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8 Ayodhya Assembly Election 2027: अयोध्या विधानसभा सीट पर 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या का राजनीतिक और प्रतीकात्मक महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ चुका है। ऐसे में यहां होने वाला विधानसभा चुनाव सिर्फ एक सीट का मुकाबला नहीं, बल्कि अलग-अलग राजनीतिक मुद्दों और रणनीतियों की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।

समाजवादी पार्टी ने अगस्त 2026 में अयोध्या विधानसभा सीट से पूर्व विधायक तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय को 2027 के चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उनके नाम का ऐलान किया।

वहीं, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े विनय कटियार ने भी अयोध्या विधानसभा से चुनाव लड़ने की इच्छा और दावा सार्वजनिक किया है। जनवरी 2026 में कटियार ने कहा था कि अयोध्या उनकी कर्मभूमि है और वह 2027 में यहां से विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। हालांकि, अंतिम उम्मीदवार का फैसला भाजपा के स्तर पर होना बाकी है।

अयोध्या विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास बताता है कि यहां मुकाबला हमेशा एकतरफा नहीं रहा है। 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के पवन पांडेय ने भाजपा के लल्लू सिंह को 5,405 वोटों के अंतर से हराकर जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2017 में भाजपा के वेद प्रकाश गुप्ता ने पवन पांडेय को 50,440 वोटों के बड़े अंतर से हराया।

2022 में भी वेद प्रकाश गुप्ता ने अयोध्या सीट बरकरार रखी। उन्हें 1,13,414 वोट मिले, जबकि पवन पांडेय को 93,424 वोट मिले। इस तरह भाजपा की जीत का अंतर 19,990 वोट रहा। यानी 2017 के मुकाबले अंतर काफी कम हुआ और सपा की चुनौती मजबूत दिखाई दी।

अयोध्या की राजनीति में 2024 का लोकसभा चुनाव भी महत्वपूर्ण संदर्भ बन गया है। फैजाबाद लोकसभा सीट, जिसमें अयोध्या विधानसभा क्षेत्र शामिल है, पर समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद ने भाजपा के लल्लू सिंह को 54,567 वोटों से हराया। अवधेश प्रसाद को 5,54,289 और लल्लू सिंह को 4,99,722 वोट मिले।

राम मंदिर के उद्घाटन के कुछ ही महीनों बाद आए इस नतीजे ने अयोध्या के चुनावी समीकरण को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बढ़ाई। अलग-अलग राजनीतिक विश्लेषणों में स्थानीय मुद्दों, रोजगार, महंगाई, पुनर्विकास से जुड़े सवाल और सामाजिक समीकरणों को भी चुनावी नतीजे से जोड़ा गया।

अयोध्या विधानसभा चुनाव में राम मंदिर और अयोध्या के विकास का मुद्दा प्रमुख रहने की संभावना है। इसके साथ ही शहर के पुनर्विकास, स्थानीय लोगों के विस्थापन और मुआवजे, रोजगार, कारोबार, महंगाई और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवाल भी चुनावी चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं।जातीय और सामाजिक समीकरण भी महत्वपूर्ण होंगे। ब्राह्मण, वैश्य, यादव, मुस्लिम, दलित और विभिन्न ओबीसी समुदायों की मौजूदगी वाले इस क्षेत्र में उम्मीदवार की सामाजिक पहचान के साथ-साथ पार्टी संगठन, बूथ स्तर की तैयारी और स्थानीय पकड़ भी चुनावी रणनीति का हिस्सा रहेगी।ऐसे में 2027 में एक तरफ पवन पांडेय की वापसी और दूसरी तरफ भाजपा के भीतर विनय कटियार की संभावित दावेदारी ने अयोध्या की राजनीति को शुरुआती दौर में ही चर्चा के केंद्र में ला दिया है। हालांकि भाजपा की ओर से उम्मीदवार चयन का अंतिम फैसला बाकी है।कुल मिलाकर, अयोध्या विधानसभा सीट पर 2027 की सियासी लड़ाई में राम मंदिर और अयोध्या के विकास की राजनीति के साथ स्थानीय मुद्दे, सामाजिक समीकरण और उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़ भी अहम भूमिका निभा सकते हैं। यही वजह है कि चुनाव से काफी पहले ही अयोध्या की इस सीट पर राजनीतिक गतिविधियों पर नजरें टिक गई हैं।

रश्मि सिंह एक अनुभवी पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें हिंदी पत्रकारिता, न्यूज़ रिपोर्टिंग और डिजिटल मीडिया का व्यापक अनुभव है। उन्होंने मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है और अपने पत्रकारिता करियर में कई बड़े मीडिया संस्थानों और न्यूज़ चैनलों के साथ काम किया है।राजनीति, जनसरोकार, उत्तर प्रदेश की सियासत और समसामयिक मुद्दों पर उनकी विशेष पकड़ है। खबरों को सरल, तथ्यपरक और पाठकों के लिए रोचक अंदाज में प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है। डिजिटल पत्रकारिता के बदलते दौर में रश्मि सिंह का प्रयास है कि पाठकों तक तेज, विश्वसनीय और आसान भाषा में तथ्य आधारित खबरें पहुंचें।

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