT1RMCHE
दरअसल, चीन उन गिने-चुने देशों में शामिल है जिन पर अमेरिका ने हथियार प्रतिबंध लगा रखा है और यह पाबंदी 1989 के तियानमेन चौक नरसंहार के बाद और सख्त की गई थी. अगर ट्रंप का प्रस्ताव आगे बढ़ता तो इससे चीन और ताइवान को लेकर अमेरिका की दशकों पुरानी नीति पूरी तरह बदल जाएगी और अमेरिकी तकनीक ऐसे देश के हाथों में पहुंच सकती थी जिसे वॉशिंगटन संभावित प्रतिद्वंद्वी मानता है. वहीं, चीन और भारत के बीच पहले से ही खींचातान चलती रहती है. ऐसे में अगर अमेरिका और चीन की ये डील होती है तो भारत पर इसका सबसे अधिक असर पड़ेगा. हो सकता है इस तबाव का पाकिस्तान भी मौका देखकर फायदा उठा ले
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ताइवान को हथियारों की बिक्री लंबे समय से अमेरिका और चीन के बीच तनाव की बड़ी जड़ रही है. इसके अलावा अमेरिका ताइवान का सबसे बड़ा अनौपचारिक समर्थक और हथियार आपूर्तिकर्ता है. बता दें चीन इस स्वशासित द्वीप को अपना हिस्सा मानता है. वहीं, अमेरिका ने दिसंबर 2025 में ताइवान को करीब 11 अरब डॉलर के हथियारों की बिक्री को मंजूरी दी थी
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अमेरिकी मीडिया के मुताबिक मई में बीजिंग में हुई शिखर बैठक के दौरान चीन ने अमेरिका पर ताइवान को हथियार बिक्री रोकने का जोरदार दबाव बनाया था. उसके बाद अमेरिका ने करीब 14 अरब डॉलर के एक रिकॉर्ड हथियार पैकेज को रोक दिया था. बता दें उस वक्त ट्रंप ने ताइवान की हथियार बिक्री को चीन के साथ बातचीत का एक अच्छा मोहरा बताया था जिस पर काफी विवाद हुआ था
इंटरव्यू के दौरान एंकर शैनन ब्रीम ने रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों दलों के सांसदों की उस चिंता का जिक्र किया जिसमें ताइवान के लिए सैन्य मदद और हथियारों के ऑर्डर में हो रही देरी पर सवाल उठाए गए हैं. सांसदों का कहना है कि इस देरी से ताइवान की चीन से खुद की रक्षा करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है
परड्यू ने दावा किया कि ट्रंप ने 1979 के बाद से किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति के मुकाबले ताइवान को करीब 50 प्रतिशत ज्यादा हथियार बेचे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप की ताइवान के प्रति प्रतिबद्धता पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए. साथ ही उन्होंने यह बात भी रखी कि ट्रंप हमेशा सौदेबाजी वाले अंदाज में रहते हैं चाहे मामला अमेरिका के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी को हथियार बेचने का ही क्यों न हो
Trump asked Xi Jinping at one point if he would like to buy some American armaments, U.S. Ambassador to China David Perdue says.Source: Bloomberg pic.twitter.com/CzAnFSYrvC
चीनी सरकारी मीडिया के मुताबिक वॉशिंगटन में हुई निजी बातचीत में शी जिनपिंग ने ट्रंप से ताइवान की स्वतंत्रता का विरोध करने की अपील की है. परड्यू ने अपने इंटरव्यू में ये भी बताया कि शी की यात्रा के दौरान ये आम राय बनीं की ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होना चाहिए, होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रहना चाहिए और वहां से गुजरने पर कोई शुल्क नहीं लगना चाहिए
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