कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों और समाज के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो मुश्किलें भी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकतीं। इस बात को सच कर दिखाया है अलीगढ़ की आ…
कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों और समाज के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो मुश्किलें भी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकतीं। इस बात को सच कर दिखाया है अलीगढ़ की आशा कार्यकर्ता राजबाला देवी ने। कभी गांव की गलियों में घर-घर जाकर महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने पर उन्हें लोगों के ताने सुनने पड़ते थे। कई बार विरोध और उपेक्षा का भी सामना करना पड़ा, लेकिन राजबाला ने हार नहीं मानी। उन्होंने लोगों के तानों को अपनी ताकत बनाया और सेवा के संकल्प को जारी रखा। आज वही राजबाला तीन हजार से अधिक महिलाओं तक सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ पहुंचाकर नारी सशक्तिकरण की प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं।
नवरात्रि के पावन अवसर पर जब देशभर में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है, तब राजबाला देवी जैसी महिलाएं समाज में नारी शक्ति का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। राजबाला ने न केवल महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की ऐसी अलख जगाई कि आज लोग उन्हें सम्मान और विश्वास की नजर से देखते हैं।
राजबाला देवी ने वर्ष 2006 में आशा कार्यकर्ता के रूप में अपने सफर की शुरुआत की थी। उस दौर में ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य योजनाओं को लेकर जागरूकता का अभाव था। महिलाओं को अस्पताल में प्रसव कराने, बच्चों का टीकाकरण कराने और परिवार नियोजन के प्रति जागरूक करना आसान नहीं था। कई बार उन्हें लोगों की नाराजगी और तानों का सामना करना पड़ा। शुरुआती दिनों में परिवार का सहयोग भी सीमित रहा, लेकिन उन्होंने अपने कदम पीछे नहीं खींचे। लगातार मेहनत, धैर्य और समर्पण के बल पर उन्होंने धीरे-धीरे ग्रामीणों का भरोसा जीत लिया।
करीब दो दशक की सेवा के दौरान राजबाला देवी ने 3,000 से अधिक महिलाओं को स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित किया और उन्हें समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में सहयोग किया। उनका उद्देश्य हमेशा यही रहा कि किसी भी महिला को जानकारी के अभाव में स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित न रहना पड़े और जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित रहें।
राजबाला देवी ने मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य के साथ-साथ टीकाकरण, परिवार कल्याण, पोषण और संचारी रोगों की रोकथाम के लिए भी लगातार काम किया। उन्होंने घर-घर पहुंचकर महिलाओं को सरकारी योजनाओं की जानकारी दी और पात्र परिवारों को आयुष्मान भारत योजना से जोड़ने में मदद की। गरीब परिवारों के आयुष्मान कार्ड बनवाने में सहयोग कर उन्हें पात्रता के अनुसार पांच लाख रुपये तक के सालाना स्वास्थ्य बीमा कवर का लाभ दिलाने की दिशा में भी प्रयास किए।
राजबाला देवी की मेहनत और समर्पण को जिला स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक पहचान मिली है। उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें ‘अलीगढ़ रत्न’ सम्मान से नवाजा गया। प्रदेश स्तर पर भी स्वास्थ्य कार्यक्रमों को जन-जन तक पहुंचाने में उनके योगदान की सराहना की गई। उनकी सेवा यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव 26 जनवरी 2025 को आया, जब गणतंत्र दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से उन्हें उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि न केवल राजबाला देवी, बल्कि अलीगढ़ जिले के लिए भी गर्व का विषय बनी।
राजबाला देवी बताती हैं कि शुरुआती दौर में आशा कार्यकर्ताओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता काफी कम थी। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने दायित्वों को पूरी निष्ठा से निभाया। उनके मुताबिक, योगी सरकार की ओर से मानदेय और प्रोत्साहन राशि में बढ़ोतरी होने से आशा कार्यकर्ताओं को आर्थिक मजबूती मिली है। इससे परिवार की जरूरतों को पूरा करने में पहले की तुलना में अधिक सहूलियत हुई है।
राजबाला देवी की कहानी सिर्फ एक आशा कार्यकर्ता की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि उस महिला के संघर्ष की गाथा है, जिसने समाज की सोच बदलने का साहस दिखाया। कभी जिन रास्तों पर चलते हुए उन्हें ताने सुनने पड़ते थे, आज उन्हीं रास्तों पर लोग उनका सम्मान करते हैं। नवरात्रि के अवसर पर उनकी यह प्रेरणादायक यात्रा संदेश देती है कि नारी शक्ति केवल आराधना का विषय नहीं, बल्कि सेवा, साहस, समर्पण और समाज में बदलाव लाने की सबसे बड़ी ताकत है।






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