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3 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को वाराणसी के रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आबे मेमोरियल कॉरिडोर का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि यह कॉरिडोर जापान के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय शिंजो आबे की स्मृतियों के साथ भारत-जापान की अटूट मित्रता और विश्वास का जीवंत प्रतीक है। नई पीढ़ी के लिए यह एक जीवंत क्लासरूम की तरह होगा, जहां युवा सीख सकेंगे कि दूरदृष्टि रखने वाला एक नेता दो देशों के भविष्य को किस तरह नई दिशा दे सकता है।योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिंजो आबे की मित्रता पद से नहीं, बल्कि विश्वास से बनी थी। पद बदलते रहे, लेकिन मित्रता नहीं बदली। वर्ष 2007 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी। इसके बाद भारत-जापान संबंधों ने लगातार नई ऊंचाइयां हासिल कीं। काशी-क्योटो पार्टनर सिटी समझौते से लेकर बुलेट ट्रेन और विभिन्न इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं तक जापान भारत के साथ मजबूती से खड़ा रहा।मुख्यमंत्री ने कहा कि आज करीब 1400 जापानी कंपनियां भारत में काम कर रही हैं और दोनों देशों की साझेदारी सेमीकंडक्टर, एआई, ग्रीन हाइड्रोजन और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे भविष्य के क्षेत्रों तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा, “जापान के पास टेक्नोलॉजी है और भारत के पास टैलेंट। जापान के पास अनुभव है और भारत के पास युवा ऊर्जा।

सीएम योगी ने आगे कहा कि आज जब दुनिया में रिश्ते अक्सर लाभ-हानि देखकर तय होते हैं, ऐसे समय में जापान के रूप में भारत को एक सच्चा मित्र मिला है। भारत-जापान के संबंध हितों से ज्यादा विश्वास पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 में दोनों देशों के राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होंगे और यह स्मृति गलियारा उस अमृत पर्व की पहली भेंट है।मुख्यमंत्री ने काशी और जापान के क्योटो की समानताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों शहरों ने अपनी विरासत और परंपराओं को सुरक्षित रखते हुए विकास का रास्ता दिखाया है।

उन्होंने कहा कि शिंजो आबे को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि भारत-जापान की मित्रता हर वर्ष और मजबूत होती जाए।इस अवसर पर शिंजो आबे की धर्मपत्नी अकी आबे, मंत्री रविंद्र जायसवाल, वाराणसी के महापौर अशोक तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या, विधायक सौरभ श्रीवास्तव सहित जापान से आए प्रतिनिधिमंडल के सदस्य मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने जापानी भाषा में अतिथियों का स्वागत करते हुए अंत में “अरिगातो गोजाइमासु” कहकर आभार जताया।

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