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आगरा MLC चुनाव में आकाश अग्रवाल की जीत से सियासी हलचल, BJP से टिकट न मिलने के बाद सपा के टिकट पर हासिल की जीत -

🕐 28 Oct 2026, 05:20 pm• 2 min padho • Chugal Khor News
आगरा MLC चुनाव में आकाश अग्रवाल की जीत से सियासी हलचल, BJP से टिकट न मिलने के बाद सपा के टिकट पर हासिल की जीत -

आगरा MLC चुनाव में आकाश अग्रवाल की जीत से सियासी हलचल, BJP से टिकट न मिलने के बाद सपा के टिकट पर हासिल की जीत

आगरा की शिक्षक MLC सीट पर डॉ. आकाश अग्रवाल की जीत ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। भाजपा से टिकट मिलने की उम्मीद पूरी न होने के बाद समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले आकाश अग्रवाल ने भाजपा प्रत्याशी को 2,376 वोटों के अंतर से हराया। इस नतीजे को लेकर सपा और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है।

डॉ. आकाश अग्रवाल पहले भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते थे। हालांकि, पार्टी से टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी का उम्मीदवार बनाया। इसके बाद आगरा की इस सीट पर मुकाबला भाजपा और सपा के बीच दिलचस्प हो गया।

आकाश अग्रवाल की जीत को सपा के लिए अहम राजनीतिक उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, भाजपा के लिए यह परिणाम स्थानीय स्तर पर चुनावी रणनीति और मतदाताओं के रुझान की समीक्षा का विषय बन सकता है।

आगरा खंड स्नातक/शिक्षक MLC चुनाव की मतगणना के दौरान मुकाबला कड़ा रहा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पहली वरीयता के मतों से फैसला नहीं होने के बाद द्वितीय वरीयता के वोटों की गिनती निर्णायक बनी। अंततः डॉ. आकाश अग्रवाल ने भाजपा प्रत्याशी को 2,376 मतों से हराकर जीत दर्ज की।

इस नतीजे ने चुनाव में मतदाताओं की पसंद और दूसरी वरीयता के मतों के महत्व को भी चर्चा में ला दिया है।

चुनाव के दौरान डॉ. आकाश अग्रवाल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था, जिसमें वह भावुक नजर आए। उन्होंने पुलिस और प्रशासन पर अभद्र व्यवहार, डराने-धमकाने और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। ये आरोप उनके पक्ष की ओर से लगाए गए थे; इनकी स्वतंत्र पुष्टि और प्रशासन का पक्ष अलग से सामने आना जरूरी है।

मतगणना के दौरान सामने आए इस घटनाक्रम ने चुनावी प्रक्रिया और प्रत्याशियों की शिकायतों को लेकर भी सवाल खड़े किए।

आकाश अग्रवाल की जीत के बाद आगरा की MLC सीट एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है। भाजपा से टिकट न मिलने के बाद सपा के उम्मीदवार के रूप में उनकी जीत स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, इस एक चुनाव के परिणाम से पूरे प्रदेश में किसी दल के समर्थन या वोट बैंक में बदलाव का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

अब देखना होगा कि सपा इस जीत को आगामी राजनीतिक रणनीति में किस तरह इस्तेमाल करती है और भाजपा स्थानीय स्तर पर इस नतीजे की समीक्षा कैसे करती है।

स्रोत: Filmitics

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