पन्ना: बुंदेलखंड में किसानों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकारों की ओर से बड़े स्तर पर धनराशि खर्च की गई, लेकिन पन्ना जिले में कई सिंचाई परियोजनाओं…

पन्ना: बुंदेलखंड में किसानों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकारों की ओर से बड़े स्तर पर धनराशि खर्च की गई, लेकिन पन्ना जिले में कई सिंचाई परियोजनाओं की जमीनी स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। किसानों का आरोप है कि वर्षों पहले बनाए गए कुछ बांध अब भी उनके खेतों तक पर्याप्त पानी पहुंचाने में नाकाम हैं। सिरस्वाहा, बिलखुरा और मुटमुरु जैसी परियोजनाओं को लेकर ग्रामीणों का कहना है कि बांध बनने के करीब एक दशक बाद भी नहरों का काम अधूरा है या बनी हुई नहरें क्षतिग्रस्त हालत में हैं। इससे सिंचाई का अपेक्षित लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पा रहा है

किसानों के मुताबिक इन परियोजनाओं से सिंचाई क्षेत्र बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन कई स्थानों पर नहर नेटवर्क पूरा नहीं होने के कारण बांधों का पानी खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि इससे रबी सीजन में सिंचाई के लिए किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। परियोजनाओं की मौजूदा स्थिति को लेकर स्थानीय स्तर पर निर्माण गुणवत्ता, रखरखाव और नहरों के अधूरे काम पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार सिरस्वाहा बांध में कई जगह क्षति दिखाई देती है। उनका आरोप है कि बांध का पानी सिंचाई के उपयोग में लेने के बजाय नाले की ओर बहाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अक्टूबर-नवंबर में रबी फसलों के लिए पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। ऐसे समय में जलाशय के पानी का समुचित उपयोग नहीं होने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है

सिरस्वाहा के अलावा बिलखुरा और मुटमुरु बांध परियोजनाओं को लेकर भी ग्रामीणों ने सिंचाई व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि परियोजनाओं के निर्माण के बावजूद नहर व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी नहीं हो सकी है।किसानों का आरोप है कि कागजों में सिंचाई क्षमता बढ़ने के आंकड़े अलग तस्वीर पेश करते हैं, जबकि जमीन पर उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है

मामले को लेकर जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री सीबी अहिरवार का कहना है कि नहरों के निर्माण के लिए नए टेंडर बुलाए गए हैं। उनके मुताबिक बारिश का मौसम समाप्त होने के बाद निर्माण कार्य में तेजी लाई जाएगी।अधिकारी ने यह भी बताया कि उन्होंने करीब एक माह पहले पन्ना में पदभार संभाला है और कई बांध परियोजनाओं का अभी व्यक्तिगत निरीक्षण नहीं किया है

पन्ना जिले में निर्माणाधीन रुंझ और मझगांय बांध परियोजनाओं के साथ पूर्व में निर्मित कुछ सिंचाई परियोजनाओं पर सूचना बोर्ड नहीं होने का मुद्दा भी सामने आया है। स्थानीय स्तर पर सवाल उठाया जा रहा है कि परियोजना की लागत, निर्माण एजेंसी, स्वीकृति, सिंचाई क्षमता और अन्य जरूरी जानकारी प्रदर्शित करने वाले बोर्ड कई स्थानों पर क्यों नहीं लगाए गए। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी जानकारी सार्वजनिक होने से परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है

बुंदेलखंड में पानी की उपलब्धता खेती के लिए अहम मुद्दा है। ऐसे में किसानों की मांग है कि वर्षों से लंबित नहर निर्माण और क्षतिग्रस्त सिंचाई ढांचे की मरम्मत का काम जल्द पूरा किया जाए। साथ ही बांधों की तकनीकी जांच कर उनकी वास्तविक सिंचाई क्षमता और पानी के उपयोग की स्थिति सार्वजनिक की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों-अरबों रुपये की परियोजनाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब जलाशयों का पानी समय पर खेतों तक पहुंचे और किसानों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिले