कोलकाता, अक्टूबर 2026 : अगस्त 2024 में कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में बलात्कार और हत्या की शिकार जूनियर डॉक्टर के पिता ने धमकी दी है
कोलकाता, अक्टूबर 2026: अगस्त 2024 में कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में बलात्कार और हत्या की शिकार जूनियर डॉक्टर के पिता ने वित्तीय अनियमितता मामले में अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को जमानत देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पश्चिम बंगाल में एक नया आंदोलन शुरू करने की धमकी दी है।
सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले ने लंबे समय तक जेल में रहने और मुकदमे की धीमी प्रगति का हवाला देते हुए शुक्रवार को घोष को जमानत दे दी।
घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पीड़िता के पिता शेखर देबनाथ ने कहा कि वह अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग करना जारी रखेंगे और जरूरत पड़ने पर फिर से सड़कों पर उतरने से नहीं हिचकिचाएंगे।
देबनाथ ने शनिवार को मीडियाकर्मियों से कहा, "मैं इसे अंत तक देखूंगा। यदि आवश्यक हुआ, तो मैं इस मुद्दे पर राज्य में नए सिरे से आंदोलन का आह्वान करूंगा और सड़कों पर उतरूंगा।"
यह पूछे जाने पर कि क्या एक और आंदोलन भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन होगा, खासकर तब जब उनकी पत्नी रत्ना देबनाथ सत्तारूढ़ पार्टी से विधायक हैं, उन्होंने कहा कि राजनीतिक विचार न्याय पाने के उनके दृढ़ संकल्प को प्रभावित नहीं करेंगे।
उन्होंने कहा, "इससे वास्तव में कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह सत्तारूढ़ व्यवस्था का हिस्सा हैं। मैं न्याय के लिए जो भी जरूरी होगा वह करूंगा।"
घोष, जो ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान राज्य संचालित चिकित्सा संस्थान के प्रमुख थे, अगस्त 2024 में जूनियर डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के बाद अस्पताल में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद जांच के दायरे में आए।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने संस्था में कथित भ्रष्टाचार के सिलसिले में घोष को गिरफ्तार किया। पीड़िता के माता-पिता ने भी चिंता जताई थी कि उनकी बेटी की मौत में प्रभावशाली लोग शामिल थे
कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा जमानत याचिका खारिज किये जाने के बाद घोष ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उनकी अपील पर विचार करते समय, शीर्ष अदालत ने हिरासत में उनके द्वारा बिताए गए समय और कानूनी कार्यवाही की गति पर ध्यान दिया






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